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CJP प्रोटेस्ट के बीच शशि थरूर ने क्यों शेयर किया अमिताभ बच्चन का 14 साल पुराना ट्वीट

NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर सियासी घमासान के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन का 2012 का पुराना ट्वीट शेयर कर बहस को नई दिशा दे दी. दिल्ली गैंगरेप आंदोलन के दौरान किए गए इस ट्वीट के दोबारा सामने आने से सरकार, विपक्ष और फिल्मी हस्तियों की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है.

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थरूर ने CJP प्रोटेस्ट में छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद इसे रीशेयर किया है (फाइल फोटो)
थरूर ने CJP प्रोटेस्ट में छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद इसे रीशेयर किया है (फाइल फोटो)

NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज है. इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को एक्टर अमिताभ बच्चन का 2012 का एक ट्वीट रीपोस्ट किया. इस ट्वीट में UPA सरकार के कार्यकाल के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की गई थी.

थरूर ने X पर यह पोस्ट बिना अपनी कोई टिप्पणी जोड़े शेयर किया.

2012 के उस ट्वीट में लिखा था: 'T 970 - दिल्ली में जो हो रहा है उसे देखकर दुख और हैरानी हो रही है. शांतिपूर्ण प्रदर्शन का जवाब आंसू गैस और वॉटर कैनन से दिया जा रहा है.'

अमिताभ ने यह संदेश दिसंबर 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले के बाद देश भर में मचे आक्रोश के दौरान शेयर किया था, जब इंडिया गेट और रायसीना हिल के पास प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई थी.

इस बार की बात करें तो शबाना आजमी, प्रकाश राज और स्वरा भास्कर समेत कुछ अभिनेता सीधे तौर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट से जुड़े हैं. हुमा कुरैशी, सोनी राजदान, जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और सोनाक्षी सिन्हा सहित अन्य लोगों ने छात्रों का सपोर्ट किया है.

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अभिनेत्री प्रीति जिंटा और भूमि पेडनेकर ने कोई साफ स्टैंड न लेते हुए कहा कि हिंसा समाधान नहीं हो सकती.

थरूर का यह रीपोस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर हुए भारी राजनीतिक प्रोटेस्ट के एक दिन बाद आया है, जहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अचानक धरना दिया था.

केंद्र के साथ बातचीत विफल होने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा राहुल गांधी और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेने के साथ यह विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ. बाद में गांधी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक असहमति को कुचलने का आरोप लगाया.

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