तरुण तेजपाल को उम्रकैद देने की मांग को लेकर गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. पत्रकार तरुण तेजपाल को मिली सजा को कम बताते हुए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. सरकार ने तेजपाल की सजा बढ़ाने या उन्हें उम्रकैद देने की मांग की है. गोवा सरकार का तर्क है कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई न्यूनतम सजा अपराध की गंभीरता और प्रकृति के सामने बेहद कम और अनुचित है.
याचिका में कहा गया है कि पीड़िता तरुण तेजपाल की फर्म में काम करती थी और तरुण उसके पिता के मित्र भी रहे हैं. लेकिन सरकार का आरोप है कि तरुण ने अपने पद, प्रभाव और विश्वास का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता का शोषण किया.
सरकार ने अदालत से कहा कि तेजपाल ने दो अलग-अलग दिनों में पीड़िता का शोषण किया. लगातार दो दिनों में हुई घटनाएं यह दर्शाती हैं कि उन्होंने अपने पद का जानबूझकर और बार-बार दुरुपयोग किया.
पुलिस ने क्या कहा
गोवा में पुलिस अधीक्षक की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि यह मामला गंभीर बलात्कार की श्रेणी में आता है. इसमें नियोक्ता ने अपनी स्थिति और वर्चस्व का फायदा उठाया है.
सुनवाई के दौरान भी तेजपाल को कोई पछतावा नहीं था. मुकदमे के दौरान उनकी ओर से पीड़िता से बेहद असहज और अपमानजनक सवाल पूछे गए. सरकार का तर्क है कि दोनों घटनाएं अलग-अलग आपराधिक कृत्य हैं, इसलिए इनकी सजा भी एक साथ न होकर अलग-अलग होनी चाहिए. यानी एक सजा पूरी होने के बाद दूसरी सजा शुरू होनी चाहिए.
सजा को और सख्त किया जाए
गोवा सरकार ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने घटना के 13 साल बीत जाने का हवाला देकर न्यूनतम सजा सुनाई है. सरकार के मुताबिक, यह उनकी जघन्य करतूत और कानून के तहत पर्याप्त नहीं है. समाज में कड़ा संदेश और निवारक प्रभाव पैदा करने के लिए तेजपाल को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए. सरकार ने मांग की है कि उन्हें उम्रकैद दी जाए या फिर हाईकोर्ट से दी गई सजा को और सख्त किया जाए.