scorecardresearch
 

असम बाढ़: 20 दिन बाद घर लौटी महिला, सब कुछ तबाह देख भर आईं आंखें

असम के शिवसागर में आई बाढ़ ने नसीमा जमान के परिवार की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है. 20 दिनों तक घर से दूर रहने के बाद जब वे वापस लौटीं, तो उनका घर खंडहर जैसा था. शादी की तस्वीरें, मां का दिया डिनर सेट और बेटियों की किताबें पूरी तरह खराब हो चुकी थीं. नसीमा और उनकी बेटियां अब रिश्तेदारों के साथ रह रही हैं, जहां 15 लोग एक साथ रह रहे हैं.

Advertisement
X
असम बाढ़ में कई घर ताबाह हो गए. (फाइल फोटो-PTI)
असम बाढ़ में कई घर ताबाह हो गए. (फाइल फोटो-PTI)

असम के शिवसागर से बाढ़ की एक बहुत ही भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया है. नसीमा जमान नाम की एक होममेकर 20 दिनों तक अपने घर से दूर रहने के बाद जब रविवार को वापस लौटीं, तो उनका घर किसी खंडहर जैसा लग रहा था. 

बाढ़ का पानी तो थोड़ा उतर गया था, लेकिन घर के अंदर बची तबाही ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं. उनकी शादी की तस्वीरें खराब हो चुकी थीं. उनकी मां का दिया हुआ पुराना डिनर सेट बिखर चुका था. उनकी बेटियों की किताबें पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थीं.

नसीमा बताती हैं, '21 जुलाई की शाम को जब पानी मेरे घर में तेजी से भरने लगा, तो मैंने किसी तरह अपनी जान बचाई. मेरे पति एक सरकारी कर्मचारी हैं. वे उस समय काम के सिलसिले में गुवाहाटी गए हुए थे. शाम ढलते-ढलते पानी उनके सीने तक पहुंच चुका था. बिजली कट चुकी थी और चारों तरफ अंधेरा था. ऐसे में मैं अपनी दो मासूम बेटियों को लेकर घर से निकलने को मजबूर हो गईं. मैंने किसी तरह कुछ जरूरी दस्तावेज, गहने और कपड़े तो बचा लिए, लेकिन सोफा, बेड, अलमारी और रसोई का सारा सामान बाढ़ की भेंट चढ़ गया.

Advertisement

यह भी पढ़ें: असम बाढ़: अब तक 98 मौत, चपेट में 13 जिलों के 1.55 लाख लोग

एक छत के नीचे रह रहे 15 लोग

घर छोड़ने के बाद से नसीमा और उनकी बेटियां शहर में ही अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रही हैं. हालात यह है कि एक ही छत के नीचे करीब 15 लोग एक साथ रह रहे हैं. 

नसीमा कहती हैं कि वे किस्मत वाली हैं कि उन्हें अपनों का साथ मिल गया, लेकिन अपनों के घर में शरण लेना और अपने आशियाने का उजड़ जाना किसी बड़े दर्द से कम नहीं है.

20 दिन बीत जाने के बाद जब वे अपने घर वापस पहुंचीं, तो घर के अंदर अभी भी टखने तक पानी भरा हुआ था. उनकी बेटियों की स्टडी टेबल टूटी पड़ी थीं. नसीमा ने कहा कि सामान तो फिर से खरीदा जा सकता है, लेकिन मेरी शादी की वह एल्बम और मां की यादें कभी वापस नहीं आ सकतीं, जिन्हें मैंने सहेज कर रखा था.

इस दर्दनाक अनुभव के बाद नसीमा और उनकी बेटियां बेहद डरी हुई हैं. उनका कहना है कि वे वापस अपने घर लौटना तो चाहती हैं, लेकिन मन में एक अनजाना खौफ बैठा है. उनके इलाके में पहले कभी ऐसा सैलाब नहीं आया था. उन्हें लगता है कि सड़कों और पुलों के निर्माण की वजह से पानी की निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं, जिस वजह से पानी अब तक रुका हुआ है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: असम में त्राहिमाम! बाढ़ में लोगों के लिए फरिश्ता बने रणदीप हुड्डा, नाव से पहुंचा रहे जरूरत का सामान

नसीमा कहती हैं कि उनकी सबसे बड़ी चिंता घर की सफाई या खोया हुआ सामान नहीं है, बल्कि यह डर है कि जब अगली बार तेज बारिश होगी, तो क्या फिर से ऐसा ही तांडव मचेगा? वे और उनके जैसे तमाम लोग अब सरकार और प्रशासन से बस यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें इस बात का भरोसा मिले कि अगली बार उनका आशियाना इस तरह पानी में नहीं डूबेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

TOPICS:
Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement