scorecardresearch
 

क्या नए सिरे से तय हो रही चीन के साथ LAC पर सीमा रेखा? डिलिमिटेशन से क्या है उम्मीदें

बीजिंग में NSA अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सीमा विवाद पर 25वीं दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद दोनों देशों ने आठ सूत्री साझा बयान जारी किया. इस बार बातचीत में डिलिमिटेशन यानी सीमा रेखा तय करने पर जोर दिया गया, जो सेना पीछे हटाने की पुरानी प्रक्रिया से आगे का कदम है.

Advertisement
X
बीजिंग में डोभाल-वांग यी की मुलाकात हुई थी (Photo: PTI)
बीजिंग में डोभाल-वांग यी की मुलाकात हुई थी (Photo: PTI)

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में हुई अहम बैठक के अगले दिन दोनों देशों ने एक जैसा आठ सूत्री बयान जारी किया है. यह मुलाकात सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधियों यानी SR स्तर की 25वीं बातचीत थी. इस बार बातचीत में एक नया शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है डिलिमिटेशन यानी सीमा रेखा का सटीक निर्धारण. यह कदम अब तक हुई सेना पीछे हटाने और तनाव कम करने की प्रक्रिया से भी आगे का माना जा रहा है, क्योंकि अब बात सीधे सीमा तय करने पर पहुंच गई है.

भारत और चीन के बीच लगभग 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC है. भारत-पाकिस्तान की LoC या भारत-बांग्लादेश सीमा की तरह यह जमीन पर या नक्शे में साफ तौर पर तय नहीं है. दोनों देशों की इसे लेकर अपनी अलग अलग समझ है, यही वजह है कि आए दिन सीमा पर तनाव की खबरें आती रहती हैं.

डिलिमिटेशन का मतलब है कि अब दोनों देश मिलकर कुछ खास इलाकों में सीमा रेखा को साफ तौर पर तय करेंगे, यानी वहां के अक्षांश देशांतर, पहाड़ियों और अन्य पहचान वाले हिस्सों पर सहमति बनाएंगे.

साल 2020 में गलवान झड़प के बाद से और अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक इलाके में सेना पीछे हटाने के बाद से अब तक की बातचीत सिर्फ सैनिकों को पीछे हटाने पर केंद्रित थी. लेकिन अब बात सीमा को स्थायी रूप से तय करने की तरफ बढ़ रही है. साल 2005 में हुए समझौते के मुताबिक भारत और चीन को एक निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों देशों को मंजूर हल तक पहुंचना है, और डिलिमिटेशन इसी दिशा में तकनीकी कदम माना जा रहा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: डोभाल चीन के साथ रिश्तों को रिसेट करने की कोशिश में, क्या बदलेगा इतिहास?

बीजिंग में जारी साझा बयान में जिस शब्द ने सबका ध्यान खींचा है, वह है अर्ली एंड सब्सटेंशियल हार्वेस्ट, यानी शुरुआत में आसान इलाकों को तय किया जाएगा. माना जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े मध्य सेक्टर और पूर्वी सेक्टर के कुछ हिस्सों पर पहले सहमति बन सकती है, जबकि लद्दाख से जुड़ा पश्चिमी सेक्टर सबसे मुश्किल माना जाता है, इसलिए उसे बाद के लिए छोड़ा जा सकता है.

यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे पर आने की उम्मीद है. वे 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने आ सकते हैं, और यह सात साल में उनका पहला भारत दौरा होगा.

वांग यी ने कहा कि पिछले एक साल में दोनों देशों के रिश्तों में अच्छी प्रगति हुई है और भारत-चीन संबंधों का वैश्विक और रणनीतिक महत्व है. बैठक में सीमा मुद्दे के अलावा व्यापार, सीधी उड़ानों और वीजा जैसे मुद्दों पर भी बात हुई, क्योंकि दोनों पक्ष ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान होने वाली शी और मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात की जमीन तैयार कर रहे हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement