पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सांसदों की सीटें बदल दी गई हैं और अब उन्हें एनसीपी (आई) के उन सांसदों के साथ बिठाया गया है जो बीजेपी की तरफ झुक चुके हैं, हालांकि इन सांसदों को अभी तक कोई आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है. उन्होंने कल्याण बनर्जी के निलंबन का मामला भी उठाया और स्पीकर से इस पर जल्द फैसला लेने की मांग की. साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर स्पीकर ने अयोग्यता याचिकाओं पर समय रहते फैसला नहीं लिया तो वे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे.
अभिषेक बनर्जी ने बताया कि जब सदन की कार्यवाही 23 या 24 जुलाई के आसपास शुरू हुई थी, तभी उन्होंने सीट बदलने का मुद्दा स्पीकर के सामने रखा था. उनसे इस बारे में एक अलग से पत्र देने को कहा गया, जो 26 जुलाई को दे दिया गया. इसके बाद वे सौगत रॉय, कीर्ति आजाद और प्रतिमा मंडल के साथ इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए स्पीकर से मिले, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कल्याण बनर्जी के निलंबन का मुद्दा भी दोबारा याद दिलाया, जिस पर स्पीकर ने पहले भरोसा दिलाया था कि फैसला लेने से पहले इस पर फिर से विचार किया जाएगा. लेकिन इस पर भी अब तक कुछ नहीं हुआ है. उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि अगले सत्र से पहले इस मामले को देखा जाएगा. उन्होंने कहा कि वे पहली बार 22-23 जुलाई को स्पीकर से मिले थे और आज 12 अगस्त है, यानी करीब 20 दिन बीत चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
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अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि जिन सांसदों की बात हो रही है, उन्हें न तो अलग गुट के तौर पर मान्यता दी गई है और न ही उसी हिसाब से उनके साथ व्यवहार किया जा रहा है. उनका कहना है कि अगर इन सांसदों को एनसीपी (आई) के तौर पर मान्यता देनी है तो वह फैसला लिया जाए, लेकिन मान्यता रोककर रखते हुए उनका बोलने का समय तृणमूल कांग्रेस के हिस्से से काटा नहीं जा सकता. उन्होंने बताया कि जब ये सांसद सदन में बोलते हैं तो उनका नाम अब भी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम से ही दर्ज होता है.
उन्होंने साफ कहा कि ये सांसद तृणमूल कांग्रेस के जोड़ा फूल चुनाव चिन्ह पर चुने गए थे और ममता बनर्जी की तस्वीर के सहारे वोट मांगकर जीते थे. अब संसद में आकर वे खुलेआम एनडीए का समर्थन करने की बात कह रहे हैं. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ऐसी स्थिति में दसवीं अनुसूची के प्रावधानों की जांच जरूरी है और इन सांसदों की अयोग्यता के सवाल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
उन्होंने बताया कि जून महीने में ही उन्होंने हर सांसद के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिका दायर करते हुए यह मुद्दा स्पीकर के सामने रखा था. तब से करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें लगभग वही पुराना जवाब दिया गया, जबकि याचिकाएं अब भी लंबित पड़ी हैं.
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का हवाला दिया जिनमें कहा गया है कि स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर तय समय के भीतर फैसला लेना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कानून और अदालत के निर्देशों के मुताबिक तय समय में स्पीकर ने इन याचिकाओं पर फैसला नहीं लिया, तो वे मजबूर होकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और वहां से हस्तक्षेप की मांग करेंगे.