फिरोजपुर ब्लॉक विकास एवं पंचायत कार्यालय में सामने आए करीब 1. 80 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब और आगे बढ़ गई है. विजिलेंस ने मामाले में तत्कालीन ADC विकास औरडिप्टी डायरैक्टर ग्रामीण विकास व पंचायत अधिकारी अरूण शर्मा को नामजद किया है. इसके बाद विजिलेंस ने मामले की जांच तेज कर दी है.
यह मामला अक्टूबर 2024 में सामने आया था. तत्कालीन ADC विकास लखविंद्र सिंह रंधावा ने मामले की जानकारी पत्र भेजकर उच्च अधिकारियों को दी थी. इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया था. BDPO की ओर से भी पुलिस को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की गई थी.
मामले में थाना सिटी पुलिस ने 13 दिसंबर 2024 को FIR दर्ज की थी. इसमें तत्कालीन BDPO, तत्कालीन पंचायत समिति चेयरपर्सन और चार डाटा एंट्री ऑपरेटर को आरोपी बनाया गया था. बाद में जांच विजिलेंस को सौंप दी गई.
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11 किश्तों में एक ही फर्म को भुगतान
जांच में सामने आया कि 15वें वित्त आयोग की करीब 1,80,87,591 रुपये की राशि एक ही फर्म को 11 किश्तों में दी गई थी. यह भुगतान 26 मई 2024 से 23 जून 2024 के बीच हुआ बताया गया है. बता दें की संबंधित फर्म ममदोट के गांव कड़मा में टाइल बनाने का काम करती है.
तत्कालीन ADC विकास ने 25 अक्टूबर 2024 को BDPO को भेजे पत्र में सरकारी राशि के गबन का जिक्र किया था. पत्र में यह भी कहा गया था कि भुगतान के दौरान योजनाओं का रिकॉर्ड ठीक से नहीं देखा गया और जरूरी जांच भी नहीं की गई.
पांच महीने बाद कैसे पता चला घोटाला?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी रकम का गलत भुगतान होने के बाद करीब पांच महीने तक इसकी जानकारी विभाग को क्यों नहीं हुई. विभाग में हर महीने कैश बुक में आमदनी और खर्च का पूरा हिसाब दर्ज किया जाता है. ऐसे में इतनी बड़ी रकम के भुगतान पर समय रहते नजर क्यों नहीं पड़ी, यह भी जांच का अहम हिस्सा है.
अब PCS अधिकारी अरुण शर्मा के नाम जुड़ने के बाद मामले की जांच एक नए स्तर पर पहुंच गई है. विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी पैसे के इस पूरे भुगतान में किसकी क्या भूमिका थी और रकम आखिर किस तरह खर्च की गई.