टीएमसी विधायक कुणाल घोष पर हमले को लेकर पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि बेलियाघाटा से विधायक कुणाल घोष पर यह हमला 18 घंटे से भी कम समय में दूसरी बार हुआ है.
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि हथियारबंद लोगों ने एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को निशाना बनाया और कथित तौर पर इसलिए परेशान किया क्योंकि उन्होंने पाला बदलने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सुरक्षा और स्थिति ऐसी है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे पश्चिम बंगाल में आम नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा.
उन्होंने राज्यपाल आरएन रवि से तुरंत हस्तक्षेप करने और पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर से बात करने की अपील की. अभिषेक बनर्जी ने कहा कि हर आरोपी की पहचान कर उसे कानून के मुताबिक सजा दिलाई जानी चाहिए और हिंसा तथा डराने-धमकाने का यह सिलसिला रुकना चाहिए.
अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह मानती है कि उसने पश्चिम बंगाल में जनता के जनादेश के जरिए जीत हासिल की है, तो पाला बदलने से इनकार करने वालों के खिलाफ डराने-धमकाने और इस तरह की रणनीति का सहारा क्यों लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता शांति, सुरक्षा और कानून का राज चाहती है और राजनीतिक हिंसा की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है.
शनिवार को अंडे से हुआ था हमला
इससे पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में सैरामपुर में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की बैठक में शामिल होने जा रहे टीएमसी विधायक कुणाल घोष की कार पर कथित तौर पर पत्थर और अंडे फेंके गए थे. पार्टी नेता के मुताबिक, उत्तरपाड़ा इलाके में काले झंडे लेकर पहुंचे लोगों के एक समूह ने कुणाल घोष की गाड़ी को घेर लिया और ‘गो बैक’ के नारे लगाए.
आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने टीएमसी विधायक की कार पर अंडे और पत्थर फेंके, जिससे कार का पिछला शीशा टूट गया. कुणाल घोष ने इसे ‘जंगल राज’ बताते हुए कहा था कि उनकी कार पर पत्थर और अंडे फेंके गए और रास्ता रोक दिया गया. उन्होंने पुलिसकर्मियों के मौके पर मौजूद नहीं होने का भी आरोप लगाया था. कुणाल घोष बाद में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोलकाता पुलिस मुख्यालय लाल बाजार या भवानी भवन जाने की बात कहते हुए भवानी भवन पहुंचे थे. हालांकि, उनका आरोप था कि उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई. उन्होंने कहा था कि वह पुलिस अधिकारी से बात करना और अपनी कार की स्थिति दिखाना चाहते थे, लेकिन उन्हें पुलिस से मदद नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने अलीपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.