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आंखों देखी: पोस्टर, नारे और जोश... मुंबई में ऐसे खड़ा हुआ Gen Z आंदोलन

जंतर-मंतर से उठी आवाज मुंबई तक कैसे पहुंची? दादर में जेन Z का आंदोलन किस तरह आकार लेता गया, पढ़िए यह आंखों देखी रिपोर्ट.

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दादर की सड़कों पर दिखा युवाओं का गुस्सा. (Photo: ITG)
दादर की सड़कों पर दिखा युवाओं का गुस्सा. (Photo: ITG)

महाराष्ट्र के अभिजीत दिपके ने जैसे ही जंतर-मंतर पर अपना डेरा जमा लिया, वैसे ही महाराष्ट्र में भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए युवा रास्ते पर आ गया. पहले दो दिन का माहौल ऐसा था कि ना कोई इनविटेशन, ना किसी पॉलिटिकल पार्टी या संगठन का समर्थन. युवा शहर के अलग-अलग हिस्सों में साथ आकर प्रदर्शन करते दिख रहे थे. जैसा माहौल जंतर-मंतर पर था, कुछ वैसी ही वाइब मुंबई के दादर और आजाद मैदान के पास दिखी. लेकिन जल्द ही जेन ज़ी ने दादर को अपना जंतर-मंतर बना दिया. बस फर्क इतना था कि यह धरना नहीं था. हर रोज शाम को आना है, पोस्टर उठाने हैं, नारे देने हैं और क्रिएटिविटी का प्रदर्शन करना है.

चैत्यभूमि पर हुई पुलिस की ज्यादती की वजह से शिवसेना और एमएनएस पिक्चर में आई.

अभिजीत दिपके ने 20 तारीख को हर शहर में आंदोलन करने की अपील की. दोपहर के बाद बड़ी तादाद में युवा चैत्यभूमि पर जमा हुए. वहीं पुलिस ने बच्चों की धरपकड़ शुरू कर दी. कुछ बच्चों को पुलिस थाने ले जाया गया. इस समय जो दृश्य टीवी पर दिखे, वो काफी डिस्टर्बिंग थे. बच्चों के मोबाइल निकाल लिए ताकि कोई वीडियो ना बनाए और किसी से संपर्क ना हो. इस वजह से बच्चों के पैरेंट्स भी गुस्सा हुए. पुलिस पर असंवेदनशील होने का आरोप लगा. बच्चों को डिटेन करने और उन पर केस दर्ज करने की खबर मिलते ही शिवसेना और एमएनएस के नेता पुलिस थाने पहुंचे और बच्चों को छुड़ाने के लिए मदद करने लगे. इतना ही नहीं, शिवसेना ने बच्चों की लीगल हेल्प के लिए एक ईमेल भी जारी किया.

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पुलिस के उस वीडियो ने इमेज को झटका

23 तारीख को पुलिस का एक वीडियो सामने आया, जिसमें 3 बच्चों को डिटेन करके वैन में बैठाया गया था. एक पुलिस कॉन्स्टेबल धमका रहा था कि अगर फिर से प्रोटेस्ट में शामिल हो गए तो 50 ग्राम का पाउडर पॉकेट में डालकर केस कर दूंगा. यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गया. जिसके बाद पुलिस के प्रोटेस्ट के प्रति रवैये पर सवाल खड़े हो गए. लेकिन जेन ज़ी फिर भी हर रोज दादर में आकर प्रोटेस्ट कर रहे थे.

राज ठाकरे का घर बना प्रोटेस्ट का सेफ ठिकाना

राज ठाकरे दादर के शिवाजी पार्क एरिया में रहते हैं. वहीं बच्चों के खेलने का ग्राउंड भी है. वहीं ज्यादा तादाद में लोगों के जमा होने की जगह भी है. उसी जगह जेन ज़ी ने अपना ठिकाना बना लिया. हर रोज दोपहर के बाद शिवाजी पार्क में भीड़ बढ़ जाती थी. पहले दिन पुलिस ने राज के घर के सामने नारे लगाते बच्चों को डिटेन कर गाड़ी में भरना शुरू किया. उसी वक्त राज की पत्नी शर्मिला और बेटे अमित ने पुलिस से भिड़कर सभी बच्चों को पुलिस की गाड़ी से उतार दिया. दूसरे ही दिन राज ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस को आगाह किया कि अगर किसी ने भी बच्चों को तकलीफ दी, तो MNS वहां पुलिस के सामने खड़ी हो जाएगी.

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शिवाजी पार्क का राष्ट्रगान गेम चेंजर रहा

ठाकरे ब्रदर्स ने 24 तारीख को राष्ट्रगान का आयोजन कर प्रोटेस्ट में शामिल होने की घोषणा की. उस दिन दोपहर से ही शिवाजी पार्क के रास्ते बच्चों से भरे हुए थे. पैर रखने की जगह भी पार्क के रास्तों पर नहीं थी. बच्चों को शिवसेना-MNS का समर्थन हासिल था. आंदोलन की छूट भी...

प्लेकार्ड और नारे... उनका उपरोध ही सबसे बड़ा वेपन

मुंबई के दादर में हुए 24 तारीख के प्रोटेस्ट में हजारों बच्चे थे. हर भाषा बोलने वाले, हर धर्म के और अलग-अलग जगह पढ़ने वाले. सभी बच्चों की एवरेज एज 25 से ज्यादा नहीं होगी. उनके हाथ में जितने भी प्लेकार्ड थे, वो सभी क्रिएटिव थे. कुछ पर लिखा था, "मेरे कुचुपुचु, तुम रिजाइन कब दोगे?" ऐसे प्यार भरे अंदाज में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा था. कुछ पर लिखा था, "हमसे ब्रेकअप कर लो... आप हमें नहीं चाहिए..." मुंबई के हर इलाके से आए इन बच्चों के एक्सप्रेस होने के तरीके भी चौंकाने वाले थे. मुंबई के बांद्रा में रहने वाली साक्षी भालेराव ने कहा, "इस सरकार की कम्युनिकेशन बेहद वीक है. मेरे एक्स बॉयफ्रेंड की कम्युनिकेशन भी इतनी वीक नहीं थी. हम लोग उन 20 बच्चों के लिए प्रोटेस्ट कर रहे हैं, जिन्होंने NEET में धांधली के चलते अपनी जान गंवा दी. उनके माता-पिता से इस सरकार ने क्या कभी बात की है?"

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वेस्टर्न सबर्ब से आई दूसरी लड़की ने कहा, "बस NEET ही मसला नहीं है. यहां पीने के लिए साफ पानी नहीं है, सेहत के लिए हवा साफ नहीं है. घर से बाहर निकलते हैं तो रास्ते पर गड्ढे हैं. हम किस तरफ जा रहे हैं?"

दूसरे युवा ने बात करते हुए कहा, "हम किसी पॉलिटिकल पार्टी को सपोर्ट नहीं करते. हम बस यहां शिक्षा के मसले को लेकर आए हैं. हमें किसी पार्टी में कोई दिलचस्पी नहीं है."

प्रधान का इस्तीफा और जेन जी का सेलिब्रेशन

शिवसेना-MNS ने आज मार्च का आयोजन किया था, लेकिन उससे पहले ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया. मार्च सेलिब्रेशन में बदल गया. आज सुबह उद्धव ठाकरे ने युवाओं से बात करते हुए कहा कि हमें अब राजनीति में साफ-सुथरी छवि वाले लोग चाहिए. पार्टियां तोड़ने वाले, युवाओं की बात ना सुनने वालों के लिए जगह नहीं है. राज ठाकरे ने युवाओं के जोश की तारीफ की और उन्हें धन्यवाद देते हुए जागते रहने की सलाह भी दी. इसके बाद जेन ज़ी लगातार दो घंटे तक देशप्रेम पर लिखे गीतों का सेलिब्रेशन करते रहे.

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