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'ऐसा लगा कि अब नहीं बचूंगी...' तभी फरिश्ते बनकर आए कुछ लड़के... लैंडस्लाइड के बाद मलबे में दबी महिला की कहानी

धनबाद के छाताबाद में भू-धंसान ने ऐसी तबाही मचाई कि देखते ही देखते घर मलबे में बदल गए. इसी मलबे के नीचे नजमा खातून भी दब गई थीं. उन्हें लगा कि अब जिंदगी खत्म होने वाली है. लेकिन तभी मोहल्ले के कुछ लड़के फरिश्ते बनकर पहुंचे. मलबा हटाया और नजमा को बाहर निकाल लिया. नजमा ने कहा कि मुझे जिंदा बचने की कोई आस नहीं थी, लेकिन रब का करम हुआ और मैं बच निकली.

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मलबे में दबी जिंदगी की कहानी दिल दहला देगी. (Photo: Screengrab)
मलबे में दबी जिंदगी की कहानी दिल दहला देगी. (Photo: Screengrab)

ये कहानी झारखंड के धनबाद की है. लोग अपने-अपने घरों में थे. किसी को खाना बनाना था, किसी को बच्चों की चिंता थी, तो कोई दिनभर के काम के बाद आराम कर रहा था. तभी अचानक जमीन हिलने लगी. पहले लगा शायद कोई मामूली कंपन है. लेकिन अगले कुछ सेकेंड में जो हुआ, उसने पूरे इलाके को दहला दिया. जमीन धंसने लगी. घर भरभराकर गिरने लगे. देखते ही देखते मकान मलबे में बदल गए. और इसी मलबे के बीच नजमा खातून भी दब गईं.

चारों तरफ अंधेरा था. ऊपर मलबा था और नीचे जमीन. सांस लेना मुश्किल हो रहा था. आसपास चीख-पुकार सुनाई दे रही थी. नजमा को लगा कि शायद अब जिंदगी यहीं खत्म हो जाएगी. उन्होंने शायद उम्मीद भी छोड़ दी थी. फिर अचानक बाहर से कुछ आवाजें आने लगीं. कुछ लड़के मलबा हटाने के लिए पहुंच चुके थे. वे पत्थर हटा रहे थे. मिट्टी हटा रहे थे. उन्हें बस एक ही बात पता थी कि मलबे के नीचे कोई जिंदा है और उसे बाहर निकालना है.

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काफी मशक्कत के बाद जब नजमा को बाहर निकाला गया, तो उनकी आंखों में राहत थी. चेहरे पर जिंदगी वापस मिलने की खुशी थी. बाहर आने के बाद नजमा ने अपनी आपबीती सुनाई तो बस इतना कहा कि मुझे जिंदा बचने की कोई आस नहीं थी. लेकिन रब का करम हुआ और मैं बच निकली.

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यह भी पढ़ें: धनबाद में फिर धंसी घरती, एक दर्जन से ज्यादा घर जमींदोज, 12 लोग घायल

दरअसल, धनबाद के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में शुक्रवार शाम अचानक बड़े इलाके में भू-धंसान हुआ. किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला. जमीन का एक बड़ा हिस्सा धंस गया. कई जगह जमीन फट गई. देखते ही देखते एक दर्जन से ज्यादा घर धराशायी हो गए. कई मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं. और दो मंजिला मकान तो पूरी तरह जमीन में समा गया.

I Thought I Would Not Survive Women Rescued Alive Debris Land Subsidence

सोचिए, जिस घर में कुछ देर पहले तक लोग रह रहे थे, जिस घर की दीवारों के पीछे परिवार की जिंदगी चल रही थी, वो घर कुछ ही पलों में जमीन के अंदर चला गया. इलाके में अफरा-तफरी मच गई. किसी को अपने घर की चिंता थी, तो कोई पड़ोसी को ढूंढ रहा था. किसी को डर था कि उसके परिवार का कोई सदस्य मलबे में न दबा हो.

इसी अफरा-तफरी के बीच पता चला कि कुछ लोग घरों के अंदर फंसे हुए हैं. नजमा खातून भी मलबे के ढेर के बीच दब गई थीं. बाहर से लोग उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन हालात बेहद मुश्किल थे. मलबा भारी था. जगह-जगह जमीन धंसी हुई थी. और हर पल ये डर बना हुआ था कि कहीं और जमीन न धंस जाए. ऐसे में नजमा के जिंदा निकलने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही थी.

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I Thought I Would Not Survive Women Rescued Alive Debris Land Subsidence

नजमा के लिए वो पल शायद जिंदगी के सबसे लंबे पल थे. अंधेरे में दबे हुए उन्हें पता नहीं था कि बाहर क्या हो रहा है. बस आवाजें सुनाई दे रही थीं. और मन में एक ही सवाल कि क्या मैं यहां से जिंदा निकल पाऊंगी? नजमा को लगा कि अब शायद बचना मुश्किल है. लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी.

इलाके के कुछ युवक मौके पर पहुंचे. उन्होंने ये नहीं सोचा कि मलबा कितना भारी है. ये नहीं सोचा कि जमीन दोबारा धंस सकती है. उन्होंने बस मलबा हटाना शुरू कर दिया. कोई हाथों से मिट्टी हटा रहा था. कोई पत्थर निकाल रहा था. कोई दूसरे लोगों को आवाज देकर मदद के लिए बुला रहा था. एक-एक करके मलबे का हिस्सा हटाया जाने लगा. और फिर नजमा को मलबे से बाहर निकाला गया.

नजमा की आंखों में राहत साफ दिखाई दे रही थी. वो बाहर आईं तो जैसे उन्हें दोबारा जिंदगी मिल गई हो. उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि मुझे जिंदा बचने की कोई आस नहीं थी. लेकिन रब का करम हुआ और मैं बच निकली. उनकी ये बात सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं. 

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लेकिन छाताबाद की तस्वीर सिर्फ इतनी नहीं है. भू-धंसान ने पूरे इलाके को हिला दिया. एक दर्जन से ज्यादा घर धराशायी हुए. कई घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गईं. एक दो मंजिला मकान पूरी तरह जमीन में समा गया. हादसे में करीब एक दर्जन लोगों के घायल होने की बात सामने आई है.

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घटना के बाद स्थानीय लोगों ने ही सबसे पहले राहत और बचाव का काम संभाला. जिसे जो मिला, उसी से मलबा हटाने में जुट गया. किसी ने हाथ से मिट्टी हटाई, किसी ने लोगों को बाहर निकाला और किसी ने घायलों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में मदद की. बाद में पुलिस, जिला प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. हादसे के बाद इलाके में सिर्फ डर नहीं था. गुस्सा भी था.

यह भी पढ़ें: अंडाल भू-धंसान: 24 घंटे बाद भी दहशत बरकरार, घरों में रह गए जरूरी दस्तावेज, पुनर्वास और मुआवजे की मांग तेज

बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुटे और बीसीसीएल तथा जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से भू-धंसान का खतरा बना हुआ था. लोगों का कहना है कि जमीन के नीचे की गतिविधियों और भू-धंसान की आशंका को लेकर पहले से चिंता थी, लेकिन सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए.

अब हादसे के बाद वही सवाल फिर खड़े हो गए हैं कि अगर खतरा पहले से था तो लोगों को सुरक्षित जगह क्यों नहीं पहुंचाया गया? अगर जमीन धंसने का डर था तो मकानों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए? और अगर खतरा इतना बड़ा था, तो आखिर लोगों को उसी इलाके में रहने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा? 

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नजमा बच गईं. मोहल्ले के कुछ लड़कों ने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया. लेकिन उनके सामने अब भी एक बड़ा सवाल है कि वो घर, जिसमें जिंदगी बीत रही थी, अब रहेगा कहां? छाताबाद के उन तमाम परिवारों के सामने यही सवाल खड़ा है. जिन घरों में कभी चूल्हा जलता था, वहां अब मलबा है. जिन दीवारों के भीतर बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब दरारें हैं. और जिस जमीन पर लोग अपने भविष्य का घर बना रहे थे, वही जमीन अब उनके लिए डर की वजह बन गई है.

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