यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज शिमला-कालका रेलवे सेक्शन पर पहाड़ी खिसकने के कारण ट्रेन सेवाएं बाधित हो गई हैं. कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच टकसाल में इस लैंडस्लाइड के कारण टॉय ट्रेन का ट्रैक हवा में लटक गया. यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उत्तर रेलवे ने प्रभावित सेक्शन पर 1 सितंबर तक सभी ट्रेन सेवाओं को रद्द कर दिया है. घटना के बाद रेलवे ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और प्रभावित ट्रेनों में सवार करीब 391 यात्रियों को सड़क मार्ग से सुरक्षित कालका पहुंचाया.
यह घटना शिमला-कालका रेलवे सेक्शन पर कोटी और घुम्मन स्टेशनों के बीच ब्रिज नंबर 57 (किमी 7/16-17) के पास हुई. पहाड़ी से मलबा खिसकने के बाद रेलवे ट्रैक प्रभावित हुआ, जिसके चलते इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी.
घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे अधिकारियों ने इस रूट पर आ रही चार ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर शॉर्ट टर्मिनेट करने का फैसला किया. ट्रेन नंबर 52456 को सोलन, ट्रेन नंबर 52452 को कोटी, जबकि ट्रेन नंबर 52460 और 52454 को धर्मपुर हिमाचल स्टेशन पर रोक दिया गया.
यात्रियों को निकालने के लिए लगाईं 7 गाड़ियां
ट्रेनों में सवार यात्रियों को बीच रास्ते में फंसे रहने से बचाने के लिए उत्तर रेलवे ने सड़क मार्ग से उन्हें कालका पहुंचाने की व्यवस्था की. इसके लिए कुल सात वाहनों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें पांच बड़ी बसें और दो टेंपो ट्रैवलर शामिल थे.
इन वाहनों ने सोलन, कोटी और धर्मपुर हिमाचल से यात्रियों को लेकर उन्हें सुरक्षित कालका रेलवे स्टेशन पहुंचाया. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में करीब 391 यात्रियों के साथ ट्रेन क्रू और IRCTC के 40 कर्मचारियों को सुरक्षित कालका लाया गया. रेलवे अधिकारी विपिन पौडवाल और ट्रेनों में तैनात टीटीई स्टाफ भी सड़क मार्ग से जा रहे काफिले के साथ मौजूद रहे. रेलवे के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा और उनके सुचारू परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी पूरे रास्ते काफिले के साथ रहे.
कालका में खाने-पानी की व्यवस्था
कालका रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद यात्रियों के लिए रेलवे ने खाने-पीने और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की. करीब 250 ताजा फूड पैकेट और पानी की बोतलें यात्रियों को वितरित की गईं. स्थानीय यात्री इसके बाद अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए. वहीं आगे की यात्रा करने वाले करीब 120 यात्रियों को ट्रेन नंबर 13052 में जगह दी गई. यात्रियों को आगे की कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए इस ट्रेन को विशेष रूप से री-शेड्यूल किया गया और रात 1:30 बजे रवाना किया गया.
1 सितंबर तक ट्रेन सेवाएं रद्द
उत्तर रेलवे के मुताबिक, त्वरित कार्रवाई, सड़क मार्ग से यात्रियों को निकालने और स्टेशन पर सहायता उपलब्ध कराने के चलते पूरा ऑपरेशन सुचारू रूप से पूरा किया गया. रेलवे का दावा है कि इस घटना के संबंध में कालका स्टेशन पर किसी यात्री की शिकायत या रिफंड की मांग दर्ज नहीं हुई.
पहाड़ी खिसकने के बाद पैदा हुए सुरक्षा जोखिम को देखते हुए प्रभावित शिमला-कालका सेक्शन पर 1 सितंबर तक ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी गई हैं. उत्तर रेलवे ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित एवं सुचारू परिवहन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.