वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव का प्रचार कल शाम 5 बजे खत्म हो चुका है. भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन से खाली हुई इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है जिसके नतीजे 3 अगस्त को घोषित होंगे. भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच इस सीट पर सीधा मुकाबला है.
आम तौर पर उपचुनाव में आम मुद्दों पर चर्चा नहीं होती लेकिन इस बार कांग्रेस ने शहरी इलाकों में भाजपा के भ्रष्ट शासन के आरोपों के साथ चुनाव प्रचार किया है. यह सीट पारंपरिक तौर से भाजपा की सीट है और इस सीट से भाजपा विधायक योगेश पटेल लगातार जीतते आए थे. अब उनके निधन से खाली हुई इस सीट पर भाजपा को पूरा विश्वास है कि वह अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब रहेगी.
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा समेत पुराने दिग्गजों ने इस सीट पर पार्टी के लिए प्रचार किया है. लेकिन दोनों ही पक्षों के लिए मौसम सबसे बड़ी दिक्कत बना क्योंकि उपचुनाव घोषित होने के बाद पिछले 15 दिनों से राज्य में भारी बारिश हो रही है. चुनाव के दिन भी बारिश का पूर्वानुमान है जिसके कारण हो सकता है कि मतदान कम हो. वैसे भी उपचुनाव में कम ही मतदान होता है.
यह भी पढ़ें: योगी सरकार का चुनाव से पहले बड़ा दांव, 4 अगस्त को पेश होगा अनुपूरक बजट... जनता पर रहेगा पूरा फोकस
मांजलपुर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन से खाली हुई सीट पर पार्टी ने पूर्व जिला अध्यक्ष सतीश पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है. पटेल वडोदरा नगर निगम के पार्षद और स्थायी समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं. उन्होंने कई सहकारी संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका निभाई है, उनकी यह भूमकि स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ने में उनकी मदद करेगा. भाजपा द्वारा उनके चयन के पीछे "पाटीदार फैक्टर" को भी एक अहम वजह माना जा रहा है. मांजलपुर सीट हमेशा से पाटीदार बाहुल्य सीट मानी जाती रही है और भाजपा ने एक पाटीदार नेता को टिकट देकर इस समुदाय को साधने की कोशिश की है.
इस फैसले के जरिए भाजपा ने योगेश पटेल के निधन के बाद भी पाटीदार मतदाताओं को पार्टी पर भरोसा बनाए रखने का संदेश दिया है. मांजलपुर सीट पर 14% पाटीदार मतदाता, 12% मराठी मतदाता, 16% ओबीसी, 7% एससी और 14% सवर्ण मतदाता हैं.
भाजपा ने जहां पाटीदार नेता पर दांव चला है, वहीं कांग्रेस ने एक अनुभवी नेता को मैदान में उतार कर मुकाबला और दिलचस्प कर दिया है. कांग्रेस नेता भीखाभाई रबारी वडोदरा की राजनीति में चर्चित नाम रहे हैं. अगर उनके राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो 1975 से 1985 तक विधानसभा चुनाव में वे भारी बहुमत से विधायक चुने गए थे. 1985 में कांग्रेस सरकार में उन्होंने राज्य मंत्री के तौर पर काम किया था.
यह भी पढ़ें: छात्रों पर बर्बरता, RSS का कंट्रोल और शाह पर सवाल... राहुल ने पेपर लीक पर ऐसे घेरा
भीखाभाई ज़मीनी स्तर की राजनीति के लिए जाने जाते हैं. वे अक्सर आम जनता के मुद्दों, महंगाई या स्थानीय प्रशासन की विफलता के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे हैं. प्रशासन ने भी चुनाव की पूरी तैयारी कर ली है. अब तीन अगस्त को पता चलेगा कि मांजलपुर की जनता किसपर विश्वास जताती है.