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ट्रैक पर सामने था जंगल का राजा, ड्राइवर ने रोक दी ट्रेन... सूझबूझ से बच गई एशियाई शेर की जान

गुजरात के सासन गिर में कुछ सेकेंड की सतर्कता ने एक एशियाई शेर की जान बचा ली. वेरावल-जूनागढ़ पैसेंजर ट्रेन के सामने अचानक ट्रैक पर शेर आ गया. लोको पायलट ने देखा तो इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए. ट्रेन रुक गई, वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और फिर शेर सुरक्षित जंगल की ओर लौट गया. रेलवे का कहना है कि ऐसी अलर्टनेस की वजह से ढाई साल में 300 से ज्यादा शेरों को ट्रेन की चपेट में आने से बचाया जा चुका है.

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रेलवे ट्रैक पर आ गया था शेर. (Photo: Screengrab)
रेलवे ट्रैक पर आ गया था शेर. (Photo: Screengrab)

गुजरात के जूनागढ़ स्थित सासन गिर क्षेत्र में एक लोको पायलट की सतर्कता ने एशियाई शेर की जान बचा ली. वेरावल-जूनागढ़ पैसेंजर ट्रेन के सामने अचानक शेर रेलवे ट्रैक पर आ गया. लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी. इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शेर को सुरक्षित ट्रैक से हटाया.

दरअसल, वेरावल–जूनागढ़ पैसेंजर ट्रेन अपने रूट पर सासन गिर-कांसियानेश रेलखंड से गुजर रही थी. अचानक ट्रैक पर एक एशियाई शेर दिखाई दिया. लोको पायलट चंदन कुमार और सहायक लोको पायलट मोहम्मद शिब्ली ने बिना एक पल गंवाए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए. ट्रेन समय रहते रुक गई. अगर कुछ सेकेंड की भी देरी होती, तो शेर की जान जा सकती थी.

यहां देखें Video

ट्रेन रुकने के बाद रेलवे ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी. कुछ ही देर में फॉरेस्ट ट्रैकर जेजी परमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने शेर को सुरक्षित तरीके से ट्रैक से हटाया और उसके जंगल की ओर लौटने का रास्ता बनाया. इसके बाद जब ट्रैक पूरी तरह खाली हो गया, तभी ट्रेन को आगे रवाना किया गया.

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यह पहली बार नहीं है जब सासन गिर में रेलवे ट्रैक पर शेर दिखाई दिया हो. दरअसल, एशियाई शेरों का इलाका कई जगह रेलवे लाइन के आसपास फैला हुआ है. ऐसे में ट्रैक पार करते समय वन्यजीवों के सामने आने की घटनाएं होती रहती हैं. इसी वजह से यहां ट्रेन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए जाते हैं और रेलवे-वन विभाग के बीच लगातार कोऑर्डिनेशन बना रहता है.

asian lion saved after loco pilot applies emergency brake on rail track in junagadh gir

रेलवे के मुताबिक, इस प्लानिंग का असर भी दिख रहा है. भावनगर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अतुल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 159, 2025-26 में 129, जबकि 2026-27 में अप्रैल से अब तक 32 एशियाई शेरों को ट्रेन की चपेट में आने से बचाया जा चुका है. यानी पिछले ढाई साल में 320 से ज्यादा शेरों की जान समय रहते बचाई गई है.

घटना के बाद मंडल रेल प्रबंधक दिनेश वर्मा और अपर मंडल रेल प्रबंधक ऋत्विक शर्मा समेत रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों लोको पायलटों की सराहना की. रेलवे ने कहा कि सासन गिर जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में कर्मचारियों की सतर्कता और वन विभाग के साथ बेहतर तालमेल ही ऐसी घटनाओं को होने से रोक रहा है. सासन गिर ऐसा अनोखा प्राकृतिक आवास है, जहां एशियाई शेर खुले जंगल में रहते हैं. 

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