राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उत्तर कोरिया के टकराव में अब तानाशाह किम जोंग की बहन उतरीं हैं. उत्तर कोरिया की राजनीति में नंबर टू का दर्जा रखने वाली किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले बड़े सैन्य अभ्यास को कम करने पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने कहा कि सिर्फ सैनिकों की संख्या, अभ्यास की अवधि या गतिविधियों को कम कर देने से इन अभ्यासों का चरित्र नहीं बदलता.
किम यो जोंग ने अमेरिका साफ संदेश दिया है कि इस कदम से दक्षिण कोरिया की 'उकसावे वाली और आक्रामक प्रकृति' नहीं बदलती. उन्होंने ट्रंप के फैसले को इतना महत्व देने से भी इनकार किया कि उस पर टिप्पणी की जाए.
दरअसल, अमेरिका और दक्षिण कोरिया हर साल बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास करते हैं. इस साल का प्रमुख अभ्यास ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ था. उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है. लंबे समय तक तानाशाही के अधीन रहने वाले उत्तर कोरिया का आरोप है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन सैन्य अभ्यासों के जरिए उत्तर कोरिया पर हमले की तैयारी करते हैं. वहीं अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन्हें अपनी सैन्य तैयारियों और संयुक्त रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाला अभ्यास बताते हैं.
11 दिन से घटकर 5 दिन हुआ अभ्यास
ट्रंप ने अमेरिकी सेना को दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले सैन्य अभ्यासों में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया है. इसके बाद इस साल के उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास की अवधि 11 दिन से घटाकर पांच दिन कर दी गई है. फील्ड ट्रेनिंग की गतिविधियों में भी कमी की गई है. अमेरिकी सेना का कहना है कि बदलाव के बावजूद जरूरी सैन्य प्रशिक्षण के लक्ष्य हासिल किए जाएंगे.
ट्रंप के फैसले के पीछे उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने की कोशिश को भी एक वजह माना जा रहा है. ट्रंप लगातार किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे व्यक्तिगत संबंधों की बात करते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने यह भी कहा था कि उत्तर कोरिया के नेता के साथ संपर्क को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में है.
लेकिन प्योंगयांग ने सैन्य अभ्यास कम किए जाने को किसी बड़े कूटनीतिक संकेत के तौर पर स्वीकार नहीं किया है.
किम यो जोंग ने क्यों ठुकराया ट्रंप का कदम?
किम यो जोंग का कहना है कि उत्तर कोरिया के लिए असली मुद्दा यह है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का सैन्य अभ्यास अभी भी जारी है. उनके मुताबिक सिर्फ सैनिकों की संख्या, अभ्यास की अवधि या गतिविधियों का स्तर कम कर देने से इन अभ्यासों का चरित्र नहीं बदलता.
उत्तर कोरिया ने कहा है कि जब तक अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास करते रहेंगे, उत्तर कोरिया इन्हें अपने खिलाफ सैन्य दबाव के रूप में देखता रहेगा.
अमेरिका-उत्तर कोरिया संबंधों में सैन्य अभ्यास पहले भी कूटनीति का हिस्सा बन चुके हैं. 2018 में ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने कुछ बड़े सैन्य अभ्यासों को रोकने या सीमित करने का फैसला किया था. उस समय ट्रंप ने इन अभ्यासों को महंगा और उत्तर कोरिया के लिए उकसावे वाला बताया था.
लेकिन बाद में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच परमाणु वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी. दोनों देशों के बीच प्रतिबंध हटाने और उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर मतभेद बने रहे.
अब ट्रंप प्रशासन फिर से किम जोंग उन के साथ संवाद की संभावना तलाश रहा है. ऐसे में सैन्य अभ्यासों में कटौती को तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन किम यो जोंग की ताजा प्रतिक्रिया बताती है कि सिर्फ सैन्य अभ्यास कम करना उत्तर कोरिया को बातचीत की टेबल पर लाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा.