
गुजरात के अहमदाबाद में शराबबंदी के बीच शराब परमिट रिन्यूअल में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. साल 2023 के दौरान 30 से अधिक शराब परमिट तय सरकारी खर्च के अलावा दलालों को ₹25,000 अतिरिक्त देकर रिन्यू कराए गए.
इस अवैध तरीके से आवेदकों को मेडिकल जांच और कागजी औपचारिकताओं से पूरी छूट मिल गई. आवेदन पत्रों पर मूल आवेदक की जगह एजेंटों या अन्य लोगों के हस्ताक्षर पाए गए. नशाबंदी विभाग के अधीक्षक ने माना कि ऐसे मामलों में केवल बयान लेकर परमिट जारी कर दिए गए.
तय फीस के अलावा ₹25,000 की वसूली
गुजरात में स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर डॉक्टरों की राय और मेडिकल जांच के बाद नशाबंदी विभाग एक से तीन साल के लिए शराब परमिट जारी करता है. समय-सीमा समाप्त होने पर इसे रिन्यू कराना अनिवार्य होता है. अहमदाबाद में साल 2023 में 30 से ज्यादा मामलों में सामने आया कि दलालों ने तय फीस के अलावा ₹25,000 अतिरिक्त वसूले. इसके बदले आवेदकों को मेडिकल जांच से मुक्ति दी गई और फॉर्म पर दलालों या उनके सहयोगियों ने दस्तखत कर दिए.

अहमदाबाद नशाबंदी विभाग के अधीक्षक सागर मांगरोलिया ने बताया कि 2023 में कुछ आवेदनों में मूल आवेदक के दस्तखत न होने और अन्य लोगों द्वारा आवेदन किए जाने की बात सामने आई थी. हालांकि, जानकारी मिलने पर मूल आवेदकों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उनके हस्ताक्षर और बयान लिए गए. इसके बाद परमिट रिन्यू कर दिए गए. उन्होंने पुष्टि की कि उस समय इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी.

अब प्रक्रिया हुई ऑनलाइन
अधीक्षक सागर मांगरोलिया ने आगे बताया कि उस वक्त के अधीक्षक और कर्मचारी अब बदल चुके हैं. उस घटना के सामने आने के बाद रिन्यूअल प्रक्रिया में कड़े बदलाव किए गए. अब नवीनीकरण के लिए आवेदक की व्यक्तिगत मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है. विभाग में आवेदक के रूबरू हस्ताक्षर कराए जाते हैं और दस्तावेजों की गहन जांच होती है. पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है.

सेल्फ डिक्लेरेशन लेकर रिन्यू किए गए थे संदिग्ध परमिट
वहीं, साल 2023 के सामने आए दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ है कि फर्जी हस्ताक्षरों वाले मामलों में केवल एक सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवा लिया गया था. कुछ आवेदकों ने डिक्लेरेशन में कबूल किया था कि फॉर्म पर उनके एजेंट ने हस्ताक्षर किए थे. वहीं, कुछ ने माना कि उनके कार्यालय के कर्मियों ने हस्ताक्षर किए. नशाबंदी विभाग ने ऐसे स्पष्टीकरण लेकर परमिट को आसानी से रिन्यू कर दिया, जिससे मिलीभगत के साफ संकेत मिलते हैं.
बता दें कि सरकारी नियमों के मुताबिक, शराब परमिट रिन्यूअल के लिए ₹2,000 प्रोसेस फीस, ₹2,000 मेडिकल फीस और ₹2,000 लाइसेंस फीस लगती है. साथ ही रोगी कल्याण बोर्ड में रिन्यूअल के लिए ₹15,000 जमा करने होते हैं. इस तरह रिन्यूअल का कुल आधिकारिक खर्च लगभग ₹21,000 बैठता है. नए परमिट का खर्च करीब ₹31,000 होता है, लेकिन रिन्यूअल के ₹21,000 के अलावा ₹25,000 अतिरिक्त एजेंट को देकर मेडिकल जांच से बचने के मामले ने सबको चौंका दिया है.