scorecardresearch
 

जस्ट‍िस अंसारी बोले- नेताओं को सदन में चप्पल चलाने, माइक्रोफोन फेंकने से मतलब है

मुख्य न्यायाधीश अपने सम्मान में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे. न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी ने इशारों-इशारों में राजनेताओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'जिनको हमने भेजा है कानून बनाने के लिए, वो कानून बनाते हैं या नहीं बनाते हैं, ये फैसला तो आपको करना है.'

Advertisement
X
जस्टि‍स इकबाल अहमद अंसारी
जस्टि‍स इकबाल अहमद अंसारी

पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टि‍स इकबाल अहमद अंसारी ने गुरुवार को लोकतंत्र की खूबसूरती बताते हुए, देश के राजनीतिक हालात पर गंभीर टिप्पणी की. यही नहीं, उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए नेताओं को चुनकर सदन भेजा जाता है, वह पूरा नहीं हो रहा, क्योंकि उन्हें तो सिर्फ माइक्रोफोन फेंकने से मतलब है. उन्होंने कहा कि कानून बनाने वाले फेल हो रहे हैं.

मुख्य न्यायाधीश अपने सम्मान में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे. न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी ने इशारों-इशारों में राजनेताओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'जिनको हमने भेजा है कानून बनाने के लिए, वो कानून बनाते हैं या नहीं बनाते हैं, ये फैसला तो आपको करना है.'

जहां एकतरफा बातचीत हो, वो लोकतंत्र नहीं
लोकतंत्र की खूबसूरती और खुशबू का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरी नजर में लोकतंत्र की खुशबू है कि मैं ये आपको हक देता हूं कि मैं जो कह कहा रहा हूं, उसे आप नहीं भी मान सकते हैं. कोई जोर जबरदस्ती नहीं है कि जो मैं कह रहा हूं, उसे आपको मानना ही पड़ेगा. लेकिन पक्की दलील के साथ. ये बातें एकतरफा नहीं होनी चाहिए. जहां पर इस तरह के लेन-देन हो रहे हैं लोकतंत्र वहीं है.'

Advertisement

'...इ‍सलिए सदन में चप्पल चलते हैं'
अंसारी ने अफसोस जताते हुए कहा कि संसद और विधानसभाओं में इस प्रकार के लेन-देन नहीं हो रहे हैं. यही कारण है कि वहां चप्पल चलते हैं, माइक्रोफोन फेंक दिए जाते हैं. उन्होंने अपने डायस के माइक्रोफोन की ओर इशारा करते हुए कहा, 'यहां माइक्रोफोन ऐसे ही खुला है, लेकिन आप जाकर संसद और विधानसभा में देख लें. वहां सब फिक्स किया हुआ है. कुर्सियां भी फिक्स हैं. इसलिए कि ना जाने कब कौन उठाकर मार देगा.'

'कानून बनाने वाले फेल हो रहे हैं'
उन्होंने आगे कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि जिनको उन जगहों पर दलील देने के लिए भेजा गया है, उनको दलील देने से मतलब नहीं है. ने कहा, 'उन्हें तो माइक्रोफोन फेंकने से मतलब है. जिनको जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जहां भेजा गया है, वहां उस उद्देश्य की पूर्ति ही नहीं हो रही है. इसका मतलब ये है कि हमारे कानून बनाने वाले फेल हो रहे हैं. अगर वो फेल हो रहे हैं तो हम भी फेल हो रहे हैं.'

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement