देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं. दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश में बीते कुछ दिनों में चार मरीजों की मौत हो चुकी है. वायरस का दायरा लगातार बढ़ रहा है. केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी संक्रमण के मामले आ रहे हैं. बिहार में भी कोविड ने दस्तक दे दी है. बिहार के भागलपुर में एक पिता और बेटी कोविड संक्रमित मिले हैं. इनको आईसीयू में भर्ती कराया गया है. कोरोना के बढ़ते मामलों और मौतों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता जरूर बढ़ा दी है. आम लोगों के मन में भी कई सवाल उठ रहे है. क्या कोरोना फिर पूरे देश में फैल सकता है? क्या वायरस पहले जितना खतरनाक हो गया है? क्या अब बूस्टर डोज लेने की जरूरत है?
इन सभी सवालों पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट व महामारी विज्ञानी (Epidemiologist) डॉ. चंद्रकांत लहारिया ने आजतक.इन को विस्तार से जानकारी दी है.
डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि लोगों को लगता है कि कोरोना वायरस तो खत्म हो गया था, लेकिन ऐसा नहीं है. यह वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यह भारत ही नहीं ,बल्कि दुनिया के कई देशों में अभी भी मौजूद है.वायरस लगातार खुद को बदल रहा है और इसी क्रम में नए- नए सब वेरिएंट सामने आते रहते हैं. इनमें XFG (Stratus), NB.1.8.1 और Cicada (BA.3.2) जैसे वेरिएंट शामिल हैं.
डॉ किशोर कहते हैं कि वायरस लगातार अपने जीन में बदलाव करता रहता है ताकि लोगों के शरीर की बनी हुई इम्यूनिटी से बच सके. वायरस में हुए बदलाव और उससे बने नए-नए वेरिएंट लोगों को संक्रमित करते हैं. हालांकि अच्छी बात यह है कि मौजूदा वेरिएंट अधिकतर लोगों में गंभीर बीमारी नहीं कर रहे हैं. अधिकांश संक्रमितों में हल्के और फ्लू जैसे लक्षण ही देखने को मिल रहे हैं. सांस लेने में परेशानी या ऑक्सीजन की कमी से संबंधित समस्याएं नहीं देखी जा रही हैं.
कोविड के बढ़ते मामलों पर डॉ. चंद्रकांत कहते हैं कि मानसून के दौरान कई तरह के वायरस एक्टिव हो जाते हैं. इस दौरान रेस्पिरेटरी इलनेस (सांस संबंधी बीमारियों) के मामले बढ़ते हैं. इसी क्रम में कोविड के मामले भी बढ़ रहे हैं. इससे फ्लू जैसे लक्षण हो रहे हैं, लेकिन बढ़ते मामलों से पैनिक होने की जरूरत नहीं है.
भारत में किन वेरिएंट्स का असर ज्यादा?
डॉ. किशोर के मुताबिक, इस समय भारत में कोविड के अधिकांश मामलों का कारण कोविड का XFG और NB.1.8.1 वेरिएंट है. यह वेरिएंट हैं तो पुराने लेकिन तेजी से फैल सकते हैं. आमतौर पर इनके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं. इनसे संक्रमित होने पर लोगों में बुखार, सूखी या सामान्य खांसी, गले में खराश, शरीर और मांसपेशियों में दर्द और सिर में दर्द जैसे लक्षण देखे जाते हैं. यह लक्षण सामान्य वायरल फ्लू या मौसमी एलर्जी जैसे लग सकते हैं, लेकिन अगर किसी व्यक्ति को लगातार बुखार और सांस संबंधी परेशानी है तो इस मामले में तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत होती है.
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कोरोना से क्यों हो रही हैं मौतें?
डॉ जुगल किशोर बताते हैं कि दक्षिण भारत में सामने आई मौतों को लेकर भी लोगों में चिंता है. हालांकि अधिकतर मामलों में मौत का मुख्य कारण केवल वायरस नहीं है. वह बताते हैं कि जिन मरीजों की मौत होती है, उनमें अकसर वह होते हैं जो पहले से ही किसी गंभीर बीमारियां का शिकार होते हैं. इन मरीजों में हार्ट डिजीज, किडनी की बीमारी, कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं. चूंकि अस्पतालों में प्रोटोकॉल के तहत उनकी कोविड जांच की जाती है और अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो मौत कोविड से जुड़ी श्रेणी में दर्ज हो जाती है, जबकि मृत्यु का प्रमुख कारण कोई दूसरी गंभीर बीमारी भी हो सकती है.
क्या फिर पूरे देश में फैल सकता है कोरोना?
यह सबसे बड़ा सवाल है. इसके बारे में डॉ. किशोर कहते हैं कि फिलहाल ऐसी आशंका बहुत कम है कि कोरोना पहले की तरह पूरे देश में फैलेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों में अभी भी वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बनी हुई है. अधिकतर संक्रमितों में हल्के लक्षण मिल रहे हैं. केवल उन्हीं को अधिक खतरा है, जिनको पहले से कोई गंभीर बीमारी है. हालांकि वायरस लगातार बदल रहा है. ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है. डॉ. चंद्रकांत का भी कहना है कि पूरे देश में कोविड के फैलने की आशंका कम है. अगर मामले बढ़ते भी हैं तो लोगों में फ्लू जैसे लक्षण ही होंगे.
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क्या बूस्टर डोज की जरूरत है?
इस बारे में डॉ. चंद्रकांत लहारिया बताते हैं कि फिलहाल भारत में बूस्टर डोज की जरूरत नहीं है. फिर भी कोविड से बचाव जरूरी है. इसके लिए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर अनावश्यक जाने से बचें. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें. सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें. लोगों को भी यह सलाह है कि वह संक्रमित इलाकों में जाने से फिलहाल बचें.
डॉ लहारिया कहते हैं कि फिलहाल कोविड से 2020 या 2021 जैसी स्थिति बिलकुल नहीं है. अधिकांश लोगों में वायरस हल्का संक्रमण पैदा कर रहा है और गंभीर मामलों की संख्या सीमित है. ऐसे में पैनिक होने की जरूरत नहीं है.