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फैक्ट चेक: लखनऊ का पुराना वीडियो उज्जैन शाही मस्जिद विवाद का बताकर वायरल

सोशल मीडिया पर उज्जैन शाही मस्जिद विवाद के नाम से शेयर किया जा रहा वीडियो असल में उत्तर प्रदेश के लखनऊ का पुराना वीडियो है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये उज्जैन का वीडियो है जहां शाही मस्जिद गिराने को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़प हो गई.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये उज्जैन का नहीं बल्कि लखनऊ का वीडियो है जो कम से कम जुलाई से इंटरनेट पर मौजूद है.

भीड़ को धक्का देते पुलिसवालों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर उज्जैन शाही मस्जिद विवाद के संदर्भ में खूब शेयर हो रहा है. इसमें कुछ पुलिसवाले सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक एक रस्सी पकड़कर चल रहे हैं और भीड़ में मौजूद लोगों को पीछे धकेल रहे हैं.

भीड़ में सफेद टोपी पहने हुए कई लोग भी दिख रहे हैं. एक पुलिसवाला डंडे से लोगों को धक्का दे रहा है. वहीं, कुछ लोगों की पुलिसवालों के साथ झड़प भी हो रही है. वीडियो पर लिखा है- 'उज्जैन शाही मस्जिद'.



दरअसल, इंदौर प्रशासन ने सड़क चौड़ी करने के लिए मस्जिद के एक हिस्से को हटाए जाने का आदेश दिया था. 28 सितंबर को इस मामले को लेकर तनाव अचानक बढ़ गया था. इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव कर दिया था जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. शाही मस्जिद कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन हाईकोर्ट ने ये अपील खारिज कर दी थी.

एक इंस्टाग्राम यूजर ने वायरल वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, "उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर बड़ा बवाल! सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौके पर जुट गए. पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी और पुलिस की भारी तैनाती की गई. मामले के बीच लोगों ने मस्जिद की सुरक्षा को लेकर विरोध जताया. प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने की कार्रवाई तय प्रक्रिया के तहत की जा रही है. उज्जैन में शाही मस्जिद को लेकर आखिर क्या है पूरा विवाद?"

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आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि तीन महीने पुराना ये वीडियो उज्जैन का नहीं बल्कि यूपी की राजधानी लखनऊ का है.

कैसे पता चली सच्चाई?

वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने से हमें पता लगा कि इसे कई सोशल मीडिया यूजर्स ने जुलाई 2026 में  शेयर किया था. उस वक्त लोगों ने इसे जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीरण आदेश के खिलाफ हुए प्रदर्शन का वीडियो बताया था. जाहिर है, ये वीडियो इंदौर की शाही मस्जिद के ध्वस्तीकरण से संबंधित नहीं हो सकता है क्योंकि यहां इस मामले को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़प की घटनाएं सितंबर 2026 में हुई हैं.

क्या है जौहर यूनिवर्सिटी का मामला?

दरअसल, रामपुर के जिला प्रशासन ने जुलाई 2026 में सपा नेता आजम खान के मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को अवैध बताते हुए उन्हें गिराने का आदेश जारी किया था. आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुरादाबाद मंडलायुक्त की कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसके बाद इस पर स्टे लगा दिया गया था.

दुकानों के बोर्ड से मिला वायरल वीडियो का सुराग

वीडियो में कुछ दुकानों के बोर्ड दिख रहे हैं, जैसे 'न्यू करीब ज्वैलर्स', 'प्राइम प्रॉपर्टी ग्रुप', और 'मुबीन होटल'. कीवर्ड सर्च करने से पता लगा कि ये दुकानें लखनऊ के चौक इलाके में हैं. गूगल मैप्स पर इस जगह को नीचे देखा जा सकता है.

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वीडियो में एक पुलिसवाले की वर्दी पर मौजूद इनसिग्निया ( विशेष चिह्न ) यूपी पुलिस के इनसिग्निया से मेल खाते हैं.

हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि ये वीडियो किस घटना से संबंधित है, लेकिन इतनी बात तय है कि ये इंदौर की शाही मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा नहीं है.

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