ब्रिटिश सरकार ने देश की यूनिवर्सिटीज़ से चीन के एक रिसर्च संस्थान के साथ सहयोग और समझौते खत्म करने को कहा है. ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी एमआई5 (MI5) का आरोप है कि चाइना जनरल टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट का चीन की खुफिया एजेंसियों से गहरा संबंध है और इसका इस्तेमाल संवेदनशील रिसर्च हासिल करने के लिए किया जा सकता है.
सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने बुधवार को कहा कि ब्रिटिश एकेडमिक्स को इस संस्थान के साथ किए गए सभी समझौते खत्म करने चाहिए. उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रमुखों को पत्र लिखकर कहा है कि वे अपने स्टाफ को इस दिशा में सहयोग दें. ब्रिटिश सरकार के अनुसार, इस संस्थान के साथ सहयोग करना कुछ मामलों में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत अपराध भी हो सकता है.
MI5 ने बताया कि ब्रिटेन से जुड़े 100 से ज्यादा एकेडमिक्स ऐसे रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं, जिन्हें इस संस्थान के जरिए चीनी खुफिया एजेंसी ने कथित तौर पर गुप्त रूप से फंड किया था. इन प्रोजेक्ट्स में साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम और स्टेग्नोग्राफी जैसी तकनीकों पर रिसर्च शामिल थी. MI5 के मुताबिक, संस्थान के चीन के स्टेट सिक्योरिटी मंत्रालय के साथ करीबी संबंध हैं.
ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी MI5 क्या है कहना?
एजेंसी का कहना है कि इस तरह की रिसर्च का इस्तेमाल चीन की जासूसी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, चीन ने ब्रिटेन के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. UK में चीन के दूतावास के प्रवक्ता ने आरोपों को "काल्पनिक और पूरी तरह से मनगढ़ंत" बताया. उन्होंने कहा कि चीन और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज़ के बीच रिसर्च सहयोग स्वैच्छिक और कानूनों के अनुसार होता है.
चीन ने ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों से क्या अपील की?
चीन ने ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों से ऐसे आरोप लगाना बंद करने की अपील भी की. ब्रिटेन और चीन के बीच व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हाल के वर्षों में ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों ने चीन से जुड़े जासूसी खतरों को लेकर चेतावनियां बढ़ाई हैं. ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील तकनीकी रिसर्च और विशेषज्ञता विदेशी खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हो सकती है.
यह भी पढ़ें: हान्गकान्ग विवाद पर UNSC की बैठक में आमने-सामने आए चीन और ब्रिटेन
24 प्रमुख ब्रिटिश रिसर्च यूनिवर्सिटीज़ के समूह रसेल ग्रुप ने कहा कि यूनिवर्सिटीज़ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेती हैं. समूह ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग रिसर्च के लिए जरूरी है, लेकिन विश्वस्तरीय वैज्ञानिक क्षमताओं की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है.