इस शुक्रवार सिनेमाघरों में प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम देखने को मिलेगी. इसमें 26/11 मुंबई हमले में पकड़े गए खूंखार आंतकी अजमल कसाब के फांसी के फंदे तक चढ़ने की जर्नी को दिखाया गया है. जाने माने वकील उज्जवल निकम ने कसाब का केस लड़ा था. उसे फांसी के फंदे तक पहुंचाने का क्रेडिट उज्जवल निकम को जाता है. मूवी में राजकुमार राव ने उज्जवल निकम का रोल प्ले किया है.
कसाब के खुलेंगे सभी राज
ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे को दिए इंटरव्यू उज्जवल ने कसाब के ट्रायल की इनसाइड स्टोरी रिवील की. उन्होंने बताया कि कसाब को सिगरेट और मटन बिरयानी की तलब होती थी. वो अपने हाथ पर कलावा पहनता था. उन्होंने कहा कि कसाब को लेकर ये सभी बातें सही हैं. राजकुमार राव के मुताबिक, लोगों को फिल्म में कसाब को लेकर और भी डिटेल मिलेगी. वो जानकारी किसी भी पोर्टल पर मौजूद नहीं है. जब एक्टर को कसाब से जुड़ी इन बातों का पता चला था वो भी शॉक्ड थे. लोगों के लिए ये फिल्म देखना बहुत जरूरी है.
नाबालिग था कसाब?
कसाब ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान खुद को माइनर बताने की कोशिश की थी. उसने खुद को 17 साल का बताया था. उसकी इस कोशिश पर उज्जवल निकम ने पानी फेरा था. उन्होंने कसाब की उम्र जानने के लिए बोन मैरो टेस्ट कराने का प्रस्ताव दिया था. ये आइडिया कैसे आया, इस पर बोलते हुए निकम ने कहा कि मैं साइंस स्टूडेंट रहे हूं. मैं इस बारे में जानता था. जैसे ही उसने खुद को माइनर बताया, मैं शॉक्ड था. मैंने सबके सामने बोन मैरो टेस्ट कराने की बात रखी. टेस्ट के बाद पता चला कि वो माइनर नहीं था. कसाब की वो थ्योरी फेल हुई.
उज्जवल ने बताया कि कसाब का केस लड़ने की वजह से उन्हें धमकियां आती थीं. इन चीजों से डील करने के लिए वो अपनी काउंटर स्ट्रैटिजी तैयार रखते थे. उज्जवल के मुताबिक, उनकी मां चाहती थीं वो डॉक्टर बने, पिता चाहते थे वकील बने. खुद निकम जज बनना चाहते थे. लेकिन पिता के मना करने के बाद वो वकील बनने को राजी हुए. निकम की तरह उनका बेटा भी वकील है.