सलमान खान की मचअवेटेड वॉर ड्रामा फिल्म 'मातृभूमि' को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. रक्षा और सूचना-प्रसारण (I&B) मंत्रालय ने फिल्म के नए वर्जन को हरी झंडी दिखाते हुए सिनेमाघरों में रिलीज के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है.
2020 के भारत-चीन गलवान टकराव पर बनी इस फिल्म को लेकर दोनों देशों के सुधरते रिश्तों के बीच रक्षा मंत्रालय को कुछ आपत्तियां थीं, जिसकी वजह से इसमें देरी हो रही थी. अब एनओसी मिलने के बाद मेकर्स इसे इसी साल दिवाली के मौके पर 13 नवंबर को रिलीज करने की तैयारी में जुट गए हैं.
आपत्तियों के बाद मिली एनओसी
बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन के बीच हालिया कूटनीतिक सुधारों को देखते हुए रक्षा मंत्रालय को फिल्म में चीन के संदर्भ और उसके कंटेंट पर कुछ एतराज थे. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक मेकर्स द्वारा जमा किए गए संशोधित वर्जन से I&B मंत्रालय के अधिकारी पूरी तरह संतुष्ट हैं और उन्होंने पिछले हफ्ते ही फिल्म को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) सौंप दिया है.
13 नवंबर पर सलमान की नजर
एनओसी मिलने के साथ ही सलमान खान ने फिल्म की रिलीज डेट को लेकर अपनी योजना पर काम शुरू कर दिया है. सूत्र बताते हैं कि सलमान 13 नवंबर की तारीख पर विचार कर रहे हैं. उनका मानना है कि दिवाली के तुरंत बाद का त्यौहारी माहौल और लोगों का जश्न का मूड इस देशभक्ति वॉर ड्रामा के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा. सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो अगले 10 दिनों के अंदर रिलीज की आधिकारिक घोषणा हो सकती है.
फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ होने के लिए अब केवल सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की मुहर लगना बाकी है. मेकर्स जल्द ही इसे सेंसर बोर्ड के पास जमा करेंगे. अगर इसी महीने सीबीएफसी से क्लियरेंस मिल जाता है, तो 13 नवंबर को यह फिल्म थिएटर्स में दस्तक दे देगी. सरकारी निर्देशों के बाद फिल्म के ओरिजिनल ड्राफ्ट में काफी बदलाव किए गए हैं और अब इसमें भारत-चीन के संबंधों को लेकर सकारात्मक पहलुओं को भी जोड़ा गया है.
अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी है फिल्म
अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी 'मातृभूमि' में सलमान खान के साथ एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में नजर आएंगी. लंबे समय से अटकी इस फिल्म को लेकर अब फैंस के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है. एनओसी मिलने के बाद अब सबकी निगाहें सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया और मेकर्स की तरफ से आने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं.