बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' आज भी लोगों के दिलों में एक खास जगह रखती है. फिल्म के मजेदार डायलॉग्स और इमोशनल कर देने वाले सीन्स लोगों को जुबानी याद हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस ब्लॉकबस्टर फिल्म की शूटिंग के दौरान बैकस्टेज पर क्या चल रहा था. फिल्म में 'आनंद भाई' (कोमा में रहने वाले मरीज) के किरदार को बखूबी निभाने वाले एक्टर यतिन कार्येकर ने संजय दत्त को लेकर बड़ा खुलासा किया.
हाल ही में सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में यतिन ने बताया कि जब फिल्म की शूटिंग चल रही थी, तब एक्टर संजय दत्त AK-56 राइफल रखने से जुड़े कानूनी मुसीबतों और कोर्ट के चक्करों से जूझ रहे थे, जिसके कारण शूटिंग के दौरान कई बार अचानक ऐसी परिस्थितियां बन जाती थीं जो किसी को भी मानसिक रूप से तोड़ सकती थीं.
संजय दत्त को मिली थी छूट
इंटरव्यू के दौरान यतिन कार्येकर ने बताया कि जब 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की शूटिंग हो रही थी, तब संजय दत्त के खिलाफ चल रहे अदालती मामले के कारण उन्हें लगातार कोर्ट से समन आ रहे थे. संजय दत्त उस समय बेहद मुश्किल दौर और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे. यतिन ने बताया कि शूटिंग के वक्त सेट पर एक सख्त नियम था कि बाकी सभी कलाकारों और क्रू मेंबर्स के फोन या तो साइलेंट पर रहेंगे या फिर मेकअप रूम में रखे जाएंगे. सेट पर सिर्फ और सिर्फ संजय दत्त का फोन रिंगटोन पर रखने की इजाजत थी, जो उनके मेकअप मैन के पास रहता था, क्योंकि कोर्ट से उन्हें कभी भी और किसी भी वक्त बुलावा आ सकता था.
यतिन कार्येकर ने संजय दत्त की तारीफ करते हुए उन्हें एक बेहतरीन एक्टर हैं. उन्होंने कहा कि जब हम कैमरे के सामने परफॉर्म करते हैं, तो पूरी तरह उस कैरेक्टर में डूब जाते हैं और अपनी पर्सनल लाइफ की सारी बातें भूल जाते हैं. संजय दत्त भी पूरी तरह 'मुन्ना भाई' के किरदार में खोए रहते थे, लेकिन जैसे ही उनके मेकअप मैन के पास रखे फोन की घंटी बजती थी, मानो उनके सामने एक अचानक दीवार खड़ी हो जाती थी. फोन बजते ही वह तुरंत अपने किरदार से बाहर आते थे, डायरेक्टर राजकुमार हिरानी से 'बाय' बोलते थे और सीधे कोर्ट के लिए रवाना हो जाते थे.
शूटिंग के दौरान कोर्ट से आया बुलावा
यतिन ने उस खास सीन का जिक्र किया जो अस्पताल के बेड पर फिल्माया जा रहा था, जहां आनंद भाई लेटे हुए हैं और मुन्ना भाई उनसे बात करते हैं. उन्होंने बताया कि इस इमोशनल सीन की शूटिंग के दौरान दो बार ऐसा हुआ जब अचानक फोन की घंटी बजी. एक दिन फोन आया तो संजय दत्त को शूटिंग बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा, दूसरे दिन उन्होंने आकर फिर से काम किया और तीसरे दिन जब टीम बाकी के कटिंग और पैचवर्क वाले शॉट्स ले रही थी, तब फिर से वही स्थिति बन गई. यतिन ने बताया कि सेट पर मौजूद हर इंसान चाहे वह डायरेक्टर राजकुमार हिरानी हों, प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा हों, या को-स्टार बोमन ईरानी और अरशद वारसी सभी बेहद समझदार थे. किसी ने कभी इस बात पर कोई नाराजगी या आपत्ति नहीं जताई कि शूटिंग बार-बार क्यों रुक रही है, क्योंकि सब जानते थे कि यह एक तय नियम था कि कोर्ट का फोन आते ही संजू बाबा को जाना होगा.
जब यतिन से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी संजय दत्त को इस वजह से उदास या परेशान देखा? तो उन्होंने साफ इनकार किया. यतिन ने कहा कि संजय दत्त ने कभी सेट पर अपना हौसला कम नहीं होने दिया. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी इस बारे में संजय दत्त से कोई बात की, तो यतिन ने बताया कि उन्होंने कभी इस विषय पर चर्चा नहीं की.
इसकी वजह बताते हुए यतिन ने कहा कि एक तो उनके बीच उतनी गहरी बॉन्डिंग नहीं थी और दूसरी बात यह कि यह उनका बेहद निजी मामला था. यतिन ने अपने खुद के तलाक के दिनों का अनुभव शेयर करते हुए कहा कि वह खुद कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट चुके हैं और जानते हैं कि यह मानसिक रूप से कितना थका देने वाला होता है. इसके अलावा, मामला कोर्ट में सबज्यूडिस था, इसलिए उस पर कोई भी सवाल पूछना कानूनी और नैतिक रूप से बिल्कुल गलत था.