चांदी (Silver) की कीमतें लगातार घटती जा रही हैं, बुधवार को कीमत फिसलकर 2.15 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे पहुंच गई. दरअसल, बुधवार की सुबह भाव में तेजी देखने को मिला था. लेकिन शाम होते-होते बिकवाली का दबाव हावी हो गया. शाम 7 बजे चांदी की कीमत MCX पर फिसलकर 2,14,475 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई. जबकि ट्रेडिंग के दौरान भाव बढ़कर 2.19 लाख रुपये तक पहुंच गया था. यानी ऊपरी स्तरों से बुधवार को चांदी करीब 4500 रुपये सस्ती हो चुकी है.
किन वजह से चांदी की कीमतें गिर रही हैं, तो इसका पहला कारण ये है कि वैश्विक बाजारों से भाव को सपोर्ट नहीं मिल रहा है. MCX पर सितंबर 2026 एक्सपायरी वाले चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में बिकवाली के भारी दबाव के चलते भाव 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के नीचे आ गए हैं.
गिरावट के मुख्य कारण
बता दें, अंतरराष्ट्रीय बाजारों (COMEX) में कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है. अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों के दृष्टिकोण को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रुख कीमती धातुओं से हटकर डॉलर और बॉन्ड यील्ड की ओर हुआ है. महंगाई बढ़ने का खतरा भी चांदी पर दबाव डाल रहा है.
बता दें, इसी साल जनवरी में चांदी की बढ़कर 4.21 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. जिसके बाद से लगातार कमोडिटी ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) द्वारा जमकर मुनाफावसूली की जा रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एकतरफा रैली के बाद चांदी में मौजूदा गिरावट से घबराने की कोई बात नहीं है.
औद्योगिक डिमांड में भी गिरावट
इसके अलावा चांदी एक प्रमुख औद्योगिक धातु भी है. सोलर पैनल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों से मांग में अस्थायी सुस्ती के संकेतों ने भी चांदी के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है. बाजार विशेषज्ञों और कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि 2.15 लाख रुपये का स्तर टूटने के बाद चांदी में कुछ और दिन तक कमजोरी का दौर जारी रह सकता है.
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखते हुए रिटेल निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी से बचना चाहिए. क्योंकि वैश्विक माहौल पर चांदी की कीमतें निर्भर करती हैं. हालांकि जो निवेशक लंबी अवधि के लिए चांदी में निवेश करना चाहते हैं, वो थोड़ा-थोड़ा करके पैसे लगा सकते हैं.
बता दें, चांदी की कीमत जनवरी के आखिरी हफ्ते में बढ़कर 4.21 लाख रुपये प्रति किलो हो गई थी. जहां से चांदी महज 6 महीने में 2.06 लाख रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. हालांकि पिछले दो वर्षों में चांदी की कीमत बेतहाशा बढ़ी थी. ऐसे में जानकार यहां से फिलहाल बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, लेकिन बड़ी गिरावट की भी संभावना कम है.