
Independence Day: 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है. देशभर में आज जश्न-ए-आजादी जोरों-शोरों पर मनाया जा रहा है. यह दिन उन अनगिनत वीरों के त्याग की याद दिलाता है, जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी. भारतीय सिनेमा ने भी समय-समय पर देश प्रेम को पर्दे पर जीवंत किया है. कई फिल्मों में आजादी के इसी जज्बे और संघर्ष को खूबसूरती से दिखाया गया है, जो हमें याद दिलाता है कि आजादी की कीमत क्या थी. देशभक्ति से भरपूर इन फिल्मों को आप भी अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं.
'लगान' (2001)
आमिर खान की 'लगान' फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे साधारण ग्रामीण एकजुट होकर अंग्रेजों की शर्तों को चुनौती देते हैं. क्रिकेट के खेल के बहाने यह फिल्म एकता, संघर्ष और जीत के अटूट विश्वास का संदेश देती है. देशप्रेम के जज्बे से भरपूर यह फिल्म हिंदी सिनेमा की आइकॉनिक फिल्मों में से एक है. आमिर की ये फिल्म आज भी लोगों की फेवरेट है.

'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' (2002)
जब क्रांति की मशाल युवाओं के हाथों में आई, तो भगत सिंह जैसे विचारकों ने देश को एक नई दिशा दी. 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह' सिर्फ एक बायोपिक नहीं है. यह फिल्म भगत सिंह के विचारों, उनकी निडरता और देश के लिए हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ जाने के उनके जज्बे को दिखाती है.

'मंगल पांडे' (2005)
1857 के संग्राम से ही भारत में गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शुरुआत हुई थी. साल 2005 में आई फिल्म 'मंगल पांडे - द राइजिंग' अंग्रेजों के खिलाफ इसी पहली बड़ी बगावत की कहानी को बयां करती है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे मंगल पांडे के किरदार में आमिर खान का निडर अंदाज और उनके जोशीले नारे पूरी ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाकर रख देते हैं. देशभक्ति के जुनून से भरी यह फिल्म हर भारतीय के दिल में अपने देश के लिए गर्व और क्रांति का जज्बा पैदा करती है.

मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी (2019)
रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की यह कहानी दिखाती है कि देश सेवा में महिलाओं का योगदान कितना निडर और महान था. फिल्म का हर दृश्य देशभक्ति के जुनून से भरा है. कंगना रनौत के अभिनय से सजी फिल्म का एक-एक दृश्य देशभक्ति का जुनून भर देता है. रोंगटे खड़े कर देने वाली यह फिल्म, हर भारतीय को अपने देश पर गर्व करने पर मजबूर कर देती है.

'बॉर्डर'
1971 के युद्ध की ऐतिहासिक लड़ाई पर बेस्ड 'बॉर्डर' सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में देशभक्ति की एक अमर दास्तां है. इस फिल्म में सैनिकों के त्याग, शौर्य और उनके परिवारों के दर्द को बड़ी शिद्दत से पर्दे पर दिखाया गया है. फिल्म का गाना 'संदेसे आते हैं' आज भी हर भारतीय की आंखें नम कर देता है.
वहीं, लगभग तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद 'बॉर्डर 2' में उसी साहस, जांबाजी और कुर्बानियों के जज्बे को एक नई पीढ़ी के सामने पेश किया गया है. यह दोनों ही फिल्में हमें यह याद दिलाती हैं कि हमारी मातृभूमि की हिफाजत के लिए हमारे वीर जवानों ने किस तरह अपनी खुशियों को न्योछावर किया है.

एलओसी-कारगिल
यह फिल्म देश की रक्षा में तैनात जवानों के कठिन संघर्ष और उनके अदम्य साहस की सच्ची तस्वीर पेश करती है. ये फिल्म वाकई में रोंगटे खड़े कर देने वाली है.
ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि हमारे अमर शहीदों के बलिदान और संघर्ष की जीती-जागती तस्वीरें हैं, जो हर भारतीय के दिल में देशप्रेम की ज्वाला जलाए रखती हैं.