BJP
INC
CPM
AITC
SUCI
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IND
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IND
Nota
NOTA
पश्चिम बंगाल का श्रीरामपुर एक मिली-जुली राजनीतिक तस्वीर पेश करता है, जहां तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनावों में हावी रहती है, लेकिन लोकसभा चुनावों में उसे बीजेपी से कड़ी चुनौती मिलती है.
श्रीरामपुर, जिसे सेरामपुर भी लिखा जाता है, कोलकाता का एक सैटेलाइट शहर है और हुगली जिले में एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है. 1951 में बनी इस सीट में सेरामपुर नगर पालिका के 18 वार्ड (नंबर 3 से 19 और 25), पूरी ऋषड़ा नगर पालिका, साथ ही श्रीरामपुर-उत्तरपारा सामुदायिक विकास ब्लॉक की राज्याधरपुर और ऋषड़ा ग्राम पंचायतें शामिल हैं. यह श्रीरामपुर लोकसभा सीट के सात हिस्सों में से एक है.
श्रीरामपुर में बनने के बाद से 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. सालों तक यह कांग्रेस का गढ़ रहा, जिसे अक्सर भारतीय मार्क्सवादियों से चुनौती मिलती थी, इससे पहले कि तृणमूल कांग्रेस ने इसे अपना गढ़ बना लिया. कांग्रेस ने आठ बार, CPI ने तीन बार और CPI(M) ने एक बार जीत हासिल की, जबकि तृणमूल ने 2009 के उपचुनाव सहित लगातार छह चुनावों में यह सीट जीती है.
तृणमूल की जीत का सिलसिला 2001 में अपने पहले चुनाव से ही शुरू हुआ. रत्ना डे ने 2001 और 2006 में पार्टी के लिए जीत हासिल की, लेकिन लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिससे 2009 के उपचुनाव का रास्ता साफ हुआ. मौजूदा तृणमूल विधायक सुदीप्तो रॉय ने उस चुनाव में CPI के प्रशांत मुखर्जी को 29,678 वोटों से हराकर जीत हासिल की. 2011 में CPI के पार्थ सारथी रेज के खिलाफ उनका जीत का अंतर बढ़कर 51,691 वोट हो गया. 2016 में यह अंतर घटकर 9,907 वोट रह गया, जब उन्होंने कांग्रेस के शुभंकर सरकार को हराया, लेकिन 2021 में यह फिर से बढ़कर 23,433 वोट हो गया, क्योंकि बीजेपी, जिसे 22.96 प्रतिशत वोट मिले, कबीर शंकर बोस को अपना उम्मीदवार बनाकर तृणमूल की मुख्य चुनौती बनकर उभरी.
श्रीरामपुर विधानसभा क्षेत्र से लोकसभा के रुझान एक अलग तस्वीर पेश करते हैं. 2009 में तृणमूल ने CPI(M) को 35,718 वोटों से हराया था. इसके बाद 2014 में BJP ने 2,700 वोटों की मामूली बढ़त के साथ इसे पीछे छोड़ दिया और 2019 में 2,503 वोटों की मामूली बढ़त बनाए रखी. 2024 में तृणमूल ने आखिरकार फिर से बढ़त हासिल कर ली, और BJP से 7,821 वोटों से आगे रही.
श्रीरामपुर में 2024 में 255,006 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो 2021 में 252,758, 2019 में 238,809, 2016 में 230,977 और 2011 में 207,798 थे. यह बढ़ोतरी रुक-रुक कर हुई है, 2011 और 2016 के बीच 23,179 और 2019 और 2021 के बीच 13,949 वोटर जुड़े, लेकिन इसका बांग्लादेश से अवैध प्रवासन के दावों से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि मुस्लिम मतदाता सिर्फ 13.90 प्रतिशत हैं, जो सबसे बड़ा अकेला समूह है. अनुसूचित जाति के लोग 6.07 प्रतिशत हैं. यह मुख्य रूप से शहरी इलाका है, जिसमें 92.35 प्रतिशत वोटर कस्बों में और 7.65 प्रतिशत गांवों में हैं. वोटिंग प्रतिशत 2011 में 73.54 प्रतिशत, 2016 में 74.18 प्रतिशत, 2019 में 74.58 प्रतिशत और 2021 में 74.41 प्रतिशत पर काफी स्थिर रहा है.
श्रीरामपुर का नाम हिंदू देवता भगवान राम के नाम पर पड़ा है और यह इस क्षेत्र की सबसे पुरानी शहरी बस्तियों में से एक है, जो 18वीं सदी के आखिर की है. मुगल काल के दौरान मुस्लिम यहां बसे, जिसके बाद डेनिश व्यापारियों ने 1755 में एक कॉलोनी बसाई, जिसका नाम फ्रेडरिक्सनागोर रखा. डेनिश लोगों ने रेशम, कपास और अन्य सामानों के लिए कारखाने बनाए, जिससे इसके औद्योगिक विकास की नींव पड़ी. 1845 में अंग्रेजों के कब्जे के बाद, श्रीरामपुर एक अहम नदी बंदरगाह और मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया, जहां जूट मिलें, प्रिंटिंग प्रेस और मिशनरी गतिविधियां थीं, जिन्होंने शिक्षा और पब्लिशिंग को बढ़ावा दिया.
यह शहर हुगली नदी के दाहिने किनारे पर निचले गंगा के मैदानों की खासियत वाले समतल जलोढ़ इलाके में बसा है. यह नदी स्थानीय जीवन का केंद्र बनी हुई है, जो इंडस्ट्री और शहरी विकास के साथ-साथ व्यापार, फेरी और मछली पकड़ने में मदद करती है. यहां की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग, पुरानी जूट मिलें और छोटी इंजीनियरिंग यूनिट्स, हलचल भरे बाजारों और नदी किनारे व्यापार के साथ-साथ कोलकाता के उपनगर होने की वजह से मिलने वाली सेवाओं का मिश्रण है. बड़ी संख्या में लोग रोज़ाना शहर में काम करने जाते हैं, जबकि स्थानीय नौकरियां व्यापार, ट्रांसपोर्ट और छोटे पैमाने की यूनिट्स को चलाती हैं.
श्रीरामपुर सड़क, रेल और फेरी से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यह ईस्टर्न रेलवे के हावड़ा-बंडेल सेक्शन पर है, जहां से अक्सर उपनगरीय ट्रेनें इसे लगभग 45 मिनट में 25 किमी की दूरी तय करके हावड़ा से जोड़ती हैं. सड़क मार्ग से, कोलकाता का केंद्र ग्रैंड ट्रंक रोड और विद्यासागर सेतु के रास्ते लगभग 25 किमी दूर है, जबकि हावड़ा नदी के उस पार 16 किमी दूर है. चिनसुराह में जिला मुख्यालय 10 किमी दक्षिण में है, और फेरी हुगली नदी के पार दक्षिणेश्वर जैसी जगहों तक जाती हैं. सॉल्ट लेक लगभग 29 किमी उत्तर पूर्व में है, और न्यू टाउन लगभग 35 किमी दूर है, दोनों जगह बाईपास और एक्सप्रेसवे के जंरिए पहुंचा जा सकता है.
आस-पास के अन्य केंद्रों में 5 किमी पर रिशड़ा, 3 किमी पर उत्तरपारा, हावड़ा जिले में 8 किमी पर बाली, और उत्तर 24 परगना में लगभग 20 किमी उत्तर में बैरकपुर शामिल हैं. दक्षिण 24 परगना में, बारुईपुर लगभग 50 किमी दक्षिण पूर्व में पड़ता है. चंदननगर (7 किमी) और तारकेश्वर (35 किमी) जैसे हुगली शहर पास ही हैं, जो श्रीरामपुर को मेट्रोपॉलिटन नेटवर्क से जोड़ते हैं.
2026 के विधानसभा चुनावों में श्रीरामपुर में कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है. तृणमूल की लगातार छह जीतें सातवीं जीत की कोई पक्की गारंटी नहीं देतीं, क्योंकि बीजेपी ने लोकसभा चुनावों में अपनी ताकत दिखाई है और विधानसभा चुनावों में अंतर को कम किया है. लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन अभी भी नतीजों को प्रभावित करने के लिए काफी मजबूत है, जिससे एक त्रिकोणीय मुकाबले का माहौल बन गया है, जिसमें तृणमूल को सिर्फ थोड़ी सी बढ़त हासिल है और नतीजा किसी भी तरफ जा सकता है.
(अजय झा)
Kabir Shankar Bose
BJP
Alok Ranjan Banerjee
INC
Nota
NOTA
Biswanath Bhattacherjee
IND
Santosh Kumar Singh
IND
Mangal Sarkar
BAHUMP
Samir Sarkar
SUCI
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
आज दस्तक में बात ईरान और अमेरिका के बीच अटकी और लटकी युद्धविराम वाली डील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव एक बार फिर ठुकरा दिया हैं, पेच ट्रंप की परमाणु प्रतिज्ञा पर फंसा है. ईरान होर्मुज खोजने को तैयार है लेकिन अपने परमाणु प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ समझौते को तैयार नहीं. अगर ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर अड़ा है तो ट्रंप अपनी परमाणु प्रतिज्ञा पर. ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, ईरान ने परमाणु प्रोग्राम की जिद नहीं छोड़ी तो अमेरिका एक बार फिर हमला कर सकता हैं. अब सवाल यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कैसे होंगे, क्या अमेरिका और ईरान की डील फंस गई, आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव का दूसरा चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम है, जहां कई सीटों पर उनकी संख्या पुरुषों से ज्यादा है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के बीच सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं, जिससे यह चरण और भी दिलचस्प बन गया है.
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एजेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने रामपुर और संभल में अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इन एजेंट्स से कुछ भी हासिल नहीं होगा.
ग्यारह घंटे बाद पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान का रण शुरु हो जाएगा. 142 सीटों पर वोटिंग होगी. इसी से जुड़ी कई खबरों पर हम खबरदार करेंगे. बताएंगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का गोल बंगाल में होगा और क्या सियासी भूगोल बदलेगा? इसी चुनाव में वोटिंग से पहले चर्चा यूपी के सिंघम और बंगाल के पुष्पा की हो रही है. जहां एक अधिकारी हैं जो कहते हैं कायदे में रहो. और दूसरे प्रत्याशी हैं जो कहते हैं झुकुगंगा नहीं. तीसरी खबर एम यानी महिला वोटर के शक्ति परीक्षण की है. जो आज यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों तरफ से किया गया है.
बंगाल चुनाव के बीच यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी दे रहे हैं. अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर की जरूरत क्या होती है, वो क्या करते हैं, क्या वो किसी जगह जाकर वोटर के बीच में चेतावनी दे सकते हैं? आजतक से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस सभी सवालों का जवाब दिया. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में कल दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. मतदान की बात करें तो पहले चरण में 93.19% वोटिंग हुई थी. ऐसे में राजनीतिक दलों में इसे लेकर भी भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.