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हरिपाल पश्चिम बंगाल का एक मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र है, जहां तृणमूल कांग्रेस ने CPI(M) को पीछे छोड़कर प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी जगह बनाई है, और अब BJP मुख्य चुनौती बनकर उभरी है.
हुगली जिले की सामान्य श्रेणी की सीट हरिपाल का गठन 1967 में हुआ था. इसमें हरिपाल सामुदायिक विकास खंड और सिंगूर ब्लॉक की चार ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जिससे यह बड़े पैमाने पर ग्रामीण क्षेत्र है, जिसमें केवल छोटे शहरी इलाके हैं.
इस निर्वाचन क्षेत्र में 14 बार चुनाव हो चुके हैं. CPI(M) के दबदबे से पहले, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया ने यह सीट दो-दो बार जीती थी. इसके बाद CPI(M) ने 1977 और 2006 के बीच लगातार सात जीत के साथ हरिपाल पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. तब से तृणमूल कांग्रेस ने कमान संभाली है, और 2011 से लगातार तीन बार जीत हासिल की है.
तृणमूल कांग्रेस के बेचाराम मन्ना ने 2011 में CPI(M) की भारती मुखर्जी को 22,073 वोटों से हराकर हरिपाल सीट जीती थी. उन्होंने 2016 में अपनी स्थिति और मजबूत की, जब उन्होंने CPI(M) के जोगियानंद मिश्रा को 31,475 वोटों से हराया. 2021 में, यह कमान परिवार के भीतर ही चली गई, क्योंकि उनकी पत्नी कराबी मन्ना ने BJP के समीरन मित्रा को 23,072 वोटों से हराकर यह सीट जीती.
हरिपाल विधानसभा क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में भी तृणमूल का दबदबा साफ दिखता है. कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे की व्यवस्था के तहत, उसने 2009 के विधानसभा चुनाव में हरिपाल सीट पर चुनाव नहीं लड़ा था, जब कांग्रेस इस क्षेत्र से CPI(M) से 554 वोटों से आगे थी. तब से तृणमूल कांग्रेस ने तीनों संसदीय चुनावों में बड़ी बढ़त हासिल की है. 2014 में यह CPI(M) से 40,360 वोटों से आगे थी. 2019 से, BJP ने CPI(M) को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है, लेकिन तृणमूल के वर्चस्व को कोई गंभीर चुनौती नहीं दे पाई है. 2019 में तृणमूल की BJP पर बढ़त 9,564 वोटों की थी और फिर 2024 में यह बढ़कर 32,459 वोट हो गई.
हरिपाल में 2024 में 2,77,484 रजिस्टर्ड वोटर थे, जबकि 2021 में 2,69,649, 2019 में 2,59,773, 2016 में 2,46,588 और 2011 में 2,14,029 थे. अनुसूचित जाति के लोग कुल वोटरों का 26.04 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 5.74 प्रतिशत और मुस्लिम 21.30 प्रतिशत हैं, जिससे यह एक ऐसी सीट बन जाती है जहाँ जाति और समुदाय दोनों के समीकरण मायने रखते हैं. यह ज्यादातर ग्रामीण इलाका है, जहां 96.98 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं और सिर्फ 3.02 प्रतिशत शहरी इलाकों में. वोटिंग प्रतिशत लगातार ज्यादा रहा है, 2011 में 85.45 प्रतिशत, 2016 में 84.58 प्रतिशत, 2019 में 81.16 प्रतिशत, 2021 में 82.13 प्रतिशत और 2024 में 80.73 प्रतिशत.
हरिपाल शहर हरिपाल ब्लॉक का मुख्यालय है और हुगली जिले के चंदननगर सबडिवीजन में आता है. यह खेती के लिए मशहूर हुगली मैदानों का हिस्सा है, जहां समतल, उपजाऊ जलोढ़ जमीन है जिसे हुगली नदी और उसकी सहायक नदियों से जुड़े नहरों से पानी मिलता है. जमीन ज्यादातर समतल है, जिसमें तालाब और सिंचाई के चैनल हैं, और यह धान और दूसरी फसलों की जोरदार खेती के लिए उपयुक्त है, हालांकि निचले इलाकों में भारी मॉनसून की बारिश के दौरान पानी भर सकता है.
खेती स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है. किसान धान, आलू, जूट और सब्जियां उगाते हैं. इस क्षेत्र में ग्रामीण सड़कों, बाजारों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों का एक अच्छा नेटवर्क है, और इसे हुगली जिले के दूसरे हिस्सों में औद्योगिक और शहरी केंद्रों के पास होने का फायदा मिलता है. काम करने वाले लोगों का एक हिस्सा पास के शहरों और बड़े कोलकाता क्षेत्र में काम करने के लिए जाता है, जिससे घरों की आमदनी बढ़ती है. हरिपाल रेल और सड़क दोनों से कोलकाता और बाकी जिले से जुड़ा हुआ है. यह सबअर्बन नेटवर्क की हावड़ा-तारकेश्वर रेलवे लाइन पर है, जहां हरिपाल और हावड़ा को जोड़ने वाली सीधी ट्रेनें चलती हैं. हरिपाल और कोलकाता के बीच रेल और सड़क से दूरी लगभग 45 से 50 किमी है. जिले का हेडक्वार्टर चिनसुराह लगभग 35 से 36 किमी दूर है, जबकि सिंगूर, तारकेश्वर और जांगीपाड़ा जैसे शहर लगभग 20 से 40 किमी के दायरे में आते हैं, जिससे हरिपाल हुगली के बीच में एक बड़े ग्रामीण और अर्ध-शहरी समूह से जुड़ जाता है.
राजनीतिक रूप से, जहां हरिपाल में बीजेपी तृणमूल कांग्रेस के मुख्य चैलेंजर के रूप में उभरी है, वहीं पिछले दो चुनावों में तृणमूल की बढ़त का आकार बताता है कि 2026 में यह सीट जीतने के लिए बीजेपी को लगभग चमत्कार करना होगा. लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठबंधन का धीरे-धीरे हाशिए पर जाना बीजेपी को ज्यादा राहत नहीं देता, क्योंकि इससे अभी तक तृणमूल से वोटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि 1977 से, हरिपाल ने लगातार उसी पार्टी को वोट दिया है जिसने राज्य सरकार बनाई है या बनाने जा रही है, और अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में भी यह तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में रहेगा.
(अजय झा)
Samiran Mitra
BJP
Simal Saren
RSSCMJP
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Biswanath Ghosh
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Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
आज दस्तक में बात ईरान और अमेरिका के बीच अटकी और लटकी युद्धविराम वाली डील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव एक बार फिर ठुकरा दिया हैं, पेच ट्रंप की परमाणु प्रतिज्ञा पर फंसा है. ईरान होर्मुज खोजने को तैयार है लेकिन अपने परमाणु प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ समझौते को तैयार नहीं. अगर ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर अड़ा है तो ट्रंप अपनी परमाणु प्रतिज्ञा पर. ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, ईरान ने परमाणु प्रोग्राम की जिद नहीं छोड़ी तो अमेरिका एक बार फिर हमला कर सकता हैं. अब सवाल यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कैसे होंगे, क्या अमेरिका और ईरान की डील फंस गई, आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव का दूसरा चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम है, जहां कई सीटों पर उनकी संख्या पुरुषों से ज्यादा है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के बीच सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं, जिससे यह चरण और भी दिलचस्प बन गया है.
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एजेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने रामपुर और संभल में अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इन एजेंट्स से कुछ भी हासिल नहीं होगा.
ग्यारह घंटे बाद पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान का रण शुरु हो जाएगा. 142 सीटों पर वोटिंग होगी. इसी से जुड़ी कई खबरों पर हम खबरदार करेंगे. बताएंगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का गोल बंगाल में होगा और क्या सियासी भूगोल बदलेगा? इसी चुनाव में वोटिंग से पहले चर्चा यूपी के सिंघम और बंगाल के पुष्पा की हो रही है. जहां एक अधिकारी हैं जो कहते हैं कायदे में रहो. और दूसरे प्रत्याशी हैं जो कहते हैं झुकुगंगा नहीं. तीसरी खबर एम यानी महिला वोटर के शक्ति परीक्षण की है. जो आज यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों तरफ से किया गया है.
बंगाल चुनाव के बीच यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी दे रहे हैं. अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर की जरूरत क्या होती है, वो क्या करते हैं, क्या वो किसी जगह जाकर वोटर के बीच में चेतावनी दे सकते हैं? आजतक से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस सभी सवालों का जवाब दिया. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में कल दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. मतदान की बात करें तो पहले चरण में 93.19% वोटिंग हुई थी. ऐसे में राजनीतिक दलों में इसे लेकर भी भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.