BJP
AITC
CPM
IND
नोटा
NOTA
INC
IND
IND
SUCI
IND
AJUP
IND
Pandabeswar Assembly Election Result Live: पश्चिम बंगाल की इस सीट पर Jitendra Kumar Tewari ने Narendranath Chakraborty को हराया, जानिए किसे मिले कितने वोट
Pandabeswar Vidhan Sabha Result Live: पश्चिम बंगाल इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
West Bengal Election Results 2026 Live: पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Pandabeswar Chunav Results 2026 Live: पांडवेश्वर विधानसभा सीट पर यह क्या हो गया!
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
पश्चिम बर्धमान जिले का पांडवेश्वर, एक ब्लॉक-स्तरीय शहर, पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम विधानसभा सीट है. यह सामान्य वर्ग (General Category) की सीट है और आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के सात खंडों में से एक है. इस सीट में पांडवेश्वर और फरीदपुर-दुर्गापुर ब्लॉक शामिल हैं.
पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र का गठन 2008 में परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की सिफारिश के बाद हुआ. इसके बाद से यहां तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि यहां का रुझान राज्य की राजनीति से मेल खाता है, लेकिन थोड़ी देरी से.
2011 में जब पूरे बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को जीत दिलाकर वाम मोर्चे की 34 साल पुरानी सरकार खत्म कर दी थी, तब पांडवेश्वर ने वफादारी दिखाते हुए सीपीएम (CPI(M)) को जिताया. सीपीएम ने यहां 7,811 वोटों से जीत दर्ज की.
2016 में यहां बदलाव आया और टीएमसी के कुमार जितेंद्र तिवारी ने सीपीएम के विधायक गौरांग चटर्जी को 5,470 वोटों से हराया. 2021 में तिवारी बीजेपी में शामिल होकर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. टीएमसी के नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने उन्हें 3,803 वोटों से शिकस्त दी.
2024 लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने यहां बड़ी बढ़त बनाई और 40,025 वोटों से आगे रही. यह 2019 के उलट था, जब बीजेपी ने 6,021 वोटों से बढ़त बनाई थी.
2021 के चुनाव में यहां 2,11,960 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2016 के 1,90,960 से अधिक थे. अनुसूचित जाति (SC) मतदाता 30.86%, मुस्लिम मतदाता 13.30%, अनुसूचित जनजाति (ST) मतदाता 6.82% हैं. यह सीट मुख्य रूप से शहरी क्षेत्र है, जहां 60.33% वोटर शहरों में रहते हैं, जबकि 39.67% ग्रामीण इलाकों में है. मतदान प्रतिशत हमेशा 77% से 79% के बीच रहा है. 2021 में 77.51% मतदान हुआ था.
नाम से लगता है कि पांडवेश्वर का संबंध महाभारत के पांडवों से होगा, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण नहीं है. हां, यहां द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी वायुसेना का बेस जरूर रहा था, जो इसे ऐतिहासिक पहचान देता है.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र अजय-दमोदर-बराकर ट्रैक्ट में आता है, जिसे छोटानागपुर पठार का विस्तार माना जाता है. यहां की मिट्टी लेटराइट है और जमीन पथरीली-उतर-चढ़ाव वाली है. अजय नदी उत्तर में, दामोदर नदी दक्षिण में और बराकर नदी पश्चिम में बहती है.
कभी यह क्षेत्र घने जंगलों और डकैतों के लिए जाना जाता था, लेकिन 18वीं शताब्दी में कोयला मिलने के बाद यहां तेजी से औद्योगिकीकरण हुआ. आज अधिकांश जंगल खत्म हो चुके हैं और जगह-जगह कोयला खदानें व शहरी बस्तियां हैं.
पांडवेश्वर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कोयला खनन है. यह ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (Eastern Coalfields Limited) के पांडवेश्वर क्षेत्र में आता है, जहां डालूरबंद, खोट्टादिह, माधैपुर, मंदारबोनी और साउथ समला जैसी कई खदानें हैं.
खेती-बाड़ी सीमित है, क्योंकि खनन और शहरीकरण ज्यादा हावी है. यहां सड़कें, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. कोयला खदानों के कारण बिहार और झारखंड से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर यहां आए. नतीजतन, हिंदी भाषी मतदाता आज बड़ी संख्या में मौजूद हैं और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने लगे हैं.
यहां से दुर्गापुर 25 किमी दूर (दक्षिण-पूर्व), आसनसोल 30 किमी दूर (पश्चिम), जिला मुख्यालय बर्दवान 90 किमी, कोलकाता लगभग 180 किमी, झारखंड का जामताड़ा 50 किमी, और दुमका 100 किमी है.
पांडवेश्वर विधानसभा सीट पर अब तक सभी चुनाव बेहद करीबी मुकाबले वाले रहे हैं. केवल 2024 लोकसभा चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा की लोकप्रियता की वजह से टीएमसी को यहां बड़ी बढ़त मिली.
बीजेपी इस क्षेत्र में अभी भी उम्मीद देखती है, खासकर अगर वाममोर्चा और कांग्रेस का गठबंधन मजबूत होता है और मुस्लिम वोटों में बंटवारा होता है.
(अजय झा)
Kumar Jitendra Tewari
BJP
Subhas Bauri
CPI(M)
Nota
NOTA
Sanjay Yadav
IND
Rakesh Kumar Das
BSP
Atul Chandra Bauri
BMUP
Dana Goswami
SUCI
Pradip Kumar Poddar
IND
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से नाराज टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने उन्हें खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि खेल उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म टीएमसी करेगी. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी रात में छापेमारी कर रहे हैं और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव आयोग ने बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है. गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यहां के सभी 285 बूथों पर फिर से वोटिंग होगी.
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.