AITC
INC
BJP
CPM
AIMIM
AISF
IND
नोटा
NOTA
IND
SUCI
BSP
IND
West Bengal Election Result 2026 Live: मुरारई विधानसभा सीट पर AITC ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Murarai Election Results 2026 Live: मुरारई सीट पर यह क्या हो गया! BJP बड़े अंतर से पीछे
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Murarai Vidhan Sabha Result Live: पश्चिम बंगाल इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Murarai Assembly Election Result Live: मुरारई में BJP पीछे! जानें वोटों का अंतर कितना
मुरारई विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल के बिरभूम जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित एक सामान्य श्रेणी का निर्वाचन क्षेत्र है. यह बिरभूम लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से एक है. मुरारई क्षेत्र में मुरारई-I और मुरारई-II ब्लॉक आते हैं. क्षेत्र की पश्चिमी सीमा झारखंड के संथाल परगना से मिलती है, जिससे इसकी सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय पहचान पर खास असर पड़ा है.
मुरारई विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1951 में हुई थी और यह तब से राज्य के चुनावी मानचित्र पर शामिल है. हालांकि 1957 के चुनाव में यह अस्थायी रूप से समाप्त हो गया था. वर्तमान सीमा 2008 में सीमांकन आयोग की सिफारिशों के अनुसार तय की गई थी. अब तक इस क्षेत्र में कुल 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं.
इस क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी ने 1972 से 1996 तक लगातार छह बार चुनाव जीते. इससे पहले, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने 1967, 1969 और 1971 में तीन बार जीत हासिल की थी. बाद में, 2001 और 2006 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने जीत दर्ज की. इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने तीन लगातार चुनाव जीते. शुरुआती वर्षों में किसान मजदूर प्रजा पार्टी और क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी ने भी एक-एक बार यह सीट जीती थी.
2011 में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार मुरारई में जीत दर्ज की थी. उस समय उन्होंने CPI(M) को 4,403 वोटों से हराया था. 2016 में फिर से तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की, लेकिन सिर्फ 280 वोटों से जीती. 2021 में तृणमूल कांग्रेस के डॉ. मोसार्रफ हुसैन ने बीजेपी के देबासीस रॉय को 98,246 वोटों से हराया. लोकसभा चुनावों में भी तृणमूल का प्रभुत्व रहा, हालांकि अंतर 2019 में 69,403 वोटों से घटकर 2024 में 49,843 वोटों पर आ गया.
2021 विधानसभा चुनाव में मुरारी में कुल 2,63,200 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2016 के 2,34,055 से बढ़े थे. अनुसूचित जाति के मतदाता कुल मतदाताओं का 28.42% हैं, जबकि मुस्लिम मतदाता 48.76% हैं. यह क्षेत्र पूरी तरह से ग्रामीण है, जहां 90.58% लोग गांवों में रहते हैं और केवल 9.42% शहरी क्षेत्र में.
इस क्षेत्र में अब तक चुने गए सभी 16 प्रतिनिधि मुस्लिम रहे हैं, जो क्षेत्र के मुस्लिम बहुल जनसंख्या को दर्शाता है. 2021 में मतदान प्रतिशत 83.92% था, जो 2016 के 85.14% से थोड़ा कम रहा.
मुरारई क्षेत्र ब्रह्मणी-मयूराक्षी बेसिन में स्थित है. उत्तर में ब्रह्मणी नदी और दक्षिण में मयूराक्षी नदी है. कभी-कभी झारखंड के संथाल परगना से राजमहल की पहाड़ियां भी यहां आती हैं. ज्यादातर इलाका उपजाऊ मैदानी भूमि से भरा है, जिससे खेती मुख्य आजीविका है. यहां धान, सरसों और दालें मुख्य फसलें हैं. सिंचाई के लिए मुख्य रूप से नदियों और ट्यूबवेल पर निर्भरता है.
मुरारई की अर्थव्यवस्था अधिकतर कृषि पर आधारित है. औद्योगिक विकास नगण्य है. रोजगार के अवसर कम हैं, इसलिए कई लोग मौसमी पलायन करते हैं, खासकर आदिवासी और मुस्लिम समुदाय के लोग. सड़कें, प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन विकसित नहीं हैं. राज्य सरकार की योजनाओं से कुछ सुधार हुआ है, लेकिन रोजगार सृजन और ग्रामीण अवसंरचना में चुनौतियां बनी हुई हैं.
मुरारई कस्बा इस क्षेत्र का प्रशासनिक मुख्यालय है. नजदीकी प्रमुख शहर रामपुरहाट लगभग 30 किमी दूर है और यह उप-जिला मुख्यालय का काम करता है. जिला मुख्यालय सूरी लगभग 75 किमी दक्षिण-पश्चिम में है, जबकि कोलकाता से दूरी लगभग 220 किमी है. झारखंड की तरफ से पाकुड़ करीब 40 किमी और डुमका लगभग 70 किमी दूर है.
मुरारई में अब तक तृणमूल कांग्रेस की स्थिति मजबूत रही है, लेकिन शुरुआती जीतें बहुत नजदीकी रहीं. हाल के चुनाव में बीजेपी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया. साथ ही, मुस्लिम वोट का विभाजन और लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन का पुनरुत्थान आगामी 2026 के चुनाव को रोमांचक और प्रतिस्पर्धात्मक बना सकता है.
(अजय झा)
Debasish Roy
BJP
Asif Ekbal
INC
Ansarul Saiekh
SUCI
Tarak Let
BSP
Nota
NOTA
Samsul Miya
SP(I)
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से नाराज टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने उन्हें खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि खेल उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म टीएमसी करेगी. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी रात में छापेमारी कर रहे हैं और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव आयोग ने बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है. गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यहां के सभी 285 बूथों पर फिर से वोटिंग होगी.
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.