BJP
INC
CPM
AITC
BSP
GGP
SUCI
AJUP
IND
IND
Nota
NOTA
कटवा, पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धवान जिले की एक सामान्य (जनरल) श्रेणी की विधानसभा सीट है. यह बर्धमान पूर्व लोकसभा क्षेत्र के सात खंडों में से एक है. इस सीट में कटवा नगरपालिका, दैन्हाट नगरपालिका, कटवा-II सामुदायिक विकास खंड और कटवा-I ब्लॉक के चार ग्राम पंचायत - खाजुर्दीही, सुदपुर, करजग्राम और गोई शामिल हैं. यह एक मिश्रित निर्वाचन क्षेत्र है, जहां ग्रामीण मतदाता कुल मतदाताओं का लगभग 65.40 प्रतिशत और शहरी मतदाता 34.60 प्रतिशत हैं.
1951 में स्थापित होने के बाद से कटवा ने राज्य की अब तक की सभी 17 विधानसभा चुनावों में भाग लिया है. लंबे समय तक यह सीट वाम मोर्चे का गढ़ रही. एकीकृत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने यहां दो बार जीत दर्ज की, जबकि 1964 के विभाजन के बाद माकपा (CPI-M) ने छह बार जीत हासिल की. बीच-बीच में कांग्रेस ने भी सफलता पाई.
1996 से इस सीट पर कांग्रेस के रवींद्रनाथ चटर्जी का दबदबा कायम हुआ. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लगातार चार चुनाव जीते. 2016 में चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और वहां से भी लगातार 2016 और 2021 के चुनावों में जीत दर्ज की. कुल मिलाकर 1996 से अब तक छह बार लगातार जीत का उनका रिकॉर्ड इस सीट पर बेजोड़ है.
2016 का चुनाव बेहद कड़ा रहा, जब चटर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार श्यामा मजूमदार को मात्र 911 वोटों से हराया. बाद में मजूमदार ने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और 2021 में भाजपा प्रत्याशी बने. इस बार दोनों पूर्व कांग्रेसी नेताओं के बीच सीधी लड़ाई हुई, जिसमें चटर्जी ने मजूमदार को 9,155 वोटों से मात दी.
भाजपा का उदय कटवा में धीरे-धीरे हुआ. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कटवा खंड में 1,859 वोटों से बढ़त हासिल कर राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने फिर से पकड़ मजबूत की और 12,415 वोटों से बढ़त बनाई.
2021 विधानसभा चुनाव में कटवा में 2,67,738 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव तक बढ़कर 2,75,698 हो गए. इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता 27.41 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता 21.80 प्रतिशत हैं. मतदान प्रतिशत हमेशा ऊंचा रहा. 2016 में 84%, 2019 में 82.55%, 2021 में 84.13% और 2024 में 80.45% रहा था.
कटवा नगर, जो इस क्षेत्र को नाम देता है, का इतिहास बेहद समृद्ध है. इसे पहले इंद्रणी परगना और बाद में कांटाक नगरी के नाम से जाना जाता था. यह वैष्णव संप्रदाय के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है. अजय और हुगली नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण कटवा मुगलों और नवाबों के दौर में रणनीतिक दृष्टि से अहम केंद्र रहा.
कटवा, मुर्शिदाबाद (बंगाल की राजधानी) का प्रवेश द्वार था और मराठा आक्रमणों तथा ब्रिटिश विजय के दौरान कई युद्धों का गवाह बना. 1740 के दशक में प्रथम और द्वितीय कटवा युद्ध और 1763 में तृतीय कटवा युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण मुठभेड़ यहीं हुई. 1757 में प्लासी की निर्णायक लड़ाई से पहले रॉबर्ट क्लाइव ने यहां युद्ध परिषद भी आयोजित की थी.
कटवा का भूभाग उपजाऊ और समतल है, जो मध्य बंगाल की जलोढ़ मिट्टी का हिस्सा है. अजय नदी और हुगली नदी इस क्षेत्र के पास बहती हैं, जिससे कृषि और व्यापार को सहारा मिलता है. धान, जूट और मौसमी सब्जियां यहां की प्रमुख फसलें हैं. एक समय नदी मार्ग से नमक और अन्य वस्तुओं का बड़ा व्यापार होता था. आज भी कृषि यहां की रीढ़ है, साथ ही लघु उद्योग और व्यापार भी अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं.
सांस्कृतिक दृष्टि से भी कटवा काफी जीवंत है. खासकर कार्तिक पूजा, जिसे स्थानीय स्तर पर कार्तिक लड़ाई कहा जाता है, यहां का बड़ा आकर्षण है. इस दौरान 250 से अधिक संगठन भव्य आयोजन में हिस्सा लेते हैं.
कटवा का बुनियादी ढांचा साधारण लेकिन कार्यात्मक है. यहां से बर्धवान, बांदेल, आजीमगंज और अहमदपुर तक रेल संपर्क उपलब्ध है, जो 20वीं सदी की शुरुआत में स्थापित हुआ था. सड़क संपर्क भी पास के कस्बों और गांवों तक अच्छा है. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और विशेष चिकित्सा सेवाओं के लिए लोगों को अक्सर बर्धवान या कोलकाता जाना पड़ता है.
कटवा, जिला मुख्यालय बर्धवान से लगभग 55 किमी, राज्य की राजधानी कोलकाता से 150 किमी दूर है. निकटवर्ती कस्बों में कालना (30 किमी), दैन्हाट (10 किमी) और पूर्वस्थली (25 किमी) शामिल हैं. आसनसोल लगभग 152 किमी और झारखंड का धनबाद लगभग 150 किमी की दूरी पर स्थित है.
2026 विधानसभा चुनाव से पहले कटवा में रोमांचक मुकाबले के आसार हैं. भाजपा, अपनी बढ़ती पकड़ और पिछली बढ़तों के सहारे यहां जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी. तृणमूल कांग्रेस, अनुभवी नेता रवींद्रनाथ चटर्जी के नेतृत्व में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए संघर्ष करेगी. यदि कांग्रेस-वाममोर्चा गठबंधन अपना खोया जनाधार वापस पाने में सफल रहता है, तो यह विपक्षी वोटों का बंटवारा कर भाजपा को बढ़त दिला सकता है.
यानी, कटवा 2026 में एक बेहद कड़े और दिलचस्प चुनावी मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है.
(अजय झा)
Shyama Majumdar
BJP
Prabir Ganguli
INC
Nota
NOTA
Paritosh Chair
BSP
Apurba Chakraborty
SUCI
Assembly Election Exit Poll 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को खत्म होने के बाद सभी की नजरें एग्जिट पोल पर टिक रहेंगी. पांचों चुनावी राज्यों- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है, जिस कारण लोग एग्जिट पोल्स का उत्सुकता के साथ इंतजार कर रहे हैं.
आज दस्तक में बात ईरान और अमेरिका के बीच अटकी और लटकी युद्धविराम वाली डील की. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान का शांति प्रस्ताव एक बार फिर ठुकरा दिया हैं, पेच ट्रंप की परमाणु प्रतिज्ञा पर फंसा है. ईरान होर्मुज खोजने को तैयार है लेकिन अपने परमाणु प्रोग्राम पर अमेरिका के साथ समझौते को तैयार नहीं. अगर ईरान अपने परमाणु प्रोग्राम पर अड़ा है तो ट्रंप अपनी परमाणु प्रतिज्ञा पर. ट्रंप बार-बार धमकी दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे, ईरान ने परमाणु प्रोग्राम की जिद नहीं छोड़ी तो अमेरिका एक बार फिर हमला कर सकता हैं. अब सवाल यही है कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कैसे होंगे, क्या अमेरिका और ईरान की डील फंस गई, आगे क्या होगा?
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पश्चिम बंगाल चुनाव का दूसरा चरण सत्ता की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है. 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग में महिला मतदाताओं की भूमिका बेहद अहम है, जहां कई सीटों पर उनकी संख्या पुरुषों से ज्यादा है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर के बीच सभी दल महिला वोटरों को साधने में जुटे हैं, जिससे यह चरण और भी दिलचस्प बन गया है.
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के एजेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने बताया कि बीजेपी ने रामपुर और संभल में अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इन एजेंट्स से कुछ भी हासिल नहीं होगा.
ग्यारह घंटे बाद पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान का रण शुरु हो जाएगा. 142 सीटों पर वोटिंग होगी. इसी से जुड़ी कई खबरों पर हम खबरदार करेंगे. बताएंगे कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का गोल बंगाल में होगा और क्या सियासी भूगोल बदलेगा? इसी चुनाव में वोटिंग से पहले चर्चा यूपी के सिंघम और बंगाल के पुष्पा की हो रही है. जहां एक अधिकारी हैं जो कहते हैं कायदे में रहो. और दूसरे प्रत्याशी हैं जो कहते हैं झुकुगंगा नहीं. तीसरी खबर एम यानी महिला वोटर के शक्ति परीक्षण की है. जो आज यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी दोनों तरफ से किया गया है.
बंगाल चुनाव के बीच यूपी के IPS अफसर अजय पाल शर्मा का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को चेतावनी दे रहे हैं. अब सवाल ये पूछा जा रहा है कि एक पुलिस ऑब्जर्वर की जरूरत क्या होती है, वो क्या करते हैं, क्या वो किसी जगह जाकर वोटर के बीच में चेतावनी दे सकते हैं? आजतक से बातचीत में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने इस सभी सवालों का जवाब दिया. देखें वीडियो.
पश्चिम बंगाल में कल दूसरे चरण की वोटिंग होनी है. मतदान की बात करें तो पहले चरण में 93.19% वोटिंग हुई थी. ऐसे में राजनीतिक दलों में इसे लेकर भी भारी उठा-पटक देखने को मिल रही है.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि 27 अप्रैल की रात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा और केंद्रीय बलों के जवानों ने घर में जबरन घुसकर महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की. शिकायत में भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने और धमकी देने का भी आरोप है. पीड़िता ने निष्पक्ष जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामला चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि पुलिस पर्यवेक्षक ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर सुरक्षा कर्मियों को धमकाया और बाद में उनके घर जाकर परिवार को डराने की कोशिश की. जहांगीर खान ने इसे चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि भाजपा की मदद के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए जा रहे हैं. इस बयान से क्षेत्र का चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है.