BJP
AITC
CPI(ML)(L)
INC
नोटा
NOTA
AJUP
BSP
SUCI
Purbasthali Dakshin Results 2026 Live: पुर्वस्थली दक्षिण सीट के रिजल्ट का हुआ ऐलान, Pran Krishna Tapadar ने 16662 वोटों के अंतर से मार लिया मोर्चा
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Purbasthali Dakshin Vidhan Sabha Result Live: पश्चिम बंगाल इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
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West Bengal Election Results 2026 Live: पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Purbasthali Dakshin Vidhan Sabha Result 2026 Live: पुर्वस्थली दक्षिण सीट पर सबसे आगे निकले BJP उम्मीदवार Pran Krishna Tapadar
पश्चिम बंगाल के धान उत्पादन वाले प्रमुख क्षेत्र में स्थित पुर्वस्थली दक्षिण एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है, जो पूर्व बर्धवान जिले में आता है. यह बर्धवान पूर्व लोकसभा सीट के तहत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 1951 में इस क्षेत्र के गठन के बाद से अब तक हुए सभी 17 विधानसभा चुनावों में यह हिस्सा ले चुका है.
2008 में परिसीमन आयोग द्वारा नई सीमाओं के निर्धारण के बाद, इस क्षेत्र में कालना-I ब्लॉक के नंदई, कांकुरिया, बेगपुर, आठघोरिया सिमलान, धात्रिग्राम और सुल्तानपुर ग्राम पंचायतें, और पुर्वस्थली-I ब्लॉक के नसरतपुर, समुद्रगढ़, बोगपुर, श्रीरामपुर और नदनघाट ग्राम पंचायतें शामिल की गईं.
लगभग पचास वर्षों तक इस क्षेत्र में कांग्रेस और सीपीआई(एम) की पकड़ मजबूत रही. 1951 से 1962 तक लगातार तीन चुनाव कांग्रेस ने जीते. इसके बाद 1967, 1969 और 1971 में CPI(M) ने लगातार तीन जीत दर्ज कीं. 1972 में कांग्रेस ने आखिरी बार यहां जीत हासिल की, जिसके बाद 1977 से 2006 तक CPI(M) ने सात बार लगातार इस सीट पर कब्जा जमाए रखा.
2011 में तस्वीर बदली, जब तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यह सीट अपने नाम की और तब से अब तक इसे मजबूती से पकड़े हुए है.
तृणमूल कांग्रेस के स्वपन देबनाथ ने 2011 में CPI(M) की आलेया बेगम को 15,858 वोटों से हराकर सीट जीती. 2016 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत भट्टाचार्य को 37,666 वोटों से हराया. 2021 में उन्होंने भाजपा के राजीव कुमार भौमिक को 17,410 वोटों से पछाड़कर लगातार तीसरी जीत दर्ज की.
ध्यान देने वाली बात यह है कि स्वपन देबनाथ ने तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवारों को हराया. वहीं भाजपा का वोट शेयर भी तेजी से बढ़ा है- 2011 में 6.22%, 2016 में 9.70% से बढ़कर 2021 में 41% तक पहुंच गया.
पुर्वस्थली दक्षिण क्षेत्र में भाजपा की मजबूती हालिया लोकसभा चुनावों में भी दिखाई दी. 2019 और 2024 दोनों ही चुनावों में भाजपा ने CPI(M) को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया. तृणमूल कांग्रेस ने 2019 में 21,908 और 2024 में 21,362 वोटों की बढ़त बनाकर अपनी स्थिति मज़बूत बनाए रखी.
2024 में इस क्षेत्र में 2,53,983 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2021 के 2,48,533 से अधिक हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति 24.84%, अनुसूचित जनजाति 7.51%, और मुस्लिम आबादी 28% थी. यह एक मुख्यतः ग्रामीण सीट है, जहां केवल 21.04% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
इस क्षेत्र में मतदान प्रतिशत हमेशा से ऊंचा रहा है. 2016 में 88.10%, 2021 में 86.68% और 2024 लोकसभा चुनाव में 82.62% रहा था.
पुर्वस्थली दक्षिण गंगा डेल्टा के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में स्थित है. यह भागीरथी, अजय और दमदमर नदियों से घिरा है. भागीरथी नदी यहां कई मोड़ लेते हुए बहती है और ऑक्सबो झीलें, बिल और तालाब बनाती है. इन्हीं में से एक प्रमुख झील चुपी चार प्रवासी पक्षियों का आकर्षण केंद्र है और स्थानीय मत्स्य व्यवसाय को भी सहारा देती है. क्षेत्र की मिट्टी नई और पुरानी जलोढ़ मिट्टी का मिश्रण है, जो मध्यम से अधिक क्षारीय है.
कृषि यहां की आर्थिक रीढ़ है. धान, जूट और सब्जियां यहां की मुख्य फसलें हैं. इस क्षेत्र में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिसके चलते जल-सुरक्षा के कई सरकारी प्रयास चल रहे हैं.
सड़क और रेल संपर्क साधारण लेकिन उपयोगी है. यहां से कलना 12 किमी, नवद्वीप 8 किमी, कटवा 25 किमी, बर्धवान 40 किमी और कोलकाता 120 किमी दूर है. यह क्षेत्र पूर्वी दिशा में नदिया जिले और दक्षिण-पश्चिम में हुगली जिले से सटा हुआ है.
यह इलाका गंगा के प्राचीन सांस्कृतिक क्षेत्र का हिस्सा रहा है. कालना और नवद्वीप के आसपास कई प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक बस्तियां मौजूद हैं. पुर्वस्थली का पक्षी अभयारण्य और झील सर्दियों में खास आकर्षण होता है.
तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीन जीत, साथ ही पिछले चार लोकसभा चुनावों में लगातार बढ़त, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भी TMC यहां मजबूत स्थिति में बनी रहेगी. यदि भाजपा प्रभावी एंटी-इंकंबेंसी लहर नहीं बनाती और वाम-कांग्रेस गठबंधन कोई बड़ा चमत्कार नहीं करता, तो तृणमूल का जोड़ागाछ फूल यहां फिर से खिलना तय माना जा रहा है.
(अजय झा)
Rajib Kumar Bhowmick
BJP
Abhijit Bhattacharyya
INC
Surajit Mondal
BSP
Santosh Kumar Adhikary
PMPT
Nota
NOTA
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पुलिस ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा की कार्रवाई से नाराज टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने उन्हें खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि खेल उन्होंने शुरू किया है, लेकिन खत्म टीएमसी करेगी. टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारी रात में छापेमारी कर रहे हैं और महिलाओं के साथ बदसलूकी कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के फाल्टा में दूसरे चरण के मतदान से पहले राजनीतिक विवाद तेज हो गया. निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक और उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने विरोध जताया. आयोग को मतदाताओं को धमकाने और पहचान पत्र जमा कराने की शिकायत मिली थी. तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा, 'अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.' वहीं तृणमूल नेताओं ने शर्मा पर अधिकार सीमा लांघने का आरोप लगाया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया.
पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर मतदान से पहले बड़ा विवाद सामने आया है. निर्वाचन आयोग ने संयुक्त बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारी सौरव हाजरा का तत्काल तबादला कर दिया. यह कदम आईपीएस अजय पाल शर्मा के दौरे, तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान के आरोपों और एक महिला की शिकायत के बाद उठाया गया. महिला ने केंद्रीय बलों पर घर में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़ और भाजपा के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है. मामले ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
चुनाव आयोग ने बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर भी दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है. गड़बड़ी की शिकायतों के बाद यहां के सभी 285 बूथों पर फिर से वोटिंग होगी.
संघ ने ऑटो ड्राइवरों, चाय की दुकानों और ब्यूटी पार्लर की 'दीदियों' के जरिए एक ऐसा अदृश्य 'विस्पर कैंपेन' चलाया जिसने घर-घर तक पैठ बना ली. यह कहानी उसी माइक्रो-रणनीति की है, जिसने जन-आक्रोश की दबी हुई लहर को एक प्रचंड चुनावी सुनामी में बदल दिया.
बंगाल चुनाव खत्म हो गया, लेकिन SIR पर सियासी और कानूनी संग्राम जारी है. टीएमसी इसे वोटरों की ‘सफाई’ नहीं, लोकतंत्र की ‘छंटनी’ बता रही है, जबकि चुनाव आयोग नियमों का हवाला दे रहा है. ये लड़ाई जीतना टीएमसी के लिए सिर्फ नैरेटिव ही नहीं, अस्तित्व की खातिर भी जरूरी है.