पश्चिम बंगाल के धान उत्पादन वाले प्रमुख क्षेत्र में स्थित पुर्वस्थली दक्षिण एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है, जो पूर्व बर्धवान जिले में आता है. यह बर्धवान पूर्व लोकसभा सीट के तहत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 1951 में इस क्षेत्र के गठन के बाद से अब तक हुए सभी 17 विधानसभा चुनावों में यह हिस्सा ले चुका है.
2008 में परिसीमन आयोग द्वारा नई सीमाओं के निर्धारण के बाद, इस क्षेत्र में कालना-I ब्लॉक के नंदई, कांकुरिया, बेगपुर, आठघोरिया सिमलान, धात्रिग्राम और सुल्तानपुर ग्राम पंचायतें, और पुर्वस्थली-I ब्लॉक के नसरतपुर, समुद्रगढ़, बोगपुर, श्रीरामपुर और नदनघाट ग्राम पंचायतें शामिल की गईं.
लगभग पचास वर्षों तक इस क्षेत्र में कांग्रेस और सीपीआई(एम) की पकड़ मजबूत रही. 1951 से 1962 तक लगातार तीन चुनाव कांग्रेस ने जीते. इसके बाद 1967, 1969 और 1971 में CPI(M) ने लगातार तीन जीत दर्ज कीं. 1972 में कांग्रेस ने आखिरी बार यहां जीत हासिल की, जिसके बाद 1977 से 2006 तक CPI(M) ने सात बार लगातार इस सीट पर कब्जा जमाए रखा.
2011 में तस्वीर बदली, जब तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यह सीट अपने नाम की और तब से अब तक इसे मजबूती से पकड़े हुए है.
तृणमूल कांग्रेस के स्वपन देबनाथ ने 2011 में CPI(M) की आलेया बेगम को 15,858 वोटों से हराकर सीट जीती. 2016 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत भट्टाचार्य को 37,666 वोटों से हराया. 2021 में उन्होंने भाजपा के राजीव कुमार भौमिक को 17,410 वोटों से पछाड़कर लगातार तीसरी जीत दर्ज की.
ध्यान देने वाली बात यह है कि स्वपन देबनाथ ने तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवारों को हराया. वहीं भाजपा का वोट शेयर भी तेजी से बढ़ा है- 2011 में 6.22%, 2016 में 9.70% से बढ़कर 2021 में 41% तक पहुंच गया.
पुर्वस्थली दक्षिण क्षेत्र में भाजपा की मजबूती हालिया लोकसभा चुनावों में भी दिखाई दी. 2019 और 2024 दोनों ही चुनावों में भाजपा ने CPI(M) को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया. तृणमूल कांग्रेस ने 2019 में 21,908 और 2024 में 21,362 वोटों की बढ़त बनाकर अपनी स्थिति मज़बूत बनाए रखी.
2024 में इस क्षेत्र में 2,53,983 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2021 के 2,48,533 से अधिक हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति 24.84%, अनुसूचित जनजाति 7.51%, और मुस्लिम आबादी 28% थी. यह एक मुख्यतः ग्रामीण सीट है, जहां केवल 21.04% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है.
इस क्षेत्र में मतदान प्रतिशत हमेशा से ऊंचा रहा है. 2016 में 88.10%, 2021 में 86.68% और 2024 लोकसभा चुनाव में 82.62% रहा था.
पुर्वस्थली दक्षिण गंगा डेल्टा के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में स्थित है. यह भागीरथी, अजय और दमदमर नदियों से घिरा है. भागीरथी नदी यहां कई मोड़ लेते हुए बहती है और ऑक्सबो झीलें, बिल और तालाब बनाती है. इन्हीं में से एक प्रमुख झील चुपी चार प्रवासी पक्षियों का आकर्षण केंद्र है और स्थानीय मत्स्य व्यवसाय को भी सहारा देती है. क्षेत्र की मिट्टी नई और पुरानी जलोढ़ मिट्टी का मिश्रण है, जो मध्यम से अधिक क्षारीय है.
कृषि यहां की आर्थिक रीढ़ है. धान, जूट और सब्जियां यहां की मुख्य फसलें हैं. इस क्षेत्र में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिसके चलते जल-सुरक्षा के कई सरकारी प्रयास चल रहे हैं.
सड़क और रेल संपर्क साधारण लेकिन उपयोगी है. यहां से कलना 12 किमी, नवद्वीप 8 किमी, कटवा 25 किमी, बर्धवान 40 किमी और कोलकाता 120 किमी दूर है. यह क्षेत्र पूर्वी दिशा में नदिया जिले और दक्षिण-पश्चिम में हुगली जिले से सटा हुआ है.
यह इलाका गंगा के प्राचीन सांस्कृतिक क्षेत्र का हिस्सा रहा है. कालना और नवद्वीप के आसपास कई प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक बस्तियां मौजूद हैं. पुर्वस्थली का पक्षी अभयारण्य और झील सर्दियों में खास आकर्षण होता है.
तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीन जीत, साथ ही पिछले चार लोकसभा चुनावों में लगातार बढ़त, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भी TMC यहां मजबूत स्थिति में बनी रहेगी. यदि भाजपा प्रभावी एंटी-इंकंबेंसी लहर नहीं बनाती और वाम-कांग्रेस गठबंधन कोई बड़ा चमत्कार नहीं करता, तो तृणमूल का जोड़ागाछ फूल यहां फिर से खिलना तय माना जा रहा है.
(अजय झा)
Rajib Kumar Bhowmick
BJP
Abhijit Bhattacharyya
INC
Surajit Mondal
BSP
Santosh Kumar Adhikary
PMPT
Nota
NOTA
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