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बंगाल चुनाव: दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान कल, 12 लाख SIR आवेदनों में सिर्फ 1468 को मिली मंजूरी

पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण में 142 सीटों पर कल यानी 29 अप्रैल को मतदान होना है. 3.21 करोड़ वोटर 1448 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे, जबकि लाखों वोटर लिस्ट आवेदन अब भी लंबित हैं.

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बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग बेहद अहम मानी जा रही है. (File Photo: ITG)
बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग बेहद अहम मानी जा रही है. (File Photo: ITG)

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग वाले इलाकों में वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए लिए लंबित 12 लाख 90 हजार से ज्यादा आवेदनों में से अब तक 1468 को ही क्लियरेंस मिल पाई है. छह अपीलें रद्द हुई हैं. पहले चरण में 14 लाख आवेदनों यानी अपील में से सिर्फ 139 को ही हरी झंडी मिल पाई थी. इस चरण में 3 करोड़ 21 लाख से ज्यादा वोटर्स 1448 उम्मीदवारों के किस्मत का फैसला करेंगे. वोटिंग के लिए इस चरण में 41 हजार एक मतदान केंद्र बनाए गए हैं.

दक्षिण 24 परगना का भांगड़ निर्वाचन क्षेत्र की चर्चा बार सबसे ज्यादा 19 उम्मीदवार मैदान में होने से है, जबकि हुगली जिले के गोघाट में सबसे कम 5 उम्मीदवार हैं.
इस चरण में 142 सीटों के लिए कुल मतदाता 3 करोड़ 21 लाख 73 हजार 837 हैं. इनमें पुरुष मतदाता 1 करोड़ 64 लाख 35 हजार 627 है, जबकि महिला मतदाता 1 करोड़ 57 लाख 37 हजार 418 हैं. इस चरण में तीसरे लिंग वाले मतदाता 792 हैं.

युवा शक्ति वोटर्स में 18-19 साल के 4 लाख 12 हजार 668 नये मतदाता पहली बार अपने वोट की ताकत दिखायेंगे.

अहम भूमिका निभाएगा दूसरा चरण!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण 142 सीटों पर होगा, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में एक अहम भूमिका निभाएगा. इस चरण के लिए वोटिंग 29 अप्रैल को होगी, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है. यह चुनाव कुल 294 सीटों पर दो चरणों में हो रहा है. पहले चरण में पहले ही भारी संख्या में वोटिंग हो चुकी है, इसलिए अब सभी की नज़रें दूसरे चरण की इन सीटों पर टिकी हैं.

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कोलकाता से लेकर हुगली और उससे आगे तक, इस चरण में कई ऐसी जरूरी सीटें शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों पर गहरा असर डाल सकती हैं.

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यह चरण क्यों अहम है?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का दूसरा चरण इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें शहरी केंद्र और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं. ये क्षेत्र अक्सर आखिरी नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. सियासी दलों ने यहां चुनाव प्रचार पर ज़ोरदार ध्यान केंद्रित किया है और कई निर्वाचन क्षेत्रों में कड़े मुकाबले की उम्मीद है.

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