पश्चिम बंगाल विधानससभा चुनाव 2026 के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा 15 मार्च को हुई. चुनाव आयोग ने यहां 2 चरणों में मतदान करवाने का फैसला किया है. मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा जबकि वोटों की गिनती 4 मई 2026 को होगी.
पहले फेज यानी 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे फेज, 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा.
चुनाव का त्योहार, जो हमारे लोकतंत्र का गर्व है, अब असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने जा रहा है. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में कुल मिलाकर लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हैं और यहां 824 विधानसभा क्षेत्र हैं. चुनाव के लिए करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे और पूरे चुनाव को संपन्न कराने के लिए लगभग 25 लाख चुनाव कर्मी तैनात किए जाएंगे.
इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल का 23 मई को, पुडुचेरी का 15 जून को, तमिलनाडु का 10 मई को और पश्चिम बंगाल का 7 मई को समाप्त हो रहा है. इसलिए इन सभी जगहों पर समय पर नई सरकार चुनने के लिए विधानसभा चुनाव आयोजित किए जाएंगे.
मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी जहां लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं भाजपा, वाम दल और कांग्रेस भी नए गठबंधनों और रणनीतियों के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.
बात करें 2021 के विधानसभा चुनाव कि तो उस चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद से राज्य की राजनीति में कई बदलाव हुए हैं- भाजपा में अंदरूनी खींचतान, विपक्षी दलों के गठजोड़ की कोशिशें और टीएमसी के भीतर भी कुछ असंतोष के स्वर सुनाई दिए.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा. इस बीच ममता बनर्जी के दार्जिलिंग में दिए गए एक भाषण पर विवाद शुरू हो गया है.
15 साल से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही हैं. 2021 के बाद दूसरी बार बीजेपी कड़ी टक्कर दे रही है, और काउंटर करने के लिए ममता बनर्जी लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि अगर बीजेपी सत्ता में आई, तो सब तहस नहस हो जाएगा.
हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी तो उत्तर प्रदेश में AIMIM के नेताओं ने सबसे ज्यादा विरोध किया था, लेकिन तीन महीने के बाद ही उनके तेवर बदल गए हैं. असदुद्दीन ओवैसी ने अब उन्हीं हुमायूं कबीर के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. ऐसे में आखिर क्या मजबूरी रही?
पश्चिम बंगाल में जुबानी जंग के बीच बीजेपी लगातार ममता सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रही है. पार्टी ने टीएमसी पर आपराधिक नेटवर्क को संरक्षण देने का आरोप लगाया. वहीं TMC का कहना है कि बीजेपी अन्य राज्यों से 'एनकाउंटर राज' मॉडल लाने की कोशिश कर रही है.
टीएमसी ने ओडिशा के भाजपा नेता के खिलाफ चुनाव आयोग और पुलिस में शिकायत दर्ज की है. आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बंगाल की महिलाओं पर आपत्तिजनक व अश्लील टिप्पणी की. पार्टी ने इसे महिलाओं की गरिमा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया है.
पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल में ममता बनर्जी ने महंगाई को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है. पुरबा बर्धमान की रैली में उन्होंने रसोई गैस की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला और तंज कसते हुए पूछा कि क्या 1100 रुपये के सिलेंडर वाले इस दौर में अब जनता को फिर से 'बैलगाड़ी' के जमाने में लौटना पड़ेगा? सिर्फ महंगाई ही नहीं, इस बार भवानीपुर की सियासी जंग भी दिलचस्प हो गई है, जहां बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को मैदान में उतारकर मुकाबले को आर-पार का बना दिया है.
ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर की जुगलबंदी से मुस्लिम वोट बंटने के कयासों को खारिज किया है. उन्होंने टीएमसी की जीत का दावा करते हुए कहा है कि बंगाल, गुजरात नहीं होगा. बंगाल, यूपी नहीं बनेगा.
अब बात बंगाल की सियासत की. कोलकाता में रामनवमी पर एक शोभायात्रा निकाली गई और इस शोभायात्रा में बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए. शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर से बीजेपी के उम्मीदवार हैं. शुभेंदु ने कहा कि पश्चिम बंगाल में रामराज्य लाना उनका संकल्प है.
पश्चिम बंगाल में चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहा है सियासी गर्मी भी बढ़ती जा रही है. चुनावी मौसम में कोलकाता में रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली गई और इस शोभायात्रा में बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी भी शामिल हुए। बीजेपी रामनवमी को धूमधाम से मना रही है. रामनवमी में बीजेपी के कार्यकर्ता जमकर हिस्सा ले रहे है. इस बीच कोलकाता के न्यूटाउन में रामनवमी रैली के दौरान तलवार लाने पर तनाव हो गया. बीजेपी उम्मीदवार और पुलिस के साथ तीखी बहस हुई.
निर्वाचन प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. उन्होंने इसे एक राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए व्यापक स्तर पर कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया है. सत्ता पक्ष के अनुसार, मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रत्येक स्तर पर प्रशासनिक और न्यायिक हस्तक्षेप किया जाएगा.
रामनवमी के मौके पर भी चुनावी छाप नजर आई. भवानीपुर से बीजेपी के उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने शोभायात्रा निकाली. वहीं, बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और खड़गपुर से पार्टी के उम्मीदवार दिलीप घोष ने भी शोभायात्रा निकाली.
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले BJP अपना मेनिफेस्टो जारी करने जा रही है, जिसमें DA बकाया 45 दिनों में चुकाने, महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को 3000 रुपये मासिक सहायता देने जैसे बड़े वादे शामिल हैं. पार्टी रोजगार, उद्योग, कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बना रही है.
उत्तर बंगाल की 54 सीटें पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी मानी जाती हैं, जहां चुनावी ‘चाय’ का स्वाद हर बार बदलता है. टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर में यह इलाका स्विंग जोन की भूमिका निभाता है. चाय बागान, पहाड़ी राजनीति, आदिवासी और राजवंशी वोटबैंक जैसे कई फैक्टर नतीजों को प्रभावित करते हैं. छोटे वोट शिफ्ट भी यहां बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे तय होगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ जाएगी.
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का मामला सामने आया है. चुनाव आयोग के अनुसार अब तक करीब 76 लाख नाम हटाए जा चुके हैं, जिनमें 13 लाख नाम हालिया जांच में हटाए गए. इस कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
स्वप्ना बर्मन साल 2020 में भारतीय रेलवे में शामिल हुई थीं और अलीपुरद्वार डिवीजन में 'स्टाफ एंड वेलफेयर इंस्पेक्टर' के पद पर तैनात थीं. विवाद की शुरुआत तब हुई जब रेलवे ने 9 मार्च को उन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए जांच शुरू की. आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए एक राजनीतिक रैली में हिस्सा लिया.
आरजी कर केस की पीड़िता की मां के बीजेपी उम्मीदवार बनने से बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आ गया है. उन्होंने इसे न्याय की लड़ाई बताते हुए महिलाओं की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बनाया, जबकि टीएमसी ने उनके फैसले पर सवाल उठाए हैं.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 19 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की है. पार्टी ने पानीहाटी सीट से आरजी कर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को टिकट देना खास तौर पर चर्चा में है. इसे पार्टी का भावनात्मक और रणनीतिक कदम माना जा रहा है.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आज हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन का औपचारिक एलान कर दिया. दोनों पार्टियां विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगी. गठबंधन के ऐलान के साथ ही ओवैसी ने दावा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग घुटन महसूस कर रहे हैं. इस जोड़ी की नजर बंगाल के मुस्लिम आबादी वाले जिलों पर है. 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी ने अलग प्लान बनाया है. ममता बनर्जी ने नॉर्थ बंगाल से चुनावी हुंकार भरी तो अभिषेक बनर्जी ने साउथ बंगाल से मिशन-2026 का आगाज किया. इस तरह ममता की कोशिश बीजेपी के गढ़ में सेंधमारी की है तो अभिषेक टीएमसी के दुर्ग को दुरुस्त रखेंगे.
चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में बढ़ी सियासी हलचल. ओवैसी की पार्टी ने बंगाल में हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ किया गठबंधन. ओवैसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोलकाता में गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया. हुमायूं ने कहा बंगाल में मुसलमान हमारे साथ हैं. और पूरी ताकत से मिलकर चुनाव लड़ेंगे. इस मौके पर ओवैसी ने इस गठबंधन के पीछे के मकसद भी बताया.
पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर AIMIM और जेयूपी के बीच सीट शेयरिंग फाइनल हो गई है. असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि इस गठबंधन का मकसद बंगाल में अल्पसंख्यकों के बीच से राजनीतिक नेतृत्व को बाहर लाना है. इस दौरान ओवैसी ने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा.