पश्चिम बंगाल विधानससभा चुनाव 2026 में बीजेपी 203 विधानसभा सीटों से आगे रही. टीएमसी 84 सिटों पर सिमट कर रह गई. बता दें कि चुनावी कार्यक्रम की घोषणा 15 मार्च को हुई थी. यहां 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में मतदान संपन्न हुआ. चुनाव परिणाम 4 मई 2026 को आया.
पहले फेज यानी 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे फेज, 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोटिंग हुई थी. दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए सभी 285 मतदान केंद्रों पर फिर से वोटिंग कराने का आदेश दिया है. यह 21 मई 2026 को दोबारा मतदान कराया जाएगा. इस क्षेत्र के वोटों की गिनती 24 मई को होगी.
पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु, और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभाओं का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को, केरल का 23 मई को, पुडुचेरी का 15 जून को, तमिलनाडु का 10 मई को और पश्चिम बंगाल का 7 मई को समाप्त हो रहा है. इसलिए इन सभी जगहों पर समय पर नई सरकार चुनने के लिए विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए.
मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी जहां लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं भाजपा, वाम दल और कांग्रेस भी नए गठबंधनों और रणनीतियों के साथ मैदान में उतरे थे.
बात करें 2021 के विधानसभा चुनाव कि तो उस चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद से राज्य की राजनीति में कई बदलाव हुए हैं- भाजपा में अंदरूनी खींचतान, विपक्षी दलों के गठजोड़ की कोशिशें और टीएमसी के भीतर भी कुछ असंतोष के स्वर सुनाई दिए.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि इस कोलकाता में कोई मुगल-पठान नाम नहीं रहेगा. एक सड़क, तीन किरदार... और इतिहास की ऐसी बहस, जिसमें 1946 के दंगे, विभाजन की त्रासदी और आज की राजनीति सब एक साथ आ खड़े हुए हैं. कोलकाता की सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल पाठा के नाम पर किए जाने के फैसले ने एक बार फिर तीन नामों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. ये नाम हैं- हसन सुहरावर्दी, हुसैन शहीद सुहरावर्दी और गोपाल पाठा.और पढ़ेंविवाद की शुरुआत इस सवाल से हुई कि आखिर जिस सड़क का नाम सुहरावर्दी एवेन्यू था, वह किस सुहरावर्दी के नाम पर थी?
पश्चिम बंगाल की सियासत एक समय ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द सिमटी रही है, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही उनकी पकड़ ढीली पड़ती जा रही. ममता बनर्जी के हाथ से उनके दो-तिहाई विधायक और सांसद निकल गए हैं. ऐसे स्थिति में बागी गुट की अगुवाई कर रहे ऋतब्रत बनर्जी का पलड़ा भारी हो रहा है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. तृणमूल कांग्रेस के भीतर बगावत अब खुले संघर्ष में बदलती नजर आ रही है. बागी गुट ने कोलकाता में बैठक कर नया संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है और ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया है. वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को नया अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की गई है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी गुट अब खुद को असली TMC बताने की तैयारी में है.
जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और जालसाजी के आरोपों में घिरे तृणमूल कांग्रेस के पार्षद सुशांत घोष को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. कोलकाता पुलिस की STF और ओडिशा पुलिस के संयुक्त अभियान में उन्हें पुरी से पकड़ा गया. आरोप है कि उन्होंने करोड़ों रुपये की उगाही की है.
बंगाल की राजनीति में एक तस्वीर ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. TMC विधायक फिरहाद हकीम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पहले KMC कार्यक्रम में मंच साझा करते नजर आए. खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उनके खिलाफ हेट स्पीच मामले में केस दर्ज कराया गया है.
बंगाल के चर्चित म्युनिसिपल भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है. TMC विधायक मदन मित्रा से जुड़े सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई है. जांच एजेंसी को शक है कि भर्ती के बदले रिश्वत लेकर बड़ी संख्या में अवैध नियुक्तियां कराई गई थीं.
बंगाल की राजनीति में सियासी हलचल तेज है. बहरामपुर में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 635 करोड़ रुपए के भुगतान और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने TMC सांसदों के भाजपा में जाने की अटकलों और हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपनी बेबाक राय रखी है.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद Shatrughan Sinha ने पार्टी के कथित बागी खेमे से अपने जुड़ाव की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, न किसी बागी नेता ने उनसे संपर्क किया है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बागी नेता Kakoli Ghosh ने दावा किया है कि उनके साथ 20 सांसद हैं और उनका गुट NDA के साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि असली टीएमसी कौन है, इसका फैसला चुनाव आयोग करेगा। काकोली घोष ने स्पष्ट किया कि यह बगावत चुनाव नतीजों के बाद नहीं, बल्कि पिछले दो वर्षों से चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है।
जिस ममता बनर्जी ने सड़क से संसद तक नेताओं को पहुंचाया.जिन चेहरों को टिकट दिया... पहचान दी... सांसद बनाया..आज वही चेहरे ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का झंडा उठा रहे हैं।और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि टीएमसी में सवाल विपक्ष नहीं पूछ रहा...सवाल पार्टी के अपने सांसद और नेता पूछ रहे हैं। क्या पश्चिम बंगाल में टीएमसी सिर्फ सत्ता ही नहीं हारी.बल्कि अपना संगठन भी खो रही है?
ममता बनर्जी की पार्टी में कथित तौर पर असंतोष बढ़ने की चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार, 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिनमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के 12 साल पूरे हो गए हैं. इन 12 सालों के दौरान पीएम मोदी ने कई बड़े और कड़े फैसले लिए, जिसने देश की दशा और दिशा ही नहीं बदली बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए भी आधारशिला रखा दी है.
भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. NDA कॉन्क्लेव के दौरान प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मशहूर झालमुड़ी का स्वाद लिया और साथी नेताओं के साथ इसे साझा भी किया. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
भांगड़ ब्लास्ट केस में NIA को बड़ी कामयाबी मिली है. एजेंसी ने मुख्य आरोपी और पूर्व TMC विधायक शौकत मोल्ला को गिरफ्तार कर लिया है. NIA का दावा है कि छापेमारी के दौरान फरार हुए शौकत मामले के प्रमुख साजिशकर्ता हैं. एजेंसी को शक है कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे थे.
सुरेंद्रनाथ कॉलेज में बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष से नकदी, एसी बेडरूम, शराब की बोतलें और रिवॉल्वर मिलने के दावों ने पूरे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और शैक्षणिक बहस छेड़ दी है। आखिर कॉलेज कैंपस में क्या हो रहा था? क्या यह सिर्फ एक कॉलेज की कहानी है या शिक्षा संस्थानों में गहरे बैठे किसी बड़े सिस्टम की झलक? इस वीडियो में जानिए पूरे मामले की टाइमलाइन, आरोप, राजनीतिक विवाद और इससे जुड़े बड़े सवाल।
ममता बनर्जी ने शायद सोचा होगा कि दो विधायकों को पार्टी से निकालकर बगावत की आवाज दब जाएगी। लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा। जिन दो नेताओं को टीएमसी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, वही अब बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गए हैं। कहा जा रहा है कि इन दोनों नेताओं के समर्थन में टीएमसी के कई विधायक खड़े हो गए हैं और यही वजह है कि पार्टी के भीतर सियासी भूचाल की चर्चा तेज हो गई है। ये दो नाम हैं—ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा।
पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर नेता प्रतिपक्ष के मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज है. विधायकों के एक समूह की ओर से अलग राय सामने आने के बाद पार्टी की अंदरूनी स्थिति चर्चा में है. फिलहाल, पार्टी नेतृत्व की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे के घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों की निगाहें बनी हुई हैं
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अब तक के सबसे बड़े अंदरूनी संकट से घिर गई है. निलंबित प्रवक्ता रिजू दत्ता के 50 विधायकों के बगावत और चुनाव चिह्न पर दावे के सनसनीखेज खुलासे ने ममता बनर्जी के तीन दशक पुराने साम्राज्य की नींव हिला दी है. कोलकाता के एक होटल में हुई गुप्त बैठक में करीब 60 विधायक मौजूद रहे.
पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी फिर सड़क की राजनीति के जरिए TMC को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हैं. पार्टी के सामने संगठन और जनाधार बचाने की चुनौती है. हालांकि, टीएमसी के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने, कार्यकर्ताओं का भरोसा कायम रखने और बदलते राजनीतिक माहौल में अपनी पकड़ मजबूत करने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.