उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले ब्राह्मण वोट को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा में जुबानी जंग छिड़ गई है. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी बीच ब्राह्मण वोट को लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है.
हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि PDA में पंडित भी शामिल हैं. उनके इस बयान के बाद बीजेपी ने उन पर निशाना साधा. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि वह अब ब्राह्मण समाज का हितैषी होने का दिखावा कर रहे हैं.
ब्रजेश पाठक ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए कहा, "किसी समाज का विकास सिर्फ एक परिवार को सत्ता में लाने से नहीं होता. इसके लिए हर वर्ग को समान अवसर, न्याय और सम्मान मिलना जरूरी है."
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ब्रजेश पाठक के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय भी मैदान में उतर आए. उन्होंने पलटवार करते हुए सवाल किया कि जब अखिलेश यादव ब्राह्मणों के बारे में कुछ बोलते हैं या उनके लिए कुछ अच्छा करते हैं, तो आपको(ब्रजेश पाठक) तकलीफ क्यों होती है?
संतोष पाण्डेय का कहना है कि अखिलेश यादव पर आरोप लगाकर उपमुख्यमंत्री अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते. उन्होंने आरोप लगाया कि ब्राह्मण समाज उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से उम्मीद लगाए है लेकिन वे सिर्फ बयानबाजी करके समाज को उलझाने का काम कर रहे हैं.
सपा नेता संतोष पाण्डेय ने शंकराचार्य, विजय मिश्रा, खुशी दुबे, डॉक्टर घनश्याम त्रिपाठी और कबीर तिवारी समेत कई मुद्दों को लेकर उपमुख्यमंत्री से सवाल किया है. दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह बहस अब ब्राह्मण राजनीति और जवाबदेही के मुद्दे पर सियासी टकराव में बदलती नजर आ रही है.
चुनाव से पहले, दोनों ही दल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. दोनों ही ओर से एक दूसरे पर वार-पलटवार होता नजर आ रहा है.