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धर्मेंद्र कश्यप का सपा में जाना तय, कौशल किशोर नाराज, क्या पासी-कश्यप वोटबैंक BJP से छिटकेगा?

यूपी में राज्यसभा चुनाव के बाद बीजेपी के भीतर असंतोष गहराता दिख रहा है. पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के सपा में जाने के संकेतों और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार की खुलकर जताई नाराजगी ने बीजेपी के पासी और कश्यप वोटबैंक समीकरण पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है.

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धर्मेंद्र कश्यप और कौशल किशौर (Photo-ITG)
धर्मेंद्र कश्यप और कौशल किशौर (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश में बीजेपी जिस सामाजिक गठजोड़ के सहारे चुनाव दर चुनाव जीतती रही है, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उसी में सेंध लगाकर पूरा समीकरण बदल दिया था. सपा अब इसी रणनीति के दम पर 2027 की चुनावी जंग जीतने की कवायद में है, जिसके चलते बीजेपी यूपी में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समीकरण को नए सिरे से साधने में जुटी है.

राज्यसभा चुनाव के टिकट बंटवारे में बीजेपी ने अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने का दांव चला, जिसके तहत 3 ओबीसी, 2 दलित, 2 ब्राह्मण और 1 ठाकुर समुदाय से प्रत्याशी उतारे. लेकिन अब इससे बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग में दरार पड़ती दिख रही है.

बीजेपी के राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची सामने आते ही पार्टी के भीतर उबला असंतोष अब सतह पर आ गया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के 'टाटा-बाय बाय' वाले सोशल मीडिया पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी के लिए पासी और कश्यप वोटबैंक का समीकरण कहीं गड़बड़ा न जाए.

धर्मेंद्र कश्यप बीजेपी छोड़ सपा का थामेंगे दामन?

राज्यसभा चुनाव के साइड इफेक्ट के तौर पर बीजेपी के दो बड़े चेहरे नाराज बताए जा रहे हैं. रुहेलखंड में ओबीसी वर्ग का चेहरा और आंवला सीट से दो बार के बीजेपी सांसद धर्मेंद्र कश्यप पार्टी छोड़ने के संकेत दे रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर 'टाटा बाय-बाय' लिखा और देर रात अपने बायो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर भी हटा ली.

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धर्मेंद्र कश्यप के सब्र का बांध टूटता नजर आ रहा है. पार्टी द्वारा अन्य चेहरों को राज्यसभा भेजे जाने से उन्हें लगता है कि चुनाव में हार के बाद से पार्टी ने उनके साथ न्याय नहीं किया. धर्मेंद्र कश्यप पहले भी समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं, इसलिए इसे उनकी घर वापसी के तौर पर देखा जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र कश्यप ने बीजेपी छोड़ने का मन बना लिया है और वह 18 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं. इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है और उनके सपा में जाने की स्क्रिप्ट भ ीलिख दी गई है, जिसके बाद उन्होंने अपने सियासी तेवर का इजहार किया है. 

कौशल किशोर भी बीजेपी से नाराज

अवध क्षेत्र के प्रमुख दलित नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर भी पार्टी के फैसलों से असहज नजर आ रहे हैं. राज्यसभा प्रत्याशी न बनाए जाने के बाद उनके परिवार का असंतोष सामने आया है. कौशल किशोर के बेटे, जो भाजपा अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि जहां माता-पिता का सम्मान न हो, वहां नहीं रहना चाहिए.

धर्मेंद्र कश्यप का समाजवादी पार्टी में जाना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि कौशल किशोर को लेकर अभी स्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. हालांकि, उन्होंने अपने सियासी तेवर जरूर दिखा दिए हैं. सपा नेतृत्व कौशल किशोर को अपने साथ जोड़ने की रणनीति बना रहा है, लेकिन फिलहाल उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

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बीजेपी के कश्यप वोटबैंक पर खतरा

बरेली-आंवला क्षेत्र से पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप को राज्यसभा भेजे जाने की प्रबल चर्चा थी. लेकिन सूची में नाम न होने पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की और सपा में शामिल होने की तैयारी कर ली, जिससे बीजेपी के लिए सियासी चुनौती खड़ी हो सकती है.

रुहेलखंड से लेकर अवध और पूर्वांचल तक कश्यप, निषाद, बिंद और मल्लाह समुदायों की आबादी काफी अहम है. अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड के जवाब में बीजेपी धर्मेंद्र कश्यप जैसे चेहरों को आगे रखकर इस वोटबैंक को साधने की कोशिश में थी. ऐसे में धर्मेंद्र कश्यप का सपा में जाना बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

धर्मेंद्र कश्यप की अनदेखी से अति-पिछड़े समाज में यह संदेश जाने का खतरा है कि पार्टी केवल चुनाव के समय उनका इस्तेमाल करती है. यदि कश्यप वोटबैंक में नाराजगी बढ़ती है, तो पश्चिमी और मध्य यूपी की कई सीटों पर बीजेपी के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं.

पासी समाज में नाराजगी से बिगड़ेगा समीकरण?

पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बेटे विकास किशोर ने बीजेपी की राज्यसभा सूची जारी होते ही खुलकर अपना असंतोष जाहिर किया. कौशल किशोर पासी समाज के प्रमुख नेता माने जाते हैं और दलित-ओबीसी गोलबंदी में उनकी सक्रिय भूमिका रही है.

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जाटव समुदाय के बाद उत्तर प्रदेश में पासी समाज दलित आबादी का दूसरा सबसे बड़ा (लगभग 16%) वर्ग है. अवध और बुंदेलखंड के इलाकों में इस वोटबैंक का सीधा प्रभाव है. 2024 के चुनाव में सपा ने अवध क्षेत्र में पासी उम्मीदवारों को उतारकर बीजेपी के इस मजबूत किले में सेंध लगाई थी.

अब कौशल किशोर के परिवार की नाराजगी और पासी समाज के अन्य नेताओं की उपेक्षा से यह वोटबैंक बीजेपी से छिटककर सपा या बसपा की तरफ रुख कर सकता है. सपा और कांग्रेस दोनों ही पासी समुदाय को साधने की हरसंभव कोशिश में जुटी हैं.

बीजेपी के लिए क्यों खड़ी हुई बड़ी चुनौती?

बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने कोर ओबीसी और दलित वोटबैंक को मजबूत करने में लगी थी. लेकिन धर्मेंद्र कश्यप और कौशल किशोर जैसे स्थापित चेहरों के असंतोष ने विपक्ष को एक नया राजनीतिक हथियार दे दिया है.

राज्यसभा की सीटें भले ही बीजेपी और उसके सहयोगी दल आसानी से जीत जाएं, लेकिन टिकट बंटवारे से उपजा यह अंदरूनी असंतोष पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग की बुनियाद को प्रभावित कर रहा है. यदि पार्टी नेतृत्व ने इन कद्दावर नेताओं की नाराजगी को जल्द शांत नहीं किया, तो पासी और कश्यप वोटबैंक का यह बिखराव आगामी चुनावों में बीजेपी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

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