राजनीति में समय और फैसले का क्रोनोलॉजी समझना बेहद जरूरी होता है. साल 2022 में जब केंद्र सरकार 'अग्निपथ योजना' लेकर आई थी, तब से ही विपक्ष इसे एक बड़ा सियासी और चुनावी मुद्दा बनाता आया है. हालिया चुनावों में भी युवाओं की नाराजगी को भुनाने के लिए 'अग्निवीर' शब्द को बार-बार कटघरे में खड़ा किया गया. लेकिन, अब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मुद्दे की पूरी हवा निकालते हुए एक ऐसा 'मास्टरस्ट्रोक' खेला है, जिसने विपक्ष के सबसे बड़े राजनीतिक हथियार को ही कुंद कर दिया है.
योगी सरकार ने राज्य के पुलिस, पीएसी, जेल, वन और परिवहन विभागों में पूर्व अग्निवीरों को 20% क्षैतिज आरक्षण देने के साथ-साथ 'बिना किसी परीक्षा' के सीधी भर्ती का ऐतिहासिक ऐलान किया है. राजनीति के अनुभवी कह रहे हैं कि यूपी का यह फैसला केवल एक नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले खेला गया सबसे बड़ा सियासी दांव है. आइए जानते हैं कैसे
यूपी मॉडल क्यों है सबसे आगे?
अगर हम देश के बाकी राज्यों की तुलना करें, तो यूपी का यह 'सुरक्षा कवच' सबसे ज्यादा मजबूत और व्यापक नजर आता है. हरियाणा, गुजरात और दिल्ली ने भी पुलिस व सुरक्षा सेवाओं में 20% तक आरक्षण की बात जरूर कही है, लेकिन वहां अभ्यर्थियों को राज्य की मानक चयन प्रक्रिया और परीक्षाओं से गुजरना होगा. वहीं मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ ने केवल 10% कोटे का प्रावधान किया है.
वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने न केवल 20% का सबसे बड़ा कोटा तय किया, बल्कि अग्निवीरों के लिए लिखित परीक्षा से पूरी तरह छूट का प्रावधान कर दिया. यानी फौज की अनुशासित ट्रेनिंग पूरी करके लौटने वाले युवा को यूपी में बिना किसी किचकिच के सीधे सरकारी नौकरी मिलेगी.
हजारों युवाओं के घर जलेगा नौकरी का दीया
उत्तर प्रदेश का पुलिस महकमा देश का सबसे बड़ा पुलिस बल है. जब यूपी में 35,000 या 60,000 सिपाहियों की बंपर भर्ती निकलती है, तो 20% आरक्षण का सीधा मतलब होता है, एक झटके में 7,000 से 12,000 अग्निवीरों की पक्की सरकारी नौकरी!
इतनी बड़ी संख्या में नौकरियां देने का मद्दा देश के किसी अन्य छोटे राज्य के पास नहीं है. यही वजह है कि यूपी का यह फैसला सीधे तौर पर लाखों ग्रामीण परिवारों के चूल्हे से जुड़ा हुआ है.
'2027 का अग्निपथ' और विपक्ष के नैरेटिव की काट?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में 'अग्निवीर योजना' के कारण पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल और बुंदेलखंड के फौजी बहुल इलाकों में युवाओं के बीच जो असमंजस फैला था, यह फैसला उस घाव पर सबसे बड़ा मरहम है. इससे पहले विपक्ष का नैरेटिव था कि 4 साल बाद अग्निवीर बेरोजगार होकर घर लौटेगा.
इसी नैरेटिव पर ही योगी सरकार का अनकहा जवाब है कि साल बाद देश सेवा करके आओ, यूपी सरकार बिना परीक्षा के 20% कोटा देकर तुम्हें खाकी वर्दी और अफसर की कुर्सी सौंपेगी. बता दें कि गोंडा की रैली से सीएम योगी ने जिस तरह एक तरफ 'माफियाओं को जेल या जहन्नुम' भेजने की बात कही और दूसरी तरफ अग्निवीरों, पुलिस कांस्टेबलों, सब-इंस्पेक्टरों और होमगार्डों की बंपर भर्तियों का ब्यौरा रखा, वो साफ दर्शाता है कि बीजेपी अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ 'रोजगार गारंटी' के ट्रैक पर मजबूती से आगे बढ़ रही है.