मथुरा में आयोजित ‘पंचायत आजतक’ के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सपा नेताओं की हालिया बयानबाजी का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ दुनिया शिक्षा, स्किलिंग और डीप टेक जैसी तकनीकों पर चर्चा कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने ही नेताओं के लिए 'कुत्ता' और 'बिल्ली' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रही है.
आरएलडी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर दिया गया अखिलेश यादव का 'चवन्नी से रुपया बना दिया' वाला बयान को सीएम योगी ने लोकतंत्र का उपहास बताया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सपा मुखिया की भाषा उनकी मानसिकता को दर्शाती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को जनार्दन कहा जाता है, लेकिन सपा अपने ही नेताओं को कुत्ता-बिल्ली बनाकर किस तरह लोकतंत्र का मजाक उड़ा रही है, यह समझा जा सकता है. उन्होंने सपा मुखिया की ओर से एक केंद्रीय मंत्री के बारे में की गई कथित टिप्पणियों का भी जिक्र किया और कहा कि इस तरह की हल्की भाषा 2017 से पहले प्रदेश में रही मानसिकता को प्रदर्शित करती है.
अखिलेश के चवन्नी वाले बयान पर योगी का पलटवार
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सहयोगी आरएलडी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर दिया गया अखिलेश यादव का चवन्नी से रुपया बना दिया वाले बयान पर योगी ने पलटवार किया. एनडीए गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस बयान को न सिर्फ जयंत चौधरी, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विरासत और पूरे किसान समाज का अपमान करार दिया है.
'शहीदों को सम्मान नहीं दे पाई सपा'
योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर इतिहास के शहीदों और बलिदानियों को सम्मान न देने का भी आरोप लगाया. उन्होंने गोरखपुर की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार में शिक्षा मंत्री एक कार्यक्रम में पहुंचे थे. यह कार्यक्रम क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की बलिदानी भूमि गोरखपुर में उनके नाम पर पार्क के उद्घाटन से जुड़ा था.
योगी ने दावा किया कि कार्यक्रम में तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का नाम लेने के बजाय उन्हें ‘बिस्मिल्लाह साहब’ कह दिया. जब किसी व्यक्ति ने मंच से उन्हें बताया कि यह क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल हैं, न कि शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, तो कथित तौर पर मंत्री ने इसे राजनीतिक चश्मे से देखा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान के नाम में अंतर तक महसूस नहीं कर पाए, वे उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा को कहां ले गए होंगे, इसकी सहज कल्पना की जा सकती है.
‘नकल करना जन्मसिद्ध अधिकार बना दिया था’
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में नकल और नौकरियों में सेंध जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि उस दौर में योग्यता से ज्यादा पर्ची को महत्व दिया जाता था और विवेक से ज्यादा फतवे को तरजीह मिलती थी.
उन्होंने कहा कि भारत की विरासत के बजाय एक परिवार की चाटुकारिता को महत्व दिया गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अब उस दौर से बाहर निकल चुका है और पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ जैसी स्थिति नहीं है.