'मैं 30 साल का हूं और अखिलेश जी 50 साल के, तो 50-52 साल के बुजुर्ग को अंकल ही तो बोलूंगा.' यह बात बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने सोमवार को हाथरस की रैली में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर कही. आकाश आनंद ने अखिलेश यादव के साथ-साथ राहुल गांधी को भी 'अंकल' कहकर संबोधित किया.
सवा दो साल के लंबे अंतराल के बाद आकाश आनंद यूपी के सियासी मैदान में उतरे, लेकिन वे पहले की तरह ही आक्रामक अंदाज में हमले करते नजर आए. हालांकि वे लिखी हुई स्क्रिप्ट से भाषण दे रहे थे, लेकिन उन्होंने सीधे यूपी की राजनीति पर तीखे बोल बोलने शुरू कर दिए.
'जेन-ज़ी' (Gen-Z) के आंदोलन के बहाने आकाश ने खुद को युवाओं का चेहरा दर्शाने की कोशिश की. इसके लिए उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर 'अंकल' कहकर तंज कसा तथा उन पर बहुजन समाज की अनदेखी करने का आरोप लगाया. हालांकि, आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को लेकर वे पूरी तरह से सतर्क नजर आए.
Gen-Z के कितने करीब आकाश आनंद?
देश ने हाल ही में युवाओं का एक बड़ा आंदोलन देखा, जब जंतर-मंतर पर 'पेपर लीक' के खिलाफ हुए प्रदर्शन में Gen-Z (युवा पीढ़ी) ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। यह Gen-Z की ताकत ही थी, जिसके सामने आखिरकार सत्ता को नतमस्तक होना पड़ा. मायावती ने भी शायद इस आंदोलन के सियासी संदेश को भांप लिया है. उल्लेखनीय है कि युवाओं के इस आंदोलन को शुरुआत में चंद्रशेखर आजाद ने भी अपना समर्थन दिया था.
अब जब Gen-Z का यह आंदोलन सफल हो गया, तब बसपा को भी अहसास हुआ कि शुरुआती दौर में भले ही पार्टी से चूक हुई हो, लेकिन आगे ऐसा नहीं होना चाहिए. इस समय जो भी नेता खुद को Gen-Z का रहनुमा साबित करने में जुटे हैं, उनमें से कोई भी इस पीढ़ी के हमउम्र नहीं है, चाहे वे राहुल गांधी हों या अखिलेश यादव, ये सभी 50 वर्ष की उम्र पार कर चुके नेता हैं।
ऐसे में बसपा के पास आकाश आनंद के रूप में एक ऐसा चेहरा है, जो उम्र के लिहाज से Gen-Z के काफी करीब है, आकाश आनंद की उम्र 31 साल है. ऐसे में सपा युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहती है, तो उसकी राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.
युवाओं को साधते नजर आए आकाश
आकाश आनंद ने सोमवार को पहली बार छात्र प्रोटेस्ट को लेकर भी समर्थन दिया जबकि अमूमन बीएसपी किसी भी सड़क पर होने वाले आंदोलन का समर्थन नहीं करती, लेकिन आदंलोन से दूर रही थी. आंदोलन Gen-z का है का है, और इसने लोगों के बीच अपनी जगह बना ली है छात्र और युवा बड़ी तादाद में इससे जुड़े हैं.
चंद्रशेखर आजाद के साथ आए युवाओं ने इस आंदोलन को सफल बनाने में अपनी ताकत लगाई थी और दलित वर्ग खासकर इस आंदोलन से जुड़ा था ऐसे में आकाश आनंद को भी यहां अपने लिए संभावना दिख रही है उनकी इस रिलॉन्चिंग में उनका Gen z होना तो अहम है.
चंद्रशेखर आजाद को लेकर अलर्ट आकाश
आकाश आनंद ने योगी सरकार से लेकर अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर जमकर हमले किए, लेकिन आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पर चुप्पी साधे रखी. हाथरस की रैली के दौरान आकाश आनंद द्वारा चंद्रशेखर आजाद पर कुछ न बोलने के पीछे बसपा की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति मानी जाती है.
आकाश आनंद की नजर दलितों के उसे युवा वोटर पर भी है, जो चंद्रशेखर के साथ बड़ी तादाद में खड़ा दिखाई देता है, आकाश ने जब खुद को 30 साल का बता रहे और चंद्रशेखर को लेकर पूरी चुप्पी साध ली. यह साफ हो गया कि खुद को जेन-जी बताने का फार्मूला दरअसल दलित युवाओं को चंद्रशेखर के पास जाने से रोकना और बसपा से वापस जोड़ने का मायावती का प्लान है.
राजनीतिक रैलियों में किसी नेता पर सीधा प्रहार करने से उस नेता को मीडिया में कवरेज और महत्व मिलता है. बीएसपी की यह रणनीति रही है कि वह बहुजन राजनीति के क्षेत्र में उभर रहे अन्य चेहरों पर सीधी टिप्पणी करने से बचती है, ताकि उन्हें बीएसपी के समकक्ष स्थान न मिले.
चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला करने से दलित और युवा मतदाताओं के बीच एक नकारात्मक संदेश जा सकता था. किसी अन्य बहुजन नेता पर कटाक्ष करने के बजाय आकाश आनंद ने अपने समर्थकों को एकजुट रखने और पार्टी के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी. आकाश आनंद ने पार्टी की इसी औपचारिक नीति का पालन करते हुए केवल अपने सांगठनिक संदेश और चुनावी वादों पर ही ध्यान केंद्रित रखा.
आकाश आनंद को मायावती की मिली शह
आकाश आनंद यू तो बेहद युवा है, अच्छा जोशीला भाषण देते हैं. वो मुद्दों को सलीके से रखने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है की क्या आकाश आनंद को युवाओं से जुड़ने, उनके मुद्दे उठाने, और युवाओं को लेकर आंदोलन करने की कोई इजाजत मायावती दगी.
मायावती उन्हें फ्री हैंड देती है तब आकाश सियासत में अपनी जगह बना सकते हैं नहीं तो एक दो रैली कर देने मात्र से युवाओं के साथ उनका जड़ाव नहीं हो पाएगा. हालांकि, मायावती ने मंगलवार को प्रेस कॉफ्रेंस करके जिस तरह से युवाओं को मुद्दों की बात रखी है और Gen-Z आंदोलन का जिक्र उसके मायने साफ है कि आकाश आनंद ने मायावती के मर्जी के मुताबिक ही चल रहे हैं.