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60 लाख रुपये में करता था डील, री-NEET में सॉल्वर गैंग का खुलासा, MBBS के कई छात्र शामिल   

री-नीट परीक्षा पूरी तो हो गई है लेकिन इसमें फर्जीवाड़े की खबरें तेजी से फैल रही हैं. इस मामले में एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है. जांच में खुलासा हुआ है कि सॉल्वर गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स के मेधावी छात्रों को परीक्षा में बैठाया. इस पूरे खेल में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से जुड़ी एजेंसियों के कुछ कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. मामले का खुलासा लखीसराय में गैंग के पकड़े जाने और एक गुप्त ईमेल मिलने के बाद हुआ है. 

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री-नीट में सॉल्वर गैंग का हुआ खुलासा.
री-नीट में सॉल्वर गैंग का हुआ खुलासा.

लखीसराय में सॉल्वर गैंग के पकड़े जाने के बाद नीट परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि गैंग ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया में सेंध लगाकर असली अभ्यर्थियों की जगह स्कॉलर्स को परीक्षा केंद्रों पर बैठाने की व्यवस्था की थी. जानकारी के मुताबिक, एनटीए ने री-नीट परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन का ठेका EDCIL को दिया था. EDCIL ने यह काम आगे इनोवेटिव व्यू कंपनी को सौंप दिया.

जांच में यह भी सामने आया है कि झारखंड और तमिलनाडु सरकार ने साल 2025 में और उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में बायोमेट्रिक सत्यापन संबंधी कार्यों के लिए इनोवेटिव व्यू कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था. अब जांच एजेंसियां कंपनी के नेटवर्क और उसकी भूमिका की जांच कर रही हैं. 

सूत्रों के अनुसार, 14 जून को एडमिट कार्ड जारी होने के बाद माफियाओं ने इनोवेटिव व्यू कंपनी के कुछ सुपरवाइजरों को अपने प्रभाव में ले लिया. इसके बाद असली परीक्षार्थियों का बायोमेट्रिक परीक्षा केंद्र से 100 से 150 मीटर दूर खड़ी गाड़ियों में लिया गया, जबकि केंद्र के अंदर प्रवेश करने वाले स्कॉलर्स का डमी बायोमेट्रिक दर्ज किया गया. पहचान छिपाने के लिए बायोमेट्रिक लेने के बाद अंगूठे के निशानों को भी बिगाड़ा गया. 

बायोमेट्रिक कंपनी की आई सफाई

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बायोमेट्रिक कंपनी Innovatiview ने कहा, "भारत में किसी भी केंद्रीय सरकारी मंत्रालय, राज्य सरकार, PSU, परीक्षा निकाय या सरकारी एजेंसी द्वारा ब्लैकलिस्ट, डिबार या बैन नहीं किया गया है. तमिलनाडु सरकार द्वारा Innovatiview को ब्लैकलिस्ट किए जाने के फैसले को मद्रास हाईकोर्ट ने और झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा डिबार करने के आदेश को अमान्य और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ मानते हुए रद्द कर दिया था."

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कंपनी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में Innovatiview की ब्लैकलिस्ट या डिबार करने की कार्रवाई कभी नहीं हुई है. Innovatiview कंपनी ने देश भर में कई सरकारी संस्थाओं को परीक्षा-सुरक्षा सेवाएं देना जारी रखा है और कंपनी के मुताबिक ये कॉन्ट्रैक्ट तय, कॉम्पिटिटिव प्रोक्योरमेंट प्रोसेस के जरिए मिले हैं. Innovatiview ने अपने बयान में ये भी कहा है कि उनकी तरफ से जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया गया है.

ईमेल मिलने के बाद हुआ खुलासा 

21 जून को दोपहर 12 बजे बिहार पुलिस मुख्यालय और एनटीए को एक अहम गुप्त ईमेल प्राप्त हुआ. इसमें सूचना दी गई कि केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर मधु प्रिया की जगह बीएचयू की छात्रा पूनम परीक्षा दे रही है. इसी सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ी और पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ. जांच में सॉल्वर गैंग का मुख्य सेटर पीएमसीएच का एक मेडिकल छात्र निकला. पकड़े जाने पर उसने पुलिस को अपना नाम मयंक कश्यप बताया लेकिन जांच में उसका वास्तविक नाम अश्विनी कुमार सामने आया. अश्विनी कुमार हाजीपुर का निवासी है और पीएमसीएच के 2022 बैच का तृतीय वर्ष का एमबीबीएस छात्र बताया गया हैय उसने मयंक कश्यप के नाम से सिम कार्ड लिया था. 

जांच एजेंसियों के अनुसार, अश्विनी कुमार बायोमेट्रिक कर्मी बनकर परीक्षा केंद्र में दाखिल हुआ था और केंद्र के अंदर बैठकर स्कॉलर्स की मदद कर रहा था. बताया गया है कि नीट परीक्षा के दिन वह लखीसराय के परीक्षा केंद्र में मौजूद था, जबकि पीएमसीएच के सर्जरी विभाग की विशेष कक्षा में उसकी उपस्थिति दर्ज पाई गई. पीएमसीएच प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि उसकी उपस्थिति किसने दर्ज की. 

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परीक्षा पास करने के लिए करता था 60 लाख की डील

जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग का सरगना एक अभ्यर्थी को परीक्षा में पास कराने के लिए 60 लाख रुपये तक की डील करता था. इस रकम में से मुख्य सेटर अश्विनी कुमार को 25 लाख रुपये मिलने थे. गुप्त ईमेल में जिस स्कॉलर पूनम कुमारी का उल्लेख किया गया था, वह झारखंड के गिरिडीह की रहने वाली है. पूनम ने साल 2021 में जैक बोर्ड की साइंस डिपार्टमेंट परीक्षा में झारखंड टॉप किया था और वर्तमान में बीएचयू में बीएससी नर्सिंग की छात्रा है. 

जांच में सामने आए अभ्यर्थी और उनकी जगह परीक्षा देने वाले स्कॉलर

  • संजीत कुमार की जगह मंतोष कुमार, जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस चौथे साल का छात्र. 
  • प्रभात अमन की जगह विवेक कुमार, एएनएमएमसीएच गया में चौथे साल का छात्र. 
  • शुभम वर्मा की जगह हिमांशु कुमार, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना (मध्य प्रदेश)में प्रथम वर्ष का छात्र.
  • ईशान सिंह की जगह सौरभ जी झा, एम्स रायबरेली में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र.
  • मधु प्रिया की जगह पूनम कुमारी, बीएचयू में बीएससी नर्सिंग की छात्रा. 
  • अक्षत दुबे की जगह अमन अग्रवाल, यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस, दिल्ली (शहादरा) में एमबीबीएस इंटर्न. 
  • निरंजन की जगह रौशन कुमार, एनएमसीएच पटना में बी.फार्मा चौथे साल का छात्र. 
  • नंदनी राज की जगह चंचल कुमारी,गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज, उड़ीसा में बीएएमएस की छात्रा.
  • राहुल कुमार प्रिंस की जगह जितेंद्र कुमार, एनएमसीएच पटना का छात्र. 
 
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