जब घर का बच्चा पहली जॉब शुरू करता है, तो फैमिली को लगता है कि अब उसकी लाइफ सही रास्ते पर चल पड़ी है. लेकिन कुछ महीनों बाद वही बच्चा कहने लगे कि उसे जॉब छोड़नी है, तो घर में सवाल उठने लगते हैं. कोई कहता है कि आजकल के बच्चों में पेशेंस यानी सब्र नहीं है, तो कोई इसे जिम्मेदारी से भागना मानता है. लेकिन क्या नौकरी छोड़ने की इच्छा का मतलब हमेशा काम से भागना होता है?
जेन जी यानी आज की युवा पीढ़ी के लिए नौकरी करना सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं है. वे काम के साथ अपनी लाइफ, मेंटल पीस और आगे बढ़ने के मौकों को भी अहमियत देते हैं. इसलिए उनके नौकरी छोड़ने के फैसले को समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि आखिर वे ऐसा क्यों करना चाहते हैं.
1. सिर्फ सैलरी नहीं, काम में खुशी भी जरूरी
पहले कई लोगों के लिए एक अच्छी नौकरी का मतलब था वक्त पर सैलरी मिलना और लंबे टाइम तक उसी जगह काम करना. लेकिन आज कई युवा ये भी देखते हैं कि उन्हें काम में खुशी मिल रही है या नहीं.
अगर किसी को हर दिन काम पर जाने से स्ट्रेस हो, काम में कोई इंटरेस्ट न रहे या उसे लगे कि वह कुछ नया नहीं सीख रहा, तो वो दूसरी जॉब के बारे में सोच सकता है. इसका मतलब ये नहीं कि वो मेहनत नहीं करना चाहता. हो सकता है कि वो अपने लिए बेहतर काम ढूंढ रहा हो.
2. ऑफिस के स्ट्रेस को नजरअंदाज नहीं करना चाहते
लंबे टाइम तक काम करना, छुट्टी के दिन भी ऑफिस के मैसेज आना या बॉस का हर छोटी बात पर स्ट्रेस बनाना किसी के लिए भी मुश्किल हो सकता है. कई जेन जी यंगस्टर्स काम और पर्सनल लाइफ के बीच बैलेंस चाहते हैं. वे चाहते हैं कि नौकरी के साथ फैमिली, फ्रैंड्स और खुद के लिए भी टाइम मिले. अगर ऑफिस का माहौल लगातार स्ट्रेस दे रहा है, तो वे वहां से निकलने का फैसला कर सकते हैं.
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3. आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल रहा
कई बार नौकरी छोड़ने की वजह कम सैलरी ही नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने के मौकों की कमी भी होती है. अगर कोई लंबे टाइम से एक ही तरह का काम कर रहा है और उसे नई जिम्मेदारियां नहीं मिल रहीं, तो वो दूसरी जगह बेहतर चांसेज ढूंढ सकता है. आज के जेन जी अपने करियर को लेकर सवाल पूछते हैं. वे जानना चाहते हैं कि इस जॉब से उन्हें आगे क्या मिलेगा और उनकी मेहनत का फायदा कैसे होगा.
डेलॉयट की 2025 की रिपोर्ट भी बताती है कि जेन जी के लिए नौकरी में आगे बढ़ने के मौके और काम के साथ पर्सनल लाइफ का बैलेंस जरूरी हैं. इंडिया में करियर या काम का फील्ड बदलने वाले जेन जी युवाओं में 39% ने बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और इतने ही लोगों ने बेहतर करियर ग्रोथ को इसकी वजह बताया. वहीं, 28% ने बेहतर सैलरी को वजह माना. इससे पता चलता है कि युवाओं के करियर से जुड़े फैसलों के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं.
4. क्या हर बार नौकरी छोड़ना सही है?
नहीं, हर जॉब छोड़ना सही फैसला भी नहीं होता. कभी-कभी काम मुश्किल लगने पर वर्क कल्चर में घुसे नए यंगस्टर्स जल्दी हार मान सकते हैं. नई जॉब में शुरुआत में तालमेल बैठाने में टाइम लगना भी नॉर्मल है. इसलिए नौकरी छोड़ने से पहले अपनी परेशानी को समझना, बॉस से बात करना और दूसरी नौकरी के ऑप्शन खोजते रहना जरूरी है. बिना प्लानिंग के नौकरी छोड़ने से फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स दे सकती है.
जेन जी के करियर को समझना जरूरी
जॉब छोड़ने की इच्छा को तुरंत आलस या गैर-जिम्मेदारी का नाम देना सही नहीं है. ये समझना जरूरी है कि बच्चा किस वजह से परेशान है और वो आगे क्या करना चाहता है. पेरेंट्स को अपने बच्चों से खुलकर बात करना चाहिए और उनकी परेशानी सुननी चाहिए.. वहीं जेन जी जो नए-नए वर्क कल्चर का हिस्सा बने है उन्हें कोई भी कोई बड़ा फैसला लेने से पहले उसके रिजल्ट्स के बारे में सोचना चाहिए. करियर में टिके रहना जरूरी है, लेकिन ये भी जरूरी है कि वयक्ति राइट डायरेक्शन में आगे बढ़ रहा हो.