भारत ने लंबी दूरी के सुसाइड ड्रोन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. आईजी डिफेंस द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित KAL नामक लंबी दूरी के वन-वे अटैक ड्रोन ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में सफल परीक्षण पूरा कर लिया है. 20 सितंबर 2026 को हुए इस परीक्षण ने भारत की खुदा की लंबी दूरी की मानवरहित स्ट्राइक क्षमताओं के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित किया है.
यह सफलता ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में लंबी दूरी के वन-वे अटैक ड्रोन आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं. हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध में ईरानी के शाहेद-136 और रूसी गेरान-2 जैसे ड्रोनों के इस्तेमाल ने दिखाया है कि कम लागत वाले मानवरहित प्लेटफॉर्म लंबी दूरी तक हमला करने, एयर डिफेंस नेटवर्क पर दबाव बनाने और बड़े पैमाने पर हमलों को अंजाम देने में कितने प्रभावी हो सकते हैं.
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इसी तकनीक का इस्तेमाल मध्य पूर्व और लाल सागर में समुद्री लक्ष्यों के खिलाफ भी देखा गया है. इन घटनाओं ने लंबी दूरी के मानवरहित स्ट्राइक सिस्टम के भू-राजनीतिक महत्व को रेखांकित किया है. KAL को इसी उभरती श्रेणी में विकसित किया गया है.
KAL की मुख्य विशेषताएं और क्षमताएं
KAL ड्रोन की रेंज 1000 किलोमीटर तक है. यह 7 से 8 घंटे तक उड़ान भर सकता है. 50 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है. यानी वॉरहेड. इसकी अधिकतम ऊंचाई समुद्र तल से 5000 मीटर तक है. ड्रोन में मल्टी-बैंड जीएनएसएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम को जोड़ा है, जिससे यह पूरे मिशन के दौरान ऑटोनॉमस उड़ान भर सकता है.
यह सटीक निशानेबाजी के लिए डिजाइन किया गया है. बुनियादी ढांचे, रडार इंस्टॉलेशन, एयर डिफेंस सिस्टम तथा अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बना सकता है. मिशन की जरूरत और ऑपरेशनल अनुमति के अनुसार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
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पोखरण परीक्षण ने KAL के एयरफ्रेम, प्रोपल्शन, एवियोनिक्स, नेविगेशन और मिशन आर्किटेक्चर के इंटीग्रेटेड सिस्टम की पुष्टि की है. यह प्लेटफॉर्म आईजी डिफेंस के ग्रिड स्ट्राइक पोर्टफोलियो का हिस्सा है. कंपनी के ग्रिड बैटल मैनेजमेंट सिस्टम के साथ जोड़ा जा सकता है.
यह AI-पावर्ड सिस्टम प्लेटफॉर्म और युद्धक्षेत्र की जानकारी को समन्वित करने में मदद करता है. हालांकि KAL के विकास का मुख्य फोकस भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की मानवरहित स्ट्राइक क्षमता तैयार करना है.

आधुनिक युद्ध में वन-वे अटैक ड्रोन का बढ़ता महत्व
शाहेद और गेरान परिवार के ड्रोनों के विकास ने रक्षा तकनीक में एक बड़ा बदलाव दिखाया है. लंबी दूरी के ड्रोन स्ट्राइक प्लेटफॉर्म को बड़े पैमाने पर बनाने की क्षमता अब राष्ट्रीय सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण तत्व बन गई है. रूस-यूक्रेन संघर्ष के विश्लेषण से पता चलता है कि शाहेद-प्रकार के ड्रोनों का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और वे लंबी दूरी के हमलों में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
जो देश रणनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं, उन्हें ऐसे स्वदेशी सिस्टम की जरूरत है जो रेंज, पेलोड, स्वायत्त संचालन और बड़े पैमाने पर उत्पादन को जोड़ते हों. KAL इसी जरूरत का जवाब है. आईजी डिफेंस के संस्थापक और सीईओ बोधिसत्त्व संघप्रिय ने परीक्षण की सफलता पर कहा कि यह आईजी डिफेंस और भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की यात्रा के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.
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हाल के युद्धों ने दिखाया है कि लंबी दूरी के वन-वे अटैक ड्रोन अब सिर्फ विशेष क्षमता नहीं रह गए हैं. वे आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं और सटीक हमले, एयर डिफेंस तथा रणनीतिक निवारण के बारे में देशों के सोचने के तरीके को प्रभावित कर रहे हैं. KAL को लंबी रेंज, ऑटोनॉमस फ्लाइट, पेलोड क्षमता और बड़े पैमाने पर स्वदेशी उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करके विकसित किया गया है.

यह परीक्षण सिर्फ एक और ड्रोन विकसित करने की बात नहीं है. यह उस क्षेत्र में भारत की संप्रभु क्षमता बनाने की कोशिश है जो तेजी से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होता जा रहा है. आईजी डिफेंस का मानना है कि भारत को ऐसे सिस्टम को घरेलू स्तर पर डिजाइन, विकसित और निर्माण करने की क्षमता होनी चाहिए.
साथ ही ये तकनीकें मित्र देशों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें. कंपनी लंबी दूरी के मानवरहित स्ट्राइक सिस्टम, इंटरसेप्टर ड्रोन, एफपीवी कॉम्बैट ड्रोन, स्वायत्त यूएवी, काउंटर-यूएएस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, एआई-सक्षम स्वार्म तकनीक, टैक्टिकल रोबोटिक्स और लॉजिस्टिक्स ड्रोन सहित कई स्वदेशी रक्षा तकनीकों पर काम कर रही है.
पोखरण का सफल परीक्षण भारत की ओर से मानवरहित और प्रतिस्पर्धी युद्धक्षेत्र के लिए स्वदेशी रक्षा तकनीक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है. इससे देश की सैन्य क्षमता मजबूत होगी और भविष्य के युद्धों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी.