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चीन में रूसी सैनिकों की सीक्रेट मिलिट्री ट्रेनिंग, केमिकल युद्ध की भी तैयारी

रूस के रक्षा मंत्री की मंजूरी से चीन ने पिछले साल रूसी सैनिकों को सीक्रेट मिलिट्री ट्रेनिंग दिया था. रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल युद्ध की ट्रेनिंग में बड़े जनरलों की भागीदारी से यूरोप में खलबली मची है.

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग में बीजिंग में परेड का परीक्षण करते हुए. (File Photo: Reuters)
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग में बीजिंग में परेड का परीक्षण करते हुए. (File Photo: Reuters)

रूस और चीन के बीच गुप्त सैन्य सहयोग का नया खुलासा हुआ है. यूरोपीय अधिकारियों और रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों के अनुसार, पिछले साल चीन ने रूसी सैनिकों को गुप्त रूप से सैन्य प्रशिक्षण दिया था. इस प्रशिक्षण को रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव ने व्यक्तिगत रूप से मंजूरी दी थी. इसमें कम से कम चार रूसी और चीनी जनरलों की सीधी भागीदारी थी. यह सहयोग यूक्रेन युद्ध से जुड़ा होने के कारण यूरोप में गहरी चिंता पैदा कर रहा है.

रूस और चीन दोनों ही इस प्रशिक्षण की पुष्टि करने से इनकार कर रहे हैं, लेकिन उपलब्ध दस्तावेज और यूरोपीय खुफिया जानकारी इसकी पुष्टि करते हैं. चीन का कहना है कि वह यूक्रेन संकट में तटस्थ है. शांति का समर्थन करता है लेकिन पश्चिमी देश इसे रूस का समर्थन मान रहे हैं.

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उच्च स्तर पर मंजूरी और जनरलों की भागीदारी

एक गोपनीय रूसी दस्तावेज के अनुसार, अगस्त 2025 में रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव ने एक आंतरिक आदेश जारी किया. इसके तहत रूसी सशस्त्र बलों का एक प्रतिनिधिमंडल चीन गया. वहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सुविधाओं पर प्रशिक्षण लिया. इस पूरे कार्यक्रम में रूसी मेजर जनरल रुस्तम खुसैनोव और चीन के सीनियर कर्नल सुन दायुन जैसे उच्च अधिकारी शामिल थे.

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Russia China secret military training

रूसी थल सेना के उप कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल रुस्तम मुरादोव ने रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. चीनी तरफ से मेजर जनरल ली जिनसुन, जो PLA की रेडियोलॉजिकल, केमिकल और बायोलॉजिकल डिफेंस अकादमी के प्रमुख भी इसमें शामिल थे. इतने उच्च स्तर के अधिकारियों की भागीदारी दर्शाती है कि दोनों देश इस सहयोग को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं.

रेडियोलॉजिकल, बायोलॉजिकल और केमिकल युद्ध प्रशिक्षण

प्रशिक्षण का सबसे संवेदनशील हिस्सा रेडियोलॉजिकल (परमाणु), बायोलॉजिकल (जीवाणु) और केमिकल (रासायनिक) युद्ध की सुरक्षा से संबंधित था. नवंबर 2025 में बीजिंग के एक सैन्य केंद्र में तीन सप्ताह का कोर्स चलाया गया. रूसी सैनिकों को चीनी प्रशिक्षक द्वारा परमाणु रिएक्टर मॉडल पर लेक्चर दिया गया. उन्हें केमिकल रेकॉनिसेंस, रेडिएशन रेकॉनिसेंस और वेंटिलेशन सिस्टम को प्रदूषण से बचाने की ट्रेनिंग दी गई.

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नानजिंग में हुए एक अन्य प्रशिक्षण में चीनी उपकरणों की गुणवत्ता, सिमुलेटर और सैद्धांतिक ज्ञान की सराहना की गई, लेकिन चीन की लड़ाकू अनुभव की कमी का भी जिक्र किया गया. रूस को यूक्रेन युद्ध में चार साल से ज्यादा का व्यावहारिक अनुभव है, जबकि चीन दशकों से कोई बड़ी जंग नहीं लड़ पाया है.

यूरोप में बढ़ती चिंता और EU की प्रतिक्रिया

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यूरोपीय संघ इस विकास को बहुत गंभीरता से ले रहा है. EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने जून में कहा कि उन्होंने अपनी चैनलों से प्रशिक्षण की पुष्टि कर ली है. इसके प्रभावों का आकलन कर रहे हैं. ब्रसेल्स में चर्चा हो रही है कि चीन को अब केवल आर्थिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि रूस का निर्णायक समर्थक मानकर नीति बनानी चाहिए.

Russia China secret military training

यूरोप के लिए रूस मुख्य खतरा है, जबकि चीन यूरोपीय संघ का बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है. इसलिए EU को व्यापार और सुरक्षा के बीच संतुलन बैठाना चुनौतीपूर्ण लग रहा है. पहले ही कुछ चीनी कंपनियों पर रूस को समर्थन देने के आरोप में प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं.

चीन का बचाव और रूस का खंडन

चीन के विदेश मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है. बीजिंग का कहना है कि उसकी यूक्रेन नीति स्पष्ट और स्थिर है. वहीं रूस की संसद की रक्षा समिति के प्रमुख आंद्रेई कार्तापोलोव ने इसे पूरा बकवास करार दिया और कहा कि रूसी सेना को चीन से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है.

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रॉयटर्स के पिछले रिपोर्ट में कहा गया था कि नवंबर में करीब 200 रूसी सैनिकों को चीन में प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से कुछ बाद में यूक्रेन युद्ध में शामिल हो गए. यह प्रशिक्षण दोनों देशों के बढ़ते सामरिक संबंधों को दिखाता है. रूस को आधुनिक उपकरण और सैद्धांतिक ज्ञान मिल रहा है, जबकि चीन रूस के युद्ध अनुभव से फायदा उठा सकता है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सहयोग जारी रहा तो यह यूरोप और अमेरिका के लिए नई चुनौती बन सकता है. दस्तावेजों में हर पार्टिसिपेंट का नाम, रैंक, जन्म तिथि और सुरक्षा क्लियरेंस तक का ब्योरा दर्ज है, जो दिखाता है कि यह कार्यक्रम व्यवस्थित और उच्च स्तर पर चलाया गया था.

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