scorecardresearch
 

ट्रंप के गोल्डन डोम का पहला टेस्ट सफल, अमेरिका को मिलेगा तगड़ा सुरक्षा कवच

ट्रंप प्रशासन का गोल्डन डोम फॉर अमेरिका प्रोजेक्ट अपना पहला लाइव इंटरसेप्ट टेस्ट पास कर गया है. पेंटागन ने कहा कि डायरेक्टेड एनर्जी और DDAD सिस्टम ने कई खतरे वाले ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को नष्ट कर दिया.

Advertisement
X
गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दिखाते डोनाल्ड ट्रंप. (File Photo: Reuters)
गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दिखाते डोनाल्ड ट्रंप. (File Photo: Reuters)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गोल्डन डोम फॉर अमेरिका (GDA) प्रोजेक्ट देश की सबसे महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट है. हाल ही में इसका पहला लाइव इंटरसेप्ट टेस्ट सफल रहा. पेंटागन के अनुसार DDAD (Dynamic Defense Autonomous Defeat) सिस्टम ने ऑटोमैटिकली कई खतरे वाले लक्ष्यों को पहचाना, ट्रैक किया और डायरेक्टेड एनर्जी (लेजर और माइक्रोवेव) से उन्हें नष्ट कर दिया. 

यह इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित है लेकिन बहुत बड़ा और एडवांस है. इसका लक्ष्य अमेरिकी धरती को बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन्स और अन्य हवाई खतरों से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करना है. प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत शुरू में 175 बिलियन डॉलर बताई गई थी, लेकिन अब यह 1.2 ट्रिलियन डॉलर या इससे भी ज्यादा पहुंच सकती है. 

यह भी पढ़ें: किम जोंग ने दुनिया को 'चोए ह्योन' की धमकी दी, कहा- 5 साल में दो ऐसे और बनाएंगे

डायरेक्टेड एनर्जी और ऑटोनॉमस सिस्टम

टेस्ट के दौरान एलीट सैनिकों ने अगली पीढ़ी की तकनीक के साथ काम किया. पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर्स के साथ-साथ डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जो बिना गोला-बारूद के लक्ष्य को जलाकर या बिजली से नष्ट कर देते हैं. 

यह सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म और हाइपरसोनिक मिसाइलें बड़ी चुनौती हैं. DDAD सिस्टम ने स्वायत्त रूप से निर्णय लेकर खतरे को रोका, जो भविष्य के युद्ध में बहुत उपयोगी साबित होगा. ट्रंप ने इसे देखते हुए कहा कि यह रीगन के स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनिशिएटिव (SDI) यानी स्टार वॉर्स सपने को हकीकत बना रहा है. वन बिग ब्यूटीफुल बिल से मिले फंडिंग ने इस मील के पत्थर को संभव बनाया.

Advertisement

Golden Dome for America
  
गोल्डन डोम की परतें: लेयर्ड डिफेंस सिस्टम

गोल्डन डोम एक 'सिस्टम ऑफ सिस्टम्स' है. इसमें जमीन, समुद्र, हवा और स्पेस आधारित सेंसर और इंटरसेप्टर्स शामिल हैं. 

  • स्पेस-बेस्ड सेंसर: शुरुआती चेतावनी के लिए उपग्रह.
  • ग्राउंड और शिप-बेस्ड इंटरसेप्टर्स: पारंपरिक मिसाइलों को रोकने के लिए.
  • डायरेक्टेड एनर्जी: लेजर और माइक्रोवेव हथियार तेज और सस्ते हमलों के लिए.
  • ऑटोनॉमस कंट्रोल: AI और मशीन लर्निंग से ऑटोमैटिक फैसले.

यह सिस्टम पूरे अमेरिकी हवाई क्षेत्र को कवर करेगा. दुश्मन के किसी भी हमले को पहले चरण में ही रोकने की कोशिश करेगा.

यह भी पढ़ें: जेलीफिश जैसे ड्रोन स्वार्म... ईरान के इस महाअस्त्र से खौफ में आ गया अमेरिका!

रीगन के SDI से तुलना और विकास

1980 के दशक में राष्ट्रपति रीगन ने SDI की घोषणा की थी, जो स्पेस-बेस्ड मिसाइल डिफेंस का सपना था. उस समय तकनीक कच्ची थी, इसलिए इसे स्टार वॉर्स कहा गया. अब आधुनिक सेंसर, AI, डायरेक्टेड एनर्जी और सस्ती स्पेस लॉन्च तकनीक के कारण गोल्डन डोम ज्यादा व्यावहारिक लग रहा है. ट्रंप ने जनवरी 2025 में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से इसकी शुरुआत की. मई 2025 में इसे गोल्डन डोम नाम दिया गया. लक्ष्य है 2029 तक शुरुआती क्षमता हासिल करना.

लागत, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार लागत 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकती है. स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर्स महंगे और मुश्किल हैं. कुछ विश्लेषक कहते हैं कि 100 प्रतिशत सुरक्षा असंभव है, खासकर रूस और चीन जैसे बड़े दुश्मनों के खिलाफ. रूस और चीन इसे आक्रामक मानकर अपना हथियार कार्यक्रम बढ़ा सकते हैं.

Advertisement

Golden Dome for America

इससे हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है. अमेरिका को औद्योगिक क्षमता बढ़ानी होगी ताकि बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सके. फिर भी समर्थक कहते हैं कि यह पीस थ्रू स्ट्रेंथ की नीति है. दुश्मन हमला करने से पहले सोचेंगे. यह सफल टेस्ट गोल्डन डोम को आगे बढ़ाएगा.

अगले चरणों में ज्यादा बड़े टेस्ट और स्पेस कंपोनेंट्स शामिल किए जाएंगे. पेंटागन और इंडस्ट्री मिलकर काम कर रही है. ट्रंप प्रशासन इसे वॉर डिपार्टमेंट के तहत मजबूत कर रहा है. अगर सफल हुआ तो अमेरिका की होमलैंड सुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच जाएगी.
 
यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि अमेरिका कैसे पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर हाई-टेक डिफेंस पर फोकस कर रहा है. ड्रोन्स, हाइपरसोनिक और न्यूक्लियर खतरे के युग में ऐसी सुरक्षा जरूरी है.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोनों तरफ से खुला, 11 भारतीय जहाज निकले, 10 कर रहे इंतजार

सुरक्षा का नया युग

गोल्डन डोम सिर्फ एक हथियार प्रणाली नहीं है, बल्कि अमेरिका की रक्षा सोच का बदलाव है. पहला टेस्ट सफल होने से उम्मीद बढ़ी है. हालांकि चुनौतियां बाकी हैं – लागत, समय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया. अगर यह प्रोजेक्ट अपनी राह पर रही तो 21वीं सदी के अंत तक अमेरिका के पास दुनिया का सबसे मजबूत मिसाइल डिफेंस शील्ड होगा. ट्रंप इसे अपनी विरासत बना रहे हैं, जो रीगन की तरह इतिहास में दर्ज होगी. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement