ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने आज तक को दिए खास इंटरव्यू में बताया कि भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से इस मिसाइल को दागा और पाकिस्तान के अंदर के ठिकानों पर सटीक वार किया.
मिसाइल ने दुश्मन के राडार सिस्टम को चकमा दिया और लक्ष्य को बिलकुल सही जगह पर मारा. इस सफल प्रदर्शन के बाद ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे घातक मिसाइल माना जा रहा है. सीईओ के मुताबिक इसकी सटीकता की चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है.
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ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार तीनों सेवाओं- थल सेना, नौसेना और वायु सेना के पास ब्रह्मोस उपलब्ध था. इसकी नेटवर्क-सेंट्रिक क्षमता के कारण तीनों सेनाएं इसे एक साथ इस्तेमाल कर सकीं. यह मिसाइल जमीन से, युद्धपोत से और लड़ाकू विमान से दागी जा सकती है. इस बहुउपयोगिता ने ऑपरेशन को ज्यादा प्रभावी बनाया.
सीईओ ने बताया कि मिसाइल की यात्रा नौसेना से शुरू हुई थी. उसके बाद थल सेना के लिए जमीनी संस्करण आया और फिर वायुसेना के लिए सुखोई विमान से दागे जाने वाला संस्करण तैयार हुआ.

अगली पीढ़ी के ब्रह्मोस मिसाइल पर चल रहा है काम
डॉ. जोशी ने खुलासा किया कि ब्रह्मोस को पूरी तरह स्वदेशी बनाने का काम तेजी से चल रहा है. सुखोई पर अगली पीढ़ी के ब्रह्मोस को तैनात करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है. साथ ही मिसाइल की रेंज बढ़ाने पर भी काम हो रहा है. ये सुधार भारतीय रक्षा जरूरतों को और मजबूत बनाएंगे. उत्पादन के मामले में कंपनी अच्छी स्थिति में है.
पिलानी, नागपुर और लखनऊ में तीन कारखाने हैं. 300 से ज्यादा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग इस काम में सहयोग दे रहे हैं. सीईओ का कहना है कि तीनों सेनाओं की जरूरत पूरी करने की क्षमता उनके पास है. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रह्मोस मिसाइल की मांग काफी बढ़ गई है.
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फिलीपींस पहला देश था जिसने इसे खरीदा. अब वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ सौदे अंतिम चरण में हैं. सीईओ ने एक महत्वपूर्ण जानकारी दी कि रूस-सरकारी समझौते के तहत भारत रूस की सेनाओं को भी ब्रह्मोस मिसाइल सप्लाई करने के लिए तैयार है और इस बारे में बातचीत चल रही है. यह कदम भारत-रूस रक्षा सहयोग को नया आयाम दे सकता है.

आम आदमी के लिए क्या मतलब है
ब्रह्मोस की सफलता भारतीय रक्षा उद्योग की ताकत को दिखाती है. यह मिसाइल सिर्फ युद्ध के मैदान में असरदार नहीं बल्कि देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम है. स्वदेशीकरण बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटेगी और रोजगार के नए अवसर बनेंगे. अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से विदेशी मुद्रा भी आएगी.
साथ ही तीनों सेनाओं में इसकी मौजूदगी से देश की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी. ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि सही तकनीक और सटीक इस्तेमाल से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं. आगे भी इस मिसाइल की क्षमताओं को और निखारने की जरूरत है ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके.