अमेरिकी वायुसेना ने मिडिल ईस्ट में जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के सपोर्ट में अपना शक्तिशाली B-1B लांसर विमान उतार दिया है. यह कार्रवाई ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच की गई है. इस सुपरसोनिक बॉम्बर ने युद्ध क्षेत्र यानी मिडिल ईस्ट के ऊपर उड़ान भरी. अमेरिका ने अपनी मारक क्षमता बढ़ाने और दुश्मन को धमकी भरा अंदाज दिखाने के मकसद से यह कदम उठाया है. B-1B लांसर अपनी बेजोड़ रफ्तार और भारी मात्रा में पेलोड ले जाने की क्षमता के लिए पहचाना जाता है.
B-1B लांसर को दुनिया भर में इसके उपनाम 'बोन' (BONE) से जाना जाता है. यह विमान महज एक बॉम्बर नहीं, बल्कि अमेरिकी वायुसेना की रीढ़ है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी पेलोड क्षमता है, जो इसे 75,000 पाउंड तक के घातक बम और मिसाइलें ले जाने की अनुमति देती है.
ईरान के खिलाफ मिडिल ईस्ट के आसमान में इस विमान की दस्तक ने जंग की दिशा बदलने के संकेत दे दिए हैं.
B-1B लांसर दुनिया के सबसे खतरनाक बॉम्बर विमानों में गिना जाता है. यह लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला बमवर्षक है, जो साउथ डकोटा के एल्सवर्थ एयर फोर्स बेस के 28वें बॉम्ब विंग का हिस्सा है. यह विमान गाइडेड, परमाणु और पारंपरिक हथियारों सहित कई तरह के हथियार ले जाने की क्षमता रखता है.
अमेरिकी सैनिक इसे सामान्य तौर पर 'बोन (Bone)' के नाम से भी बुलाते हैं. अमेरिका के पास ऐसे कुल 104 बमवर्षक विमान हैं. इस विमान को उड़ाने के लिए चार क्रू मेंबर की जरूरत होती है, जिनमें एयरक्राफ्ट कमांडर, पायलट, ऑफेंसिव सिस्टम्स ऑफिसर और डिफेंसिव सिस्टम्स ऑफिसर शामिल होते हैं.
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B-1B लांसर की लंबाई 146 फीट, विंग्स्पैन 137 फीट और ऊंचाई 34 फीट है. बिना हथियारों के इसका वजन करीब 87,090 किलोग्राम होता है, जबकि हथियारों के साथ यह करीब 2.16 लाख किलोग्राम तक पहुंच जाता है. यह 40 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 1531 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और एक बार में करीब 9400 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है.
अगर इसमें हथियार न लगे हों तो इसकी उड़ान सीमा करीब 12 हजार किलोमीटर तक पहुंच सकती है. यह अधिकतम 60 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है और एक मिनट में करीब 5678 फीट की ऊंचाई हासिल कर लेता है. इसमें छह एक्सटर्नल हार्डप्वाइंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यह करीब 23 हजार किलोग्राम तक के बम ले जा सकता है. इसमें अलग-अलग तरह के बमों का मिश्रण भी लगाया जा सकता है.