दिल्ली में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक अदालत ने हत्या के मामले की जांच में गंभीर लापरवाही को लेकर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि जानबूझकर हत्या के आरोप वाले मामले को सड़क हादसे की तरह दर्ज किया गया, जो चिंता की बात है. कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
यह पूरा विवाद चंद्रेश उर्फ मोनू नाम के एक शख्स की मौत से जुड़ा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अस्पताल में 22 दिनों तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद मोनू ने दम तोड़ दिया था. इस मामले में दर्ज शिकायत के मुताबिक, मोनू ने खुद नगेंद्र नाम के एक व्यक्ति का नाम लिया था. आरोप था कि नगेंद्र ने पहले मोनू के साथ मारपीट की और फिर जान से मारने की नीयत से उसके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी. मोनू के परिवार ने कोर्ट में एक वीडियो भी सौंपा, जिसमें घायल मोनू साफ तौर पर आरोपी की पहचान कर रहा था. यह पूरा मामला शाहबाद डेयरी थाने का है. इस मामले को लेकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) भारती बेनीवाल की अदालत ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है.
जांच में मिलीं कई खामियां
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब शिकायत में साफ तौर पर मारपीट और हत्या की कोशिश के आरोप थे, तो शुरुआत में मामला लापरवाही से गाड़ी चलाने की धाराओं में क्यों दर्ज किया गया. अदालत ने कहा कि शिकायत में ऐसा कोई आधार नहीं था, जिससे यह सिर्फ सड़क हादसा लगता हो. कोर्ट के मुताबिक, यह केवल प्रक्रिया में हुई चूक नहीं, बल्कि जांच की गंभीर कमी है, जिसका असर पूरे मुकदमे पर पड़ सकता है.
कोर्ट ने अपनी जांच में पाया कि पुलिस ने इस केस को पूरी तरह बिगाड़ दिया. पुलिस वाले न तो मेडिकल सबूतों की ठीक से जांच कर पाए और न ही क्राइम सीन को सुरक्षित रख सके. सबसे बड़ी बात यह कि घायल मोनू ने मरने से पहले जो बयान दिया था, उसे भी पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया. अदालत ने यह भी नोट किया कि फोरेंसिक रिपोर्ट में हमले के संकेत होने के बावजूद उसे निगरानी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया.
कमिश्नर को दिए कार्रवाई के निर्देश
इन सभी पहलुओं को देखते हुए अदालत ने पुलिस कमिश्नर को मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने और जांच अधिकारी, थाना प्रभारी समेत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. साथ ही अदालत ने इस मामले में अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है. अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी.