प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च परिवारों की जेब पर सरकारी अस्पतालों की तुलना में कई गुना ज्यादा पड़ रहा है. देश में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च ₹50,508 है, जबकि सरकारी अस्पताल में यह सिर्फ ₹6,631 दर्ज किया गया है. यानी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती का खर्च सरकारी अस्पताल की तुलना में करीब 7.6 गुना ज्यादा है. ये बात नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के 80वें राउंड के आंकड़ों के आधार पर लोकलसर्किल्स (LocalCircles) ने अपने नए सर्वे में कही है.
यह सर्वे पिछले तीन वर्षों में हॉस्पिटल सर्विस का इस्तेमाल करने वाले परिवारों के अनुभवों पर आधारित है. सर्वे के लिए लोकलसर्किल्स ने देश के 306 जिलों से कुल 23,084 लोगों के जवाब लिए. सर्वे में खास तौर पर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज, बिलिंग और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े अनुभवों को शामिल किया गया है.
प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी भी कई गुना महंगी
हॉस्पिटलाइजेशन के अलावा बच्चे के जन्म से जुड़े खर्च में भी प्राइवेट और गवर्नमेंट अस्पतालों के खर्च में बड़ा अंतर सामने आया है. नेशनल सैंपल सर्वे के जनवरी से दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी पर औसत आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च ₹37,630 रहा. वहीं सरकारी अस्पताल में यही खर्च सिर्फ ₹2,299 दर्ज किया गया.
इलाज और लैब टेस्ट के महंगे होने की शिकायत
प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की लागत को लेकर भी बड़ी संख्या में लोगों ने चिंता जताई. सर्वे के मुताबिक...
यानी मरीजों का आर्थिक बोझ सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने की फीस तक सीमित नहीं है. टेस्ट, दवाएं, कमरे और दूसरी सुविधाएं भी कुल बिल को काफी बढ़ा रही हैं.
बिलिंग में भी सामने आईं कई शिकायतें
सर्वे में प्राइवेट अस्पतालों की बिलिंग को लेकर भी कई तरह की समस्याएं सामने आईं. 49% लोगों ने कहा कि उनके बिल में गैरजरूरी डॉक्टर कंसल्टेशन चार्ज जोड़े गए. वहीं 43% ने डॉक्टरों की कंसल्टेशन फीस बहुत ज्यादा होने की शिकायत की.
इसके अलावा 40% लोगों ने दवाओं और कंज्यूमेबल्स की मात्रा को लेकर ओवरबिलिंग की बात कही. इतने ही लोगों ने ऐसे अनपेक्षित या अनजान चार्ज का भी जिक्र किया, जिनकी उन्हें पहले जानकारी नहीं थी.
10 में 6 से ज्यादा परिवारों को बिलिंग से जुड़ी दिक्कत
सर्वे की कुल तस्वीर देखें तो 10 में 6 से ज्यादा परिवारों ने बताया कि उन्हें प्राइवेट अस्पताल के बिल में किसी न किसी तरह की समस्या का सामना करना पड़ा. सबसे ज्यादा शिकायतें इलाज और डायग्नोस्टिक टेस्ट की लागत को लेकर रहीं. सिर्फ 14% लोगों ने कहा कि उन्हें सर्वे में सूचीबद्ध किसी भी तरह की बिलिंग समस्या का सामना नहीं करना पड़ा.
सर्वे में 306 जिलों से मिले 23 हजार से ज्यादा जवाब
लोकलसर्किल्स का यह सर्वे वैलिडेटेड यूजर्स के बीच किया गया. इसमें 69% जवाब पुरुषों और 31% महिलाओं की ओर से आए. कुल जवाबों में 46% टियर-1, 30% टियर-2 और 24% टियर-3, टियर-4 और टियर-5 जिलों से थे. सर्वे ऐसे समय में आया है जब देश में इलाज की बढ़ती लागत और परिवारों पर पड़ने वाले स्वास्थ्य खर्च को लेकर चिंता बनी हुई है. सर्वे के आंकड़े प्राइवेट और गवर्नमेंट अस्पतालों के बीच इलाज की लागत में बड़ा अंतर दिखाते हैं.