गांव छोड़कर में शहर में बसने की परंपरा काफी तेजी से बढ़ रही है. कई मामले तो ऐसे भी देखने को मिलते हैं कि लोग पुश्तैनी संपत्ति बेचकर शहर में घर खरीद लेते हैं. क्या शहर में प्रॉपर्टी की कीमत गांव के मुकाबले ज्यादा बढ़ती है, या फिर देखा-देखी में लोग गांव से जमापूंजी मंगवाकर शहर में घर, खासकर फ्लैट खरीद लेते हैं? आज एक उदाहरण से समझने की कोशिश करेंगे.
दो भाई हैं- पंकज और अमन. दोनों को पिता से विरासत में 10-10 लाख रुपये मिलते हैं. पंकज अपने पैसों से गांव में जमीन खरीदता है, जबकि अमन को गांव में जमीन खरीदना फायदे का सौदा नहीं लगता. क्योंकि उसने शहर में रहकर पढ़ाई-लिखाई की है. अमन पिता से मिले 10 लाख रुपये से शहर में जाकर एक फ्लैट खरीद लेता है. आज हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि लंबी अवधि में, करीब 20 साल के बाद दोनों में से किसके पास ज्यादा धन होगा? यानी दोनों में से कौन फायदे में रहेगा?
दरअसल, पंकज ने 10 लाख रुपये में गांव की जमीन खरीदी, इसके पीछे पंकज का तर्क है कि जमीन कभी भी पुरानी नहीं होती है, 20 साल के बाद भी जमीन वैसी ही रहेगी. फ्लैट के मुकाबले न उसकी दीवारें कमजोर होंगी और न ही उसकी छत टपकेगी. साल-दर-साल उसकी वैल्यू बढ़ती रहेगी.
पंकज का मानना है कि देश तेजी से बदल रहा है. आज जो गांव शहर से दूर है, 20 साल के बाद वहां से कोई नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे, या फैक्ट्री निकल सकती है. अगर ऐसा हुआ तो 10 लाख वाली जमीन की कीमत करोड़ों में हो सकती है. यही नहीं, जमीन को संभाल कर रखने में कोई खास खर्च नहीं आता है.
अमन की रणनीति (शहर में फ्लैट)
अमन 10 लाख रुपये में छोटे शहर में एक फ्लैट खरीद लेता है, उसका तर्क है, इससे हर महीने किराये का बचत होगा. फ्लैट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे किराये पर भी दिया जा सकता है. अगर अमन को हर महीने 3,000 से 4,000 रुपये किराया मिलता है और हर साल किराया थोड़ा बढ़ता भी है, तो 20 साल में वह केवल किराये से करीब 10 से 12 लाख रुपये कमा लेगा. अमन का कहना है कि गांव की जमीन से हर महीने या हर साल कोई बड़ा किराया नहीं मिलता है.
लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि फ्लैट की एक आयु होती है, ऐसे में 20 साल के बाद वह फ्लैट पुराना हो जाएगा. लोग पुरानी इमारतों में फ्लैट खरीदने से बचते हैं, इसलिए फ्लैट की कीमत उस रफ्तार से नहीं बढ़ती, जिस रफ्तार से खाली जमीन की बढ़ती है. वहीं 20 वर्षों में फ्लैट की मरम्मत, पेंटिंग और सोसाइटी मेंटेनेंस पर अमन का अच्छा-खासा पैसा खर्च होगा.
अब 20 साल के बाद का हिसाब-किताब
पिछले दो दशकों में शहर के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इस हिसाब पंकज की खरीदी गई जमीन की अनुमानित कीमत 70 लाख से 1.20 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है. जबकि अमन के फ्लैट की कीमत 20 साल के बाद बढ़कर 35 लाख से 45 लाख रुपये के बीच हो सकती है.
हालांकि इस दौरान अमन को 10 से 12 लाख रुपये तक किराये के तौर पर कमाई होगी. लेकिन 20 साल के दौरान 2 से 3 लाख रुपये रख-रखाव में खर्च हो जाएगा.
इस तरह से 20 साल के बाद अमन के फ्लैट की कीमत 45 लाख रुपये के आसपास रहेगी. जबकि पंकज की जमीन की कीमत 70 लाख रुपये से भी ज्यादा की हो जाएगी. अब यहां फायदा डबल हो जाता है, यानी अमन के फ्लैट के मुकाबले पंकज की जमीन की कीमत डबल हो जाएगी.
आसान शब्दों में कहें तो 20 साल के बाद पंकज के ज्यादा अमीर होने की संभावना 90% से भी अधिक है. शहर के फ्लैट में आप इमारत के लिए पैसा देते हैं, जो समय के साथ पुरानी और सस्ती होती जाती है. गांव की जमीन की कीमत समय के साथ महंगी होती रहती है. यही नहीं, अगर अमन अपने फ्लैट से मिलने वाले किराये को हर महीने म्यूचुअल फंड में जमा करते हैं, उससे करीब 30 लाख रुपये जमा हो सकते हैं.
लेकिन इसके बावजूद भी अमन 20 साल के बाद पंकज की जमीन की कीमत की बराबरी नहीं कर पाएंगे. ऐसे में अगर आप भी निवेश के तौर पर 20 साल के लिए दांव लगाना चाहते हैं तो खाली जमीन हमेशा फ्लैट से बेहतर और ज्यादा रिटर्न देने वाला विकल्प साबित हो सकता है. लेकिन बेहतर रिटर्न के लिए गांव की जमीन और शहर के फ्लैट की लोकेशन कैसी है, इस बात पर निर्भर करेगी.