देश भर के प्रमुख शहरों में रियल एस्टेट की सुस्त मांग और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद दक्षिण दिल्ली का लग्जरी हाउसिंग मार्केट मजबूती से टिका हुआ है. सीमित सप्लाई और लगातार बढ़ती मांग के चलते 2026 की अप्रैल-जून तिमाही (Q2) में दक्षिण दिल्ली के लग्जरी इंडिपेंडेंट फ्लोर्स की कीमतों में सालाना आधार पर 6% से 21% तक की तेजी दर्ज की गई है.
कैटेगरी-II रियल एस्टेट अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड 'गोल्डन ग्रोथ फंड' (Golden Growth Fund) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेजी के पीछे प्रीमियराइजेशन, री-डेवलपमेंट और हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और एनआरआई (NRIs) की ओर से आ रही भारी मांग मुख्य वजह है.
दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा निर्धारित श्रेणियों के आधार पर दक्षिण दिल्ली के प्रमुख इलाकों में कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है. कैटेगरी A की कॉलोनियों में सालाना आधार पर 20% से 21% की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें 2,500 वर्ग फीट के फ्लोर की कीमतें Q2 2025 के ₹16-22 करोड़ से बढ़कर Q2 2026 में ₹18-28 करोड़ (21% वृद्धि) हो गईं, जबकि 6,000 वर्ग फीट के फ्लोर ₹36-45 करोड़ से उछलकर ₹41-56 करोड़ (20% वृद्धि) पर पहुंच गए. इस श्रेणी में मेफेयर गार्डन, पंचशील पार्क, आनंद निकेतन, वसंत विहार, शांति निकेतन, वेस्टएंड, चाणक्यपुरी, गोल्फ लिंक्स, जोर बाग, सुंदर नगर और महारानी बाग जैसे बेहद पॉश इलाके शामिल हैं.
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वहीं, कैटेगरी B की कॉलोनियों में 6% से 10% की वृद्धि देखी गई, जहां 2,500 वर्ग फीट के फ्लोर की कीमतें ₹8.5-11 करोड़ से बढ़कर ₹9-12.5 करोड़ (10% वृद्धि) हो गईं और 3,200 वर्ग फीट के फ्लोर में सालाना आधार पर 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस श्रेणी में डिफेंस कॉलोनी, ग्रेटर कैलाश (GK), ग्रीन पार्क, गुलमोहर पार्क, नीति बाग, सफदरजंग एन्क्लेव, चिराग एन्क्लेव, आनंद लोक और कैलाश कॉलोनी जैसे प्रमुख रिहायशी इलाके आते हैं.
निवेश के सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभरा दक्षिण दिल्ली
रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण एनआरआई और एचएनआई निवेशक अब मिडिल ईस्ट की बजाय दक्षिण दिल्ली के रियल एस्टेट में पैसा लगा रहे हैं. इससे उनका निवेश सुरक्षित रहने के साथ-साथ कैपिटल एप्रिसिएशन और बेहतर रेंटल यील्ड भी सुनिश्चित हो रही है.
दक्षिण दिल्ली की 42 'A' और 'B' कैटेगरी की कॉलोनियों में लगभग 18,500 प्लॉट्स मौजूद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों में री-डेवलपमेंट की कुल क्षमता करीब ₹6.5 लाख करोड़ की है, जो डेवलपर्स और निवेशकों के लिए लंबे समय तक मूल्य सृजन का एक बड़ा जरिया बन रही है.
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