अगर आपके जीवन में लगातार तनाव बना हुआ है, या मेहनत के बाद भी सुकून नहीं मिल रहा, तो आज के दिन को साधारण समझने की भूल बिल्कुल न करें. आज (12 अगस्त 2026) श्रावण मास की पावन अमावस्या है. बुधवार के संयोग में आई यह हरियाली अमावस्या पितृ तर्पण, शिव आराधना और प्रकृति की सेवा का वह महासंयोग है, जो आपके जीवन की कई उलझनों को सुलझा सकता है.
कब से कब तक रहेगी अमावस्या तिथि?
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या आज सूर्योदय के समय है.
समय: यह तिथि आज रात 11:06 बजे तक प्रभावी रहेगी.
नियम: चूंकि उदया तिथि आज की है, इसलिए स्नान, दान, पितृ तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान आज ही संपन्न किए जाएंगे. हालांकि, स्थान विशेष के पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.
नक्षत्र व योग: आज सुबह के समय पुष्य नक्षत्र और इसके बाद आश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा. बुधवार होने के कारण विघ्नहर्ता गणेश जी और बुध ग्रह की कृपा पाने का भी यह उत्तम दिन है.
क्यों खास है 12 अगस्त की यह अमावस्या?
श्रावण का महीना पूरी तरह शिवजी को समर्पित होता है. वहीं, अमावस्या की तिथि पूर्वजों के स्मरण, आत्ममंथन और पुराने कर्मों के सुधार से जुड़ी मानी जाती है. इसके साथ ही, हरियाली अमावस्या प्रकृति और पौधों के प्रति आभार प्रकट करने का पर्व है.
इस प्रकार आज तीन पवित्र ऊर्जाएं शिव कृपा, पितृ आशीर्वाद और पर्यावरण संरक्षण एक साथ मिल रही हैं. इस दिन किया गया कोई भी अच्छा और सार्थक कार्य सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आपके आचरण, घर के माहौल और भविष्य के फैसलों पर भी सकारात्मक छाप छोड़ता है.
ग्रहण को लेकर ना पालें भ्रम
12 अगस्त 2026 को लगने वाले सूर्य ग्रहण को लेकर देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. खगोलीय दृष्टिकोण से यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, जो दुनिया के कई हिस्सों में साफ नजर आएगा. लेकिन भारती में रहने वाले लोगों के लिए यह जानना सबसे जरूरी है कि यह ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा.
ज्योतिषीय और पंचांग के नियमों के अनुसार, किसी भी ग्रहण का सूतक काल तभी प्रभावी माना जाता है जब वह उस देश या क्षेत्र में दृश्य (Visible) हो. चूंकि भारत में इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता शून्य रहेगी, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सूतक काल मान्य नहीं होगा. हालांकि, यदि आपके परिवार में कोई विशेष पारंपरिक या क्षेत्रीय नियम माने जाते हैं, तो आप अपने स्थानीय पंडित या बुजुर्गों से सलाह ले सकते हैं.
आर्थिक तंगी और रुकावटों से मुक्ति के उपाय
माता लक्ष्मी और विष्णु जी की आराधना: आज सुबह अपने घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें . भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का ध्यान करें.
दान-पुण्य: अपनी कमाई का एक छोटा हिस्सा निकालकर किसी जरूरतमंद की मदद के लिए अलग रखें. अमावस्या केवल धन पाने की कामना का दिन नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन सीखने का अवसर है. आज फिजूलखर्ची रोकने और बचत का पक्का संकल्प लें.
व्यापारिक शुद्धि: यदि आप बिजनेस या नौकरी करते हैं, तो आज अपने कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें. वहां जमा फालतू कागज, टूटा सामान और बेकार की चीजें हटा दें. शाम को मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं; इससे कार्यक्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती हैं.
मन की शांति और शिव आराधना के नियम
श्रावण अमावस्या के दिन भगवान शिव का पूजन अत्यंत फलदायी माना जाता है.
सुबह उठकर शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें और यदि संभव हो तो साफ, खंडित न होने वाला बेलपत्र चढ़ाएं.
इसके बाद शांत मन से कम से कम 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें.
पूजा के समय अपनी लंबी-चौड़ी इच्छाओं की सूची भगवान के सामने रखने के बजाय, अपने भीतर की किसी एक बुराई जैसे गुस्सा, आलस या अहंकार को छोड़ने का संकल्प लें. यह अमावस्या हमारे भीतर के अंधेरे को मिटाकर उजाला लाने का संदेश देती है.
हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण
इस पावन तिथि का सीधा संबंध हरियाली से है, इसलिए केवल मंदिर की पूजा तक सीमित न रहें.
आज के दिन नीम, पीपल, बरगद, आंवला, बेल या अपनी स्थानीय जलवायु के अनुकूल कोई भी एक शुभ पौधा अवश्य लगाएं.
पौधे को ऐसी जगह लगाएं जहां उसकी नियमित रूप से सिंचाई और देखभाल की जा सके. पेड़ लगाना न सिर्फ पितरों की तृप्ति का मार्ग है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सबसे बड़ा उपहार देना भी है.