मुंबई में आसमान छूती लग्जरी इमारतें रियल एस्टेट मार्केट की पहचान बन चुकी हैं, लेकिन इन चमचमाते हाईराइज टावरों की उम्र बढ़ने के बाद क्या होगा, इस सवाल पर अब चर्चा शुरू हो गई है. 30 साल बाद इन इमारतों की मेंटेनेंस लागत कितनी बढ़ेगी, बड़े रिपेयर का खर्च कौन उठाएगा और क्या ऐसे पुराने टावरों का दोबारा विकास यानी री-डेवलपमेंट संभव होगा. रेडिट के इंडियन रियल एस्टेट फोरम पर शुरू हुई एक चर्चा ने मुंबई के हाईराइज अपार्टमेंट्स के भविष्य और उनकी लॉन्ग टर्म वैल्यू को लेकर बहस छेड़ दी है.
मुंबई का रियल एस्टेट बाजार लगातार ऊंची इमारतों की ओर बढ़ रहा है. लग्जरी टावरों में घर खरीदने वाले लोग आमतौर पर लोकेशन, सुविधाओं, बिल्डर की प्रतिष्ठा और प्रॉपर्टी की कीमत जैसे पहलुओं पर ज्यादा ध्यान देते हैं. हालांकि, इमारत के 20-30 साल पुराने होने के बाद उसकी मेंटेनेंस और वैल्यू का क्या होगा, यह सवाल अक्सर चर्चा से बाहर रह जाता है
दरअसल, एक व्यक्तिगत मकान की तुलना में हाईराइज सोसायटी को बनाए रखना कहीं ज्यादा जटिल होता है. इमारत की लिफ्ट, फायर सेफ्टी सिस्टम, पानी के पंप, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, प्लंबिंग नेटवर्क, बाहरी हिस्से यानी फैसेड और पार्किंग जैसी साझा सुविधाओं की लगातार देखरेख करनी पड़ती है. समय के साथ इनमें से कई सिस्टम को बदलने या बड़े स्तर पर रिपेयर करने की जरूरत पड़ सकती है.
Reddit पर उठा सवाल- आखिर 30 साल बाद क्या होगा?
इसी मुद्दे को लेकर Reddit के इंडियन रियल एस्टेट फोरम पर एक यूजर ने हाईराइज टावरों के भविष्य को लेकर सवाल उठाया. यूजर ने चिंता जताई कि क्या 30 साल बाद इन प्रॉपर्टीज की कीमत और निवेश से मिलने वाला रिटर्न आज की उम्मीदों के मुताबिक रहेगा. पोस्ट में सवाल किया गया कि अगर किसी हाईराइज बिल्डिंग की मेंटेनेंस लागत लगातार बढ़ती जाए, उसके री-डेवलपमेंट की संभावनाएं सीमित हों और खरीदार पुरानी इमारत में निवेश करने से हिचकें, तो ऐसी प्रॉपर्टी का भविष्य क्या होगा? यूजर ने यह भी कहा कि कुछ बिल्डर मौजूदा हाईराइज टावरों के लिए करीब 30 साल की अवधि को लेकर बात कर रहे हैं, जिसके बाद बिल्डिंग की स्थिति काफी हद तक उसके रखरखाव और मरम्मत पर निर्भर करेगी.
सोशल मीडिया पर भी बंटी राय
Reddit पर हुई चर्चा में लोगों की राय एक जैसी नहीं रही, कुछ यूजर्स ने बढ़ती मेंटेनेंस लागत और भविष्य में री-डेवलपमेंट की चुनौती को लेकर चिंता जताई. वहीं, कुछ लोगों का मानना था कि अच्छी क्वालिटी से बनी और नियमित रूप से मेंटेन की गई हाईराइज इमारतें कई दशकों तक सुरक्षित और उपयोगी रह सकती हैं.
एक यूजर ने तर्क दिया कि आधुनिक हाईराइज टावरों को आम तौर पर 50 साल से अधिक समय तक चलने के लिहाज से डिजाइन किया जाता है, उसके मुताबिक, करीब 40 साल पुरानी कई इमारतें आज भी अच्छी स्ट्रक्चरल स्थिति में हैं, बशर्ते उनका सही तरीके से रखरखाव किया गया हो.
यूजर ने यह भी कहा कि नई कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल बिल्डिंग की गुणवत्ता, मजबूती और टिकाऊपन को बेहतर कर सकता है. इसलिए नई बनी इमारतों को लेकर अगले 50 साल तक चिंता करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, अगर उनका डिजाइन सही हो, निर्माण गुणवत्ता अच्छी हो और नियमित मेंटेनेंस किया जाए.
असली सवाल सिर्फ उम्र नहीं, मेंटेनेंस का है
मुंबई के हाईराइज रियल एस्टेट को लेकर शुरू हुई यह बहस एक अहम सवाल की ओर इशारा करती है किसी इमारत की उम्र तय करने के बजाय उसके रखरखाव और स्ट्रक्चरल हेल्थ को कितना महत्व दिया जाए. आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे आज के नए लग्जरी टावर पुराने होंगे, सोसायटियों के सामने बड़े रिपेयर, बढ़ती मेंटेनेंस लागत और संभावित री-डेवलपमेंट जैसे मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
यानी हाईराइज प्रॉपर्टी खरीदते समय सिर्फ आज की कीमत और सुविधाएं ही नहीं, बल्कि 20-30 साल बाद की मेंटेनेंस लागत, बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल स्थिति और री-डेवलपमेंट की संभावनाओं को भी निवेश के नजरिए से देखना जरूरी होगा.
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