Psychology Facts: क्या आपके कमरे में भी एक ऐसी कुर्सी है, जिस पर बैठने के बजाय कपड़े रखे रहते हैं? कभी जींस, कभी टी-शर्ट, कभी शर्ट तो कभी जैकेट. घर में कोई आपको इसे देखकर अक्सर टोक भी देता होगा कि कमरे को साफ क्यों नहीं रखते. लेकिन हर बार कुर्सी पर कपड़े पड़े होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति आलसी या गंदा है. इसके पीछे इंसान के दिमाग का एक व्यावहारिक तरीका भी हो सकता है.
दरअसल, कपड़ों को हम आमतौर पर दो कैटेगरी में रखते हैं- साफ कपड़े और गंदे कपड़े. लेकिन असल जिंदगी में एक तीसरी स्थिति भी होती है. उदाहरण के लिए आपने जींस या टी-शर्ट कुछ घंटों के लिए पहनी और फिर उतार दी. वह इतनी गंदी नहीं हुई कि उसे तुरंत धोने के लिए डाल दिया जाए, लेकिन उसे बाकी साफ कपड़ों के साथ अलमारी में वापस रखने का भी मन नहीं करता.ऐसे में कुर्सी एक तरह से इन दोनों के बीच की जगह बन जाती है.
हर बार फैसला लेने से बचता है दिमाग
इसके पीछे फैसले लेने से होने वाली मानसिक थकान (Decision Fatigue) का भी थोड़ा संबंध हो सकता है. इंसान दिनभर लगातार कई छोटे-बड़े फैसले लेता है. क्या खाना है, क्या काम करना है, किसे फोन करना है, क्या खरीदना है जैसी तमाम चीजों के बीच कपड़ों को लेकर एक और फैसला करना पड़ता है- इसे अलमारी में रखें या धोने के लिए डालें? कई बार दिमाग ऐसे छोटे फैसलों को टाल देता है. इसलिए व्यक्ति कपड़ा वहीं रख देता है जहां बाद में आसानी से मिल जाए. कुर्सी इस मामले में सबसे आसान विकल्प बन जाती है.
कुर्सी पर रखा कपड़ा बन जाता है रिमांइडर
इस आदत को Cognitive Offloading से भी समझा जा सकता है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि इंसान अपने दिमाग पर याद रखने का बोझ कम करने के लिए आसपास की चीजों का सहारा लेता है. जैसे हम किसी जरूरी काम के लिए मोबाइल में अलार्म लगाते हैं या चाबी हमेशा एक ही जगह रखते हैं. उसी तरह कुर्सी पर रखा कपड़ा भी एक तरह का संकेत हो सकता है कि यह कपड़ा अभी पूरी तरह गंदा नहीं है और जरूरत पड़ने पर इसे फिर पहना जा सकता है. यानी व्यक्ति को यह बात दिमाग में याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती कि कौन-सा कपड़ा दोबारा पहनना है. कपड़ा सामने देखकर उसे खुद याद आ जाता है.
बार-बार करने से बन जाती है आदत
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक कपड़े कुर्सी पर रखता है, तो यह उसकी आदत भी बन सकती है. इसे 'Habit Formation' से समझा जा सकता है. कपड़े बदलने के बाद हर बार उन्हें कुर्सी पर रखने से दिमाग इस काम को एक सामान्य रूटीन की तरह लेने लगता है. फिर व्यक्ति जानबूझकर यह फैसला नहीं करता कि कपड़ा कुर्सी पर रखना है. वह अपने आप ऐसा करने लगता है. यही वजह है कि कई लोगों के कमरे में एक खास कुर्सी धीरे-धीरे ‘कपड़ों वाली कुर्सी’ बन जाती है.
इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति गंदा है
हालांकि इसका यह मतलब भी नहीं है कि हर व्यक्ति जो कुर्सी पर कपड़े रखता है, वह व्यवस्थित या मानसिक रूप से बहुत समझदार है. किसी की आदत के पीछे कई कारण हो सकते हैं. कमरे की व्यवस्था, अलमारी की सुविधा, दिनचर्या और व्यक्तिगत पसंद भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं. इसलिए केवल कुर्सी पर पड़े कपड़ों को देखकर किसी व्यक्ति को आलसी या गंदा कहना सही नहीं होगा. कई बार यह सिर्फ सुविधा और आदत का मिला-जुला तरीका होता है.
तो अगली बार जब आपको किसी कमरे में कपड़ों से भरी कुर्सी दिखाई दे, तो इसे देखकर तुरंत यह न सोचे कि सामने वाला व्यक्ति बहुत लापरवाह है. हो सकता है उसके लिए वह कुर्सी साफ और गंदे कपड़ों के बीच की एक अस्थायी जगह हो, जो उसका काम आसान करती है और दिमाग को छोटे-छोटे फैसलों से बचाती है.